सास का तोहफ़ा

 

Indian daughter-in-law giving gift to her mother-in-law in a warm family moment, both smiling with mutual love and respect, emotional household story scene.


सुबह के आठ बजे थे। नीलम जी रसोई में काम कर रही थीं। गैस पर चाय चढ़ी थी और उन्होंने हाथ में बर्तन उठाया ही था कि बहू रीना अंदर आई।

“माँ जी, आज मैं चाय बना लूं?” रीना ने मुस्कुराते हुए कहा।

“नहीं बहू, तुम आराम करो, मैं बना लूंगी,” नीलम जी ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।


रीना ने धीरे से कहा, “माँ जी, आज ऑफिस नहीं जाना है, छुट्टी है। सोचा आपके साथ थोड़ा वक्त बिताऊं।”

“अरे, बहुत अच्छा किया, बेटा,” नीलम जी ने कहा और उसके लिए चाय का प्याला भरकर सामने रखा।


रीना के आने से इस घर में रौनक आ गई थी। छह महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। नीलम जी के पति रिटायर्ड बैंक अफसर थे और बेटा अर्जुन आईटी कंपनी में काम करता था। रीना नौकरी करती थी, लेकिन घर के कामों में भी हमेशा हाथ बंटाती थी।


पर एक बात थी जो रीना के मन को चुभती थी। नीलम जी हमेशा अपनी बेटी कविता को लेकर ज्यादा भावुक रहती थीं। जब भी कोई चीज़ अच्छी बनती या घर में कुछ नया आता, नीलम जी उसे कविता के घर भिजवा देती थीं।

“वो अकेली रहती है बेटा, उसे अच्छा लगेगा,” यही कहकर वे चीजें भेज देतीं।


शुरू-शुरू में रीना कुछ नहीं कहती थी। लेकिन धीरे-धीरे उसे यह महसूस होने लगा कि सासू माँ हर बार कविता को ज़्यादा अहमियत देती हैं।

पिछले हफ्ते रीना की मम्मी ने घर पर आकर सुंदर-सा साड़ी सेट दिया था, कहा था — “ये साड़ी तुम और माँ जी एक जैसी पहनना।”

रीना खुश थी। पर जब अगले दिन नीलम जी ने वो साड़ी अपने पास रखी और कहा — “कविता को पसंद आ जाएगी, मैं उसे दे दूँगी” — तो रीना के चेहरे की मुस्कान फीकी पड़ गई।


उस दिन रीना ने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप अपने कमरे में चली गई।

लेकिन अर्जुन ने उसकी आँखों की उदासी देख ली थी।

“क्या हुआ?” उसने पूछा।

“कुछ नहीं,” रीना ने मुस्कराने की कोशिश की।

“माँ ने फिर कुछ कहा?”

“नहीं अर्जुन, माँ कुछ गलत नहीं कहतीं… बस कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे मैं इस घर की नहीं, मेहमान हूँ।”


अर्जुन ने बस रीना का हाथ पकड़ लिया। “माँ बुरी नहीं हैं, बस आदत है उन्हें कविता की चिंता करने की। तुम देखना, एक दिन वो खुद समझ जाएँगी।”


कुछ दिन बाद रीना के ऑफिस में महिला दिवस का कार्यक्रम था। उसने सोचा कि माँ जी को भी गिफ्ट देगी।

शाम को जब वह घर आई, तो उसने नीलम जी को सुंदर-सी चुनरी और चॉकलेट का पैकेट देते हुए कहा,

“माँ जी, ये आपके लिए।”

नीलम जी हँस पड़ीं, “अरे, ये सब क्या है बहू?”

“आज महिला दिवस है ना, तो मेरे जीवन की सबसे प्यारी महिला के लिए।”


नीलम जी का दिल पिघल गया। उन्होंने उसे गले लगा लिया।

लेकिन तभी फोन की घंटी बजी — “कविता बोल रही थी, उसकी तबियत थोड़ी खराब है, उसे घर की याद आ रही है।”

नीलम जी ने तुरंत वही चॉकलेट और चुनरी उठाई और बोलीं, “ये सब मैं कविता के घर ले जाती हूँ, उसका मन बहल जाएगा।”


रीना कुछ नहीं बोली, बस हल्के से मुस्कुरा दी।

अगले दिन सुबह जब नीलम जी उठीं, तो देखा रीना रसोई में उनके लिए नाश्ता बना रही है।

“अरे बेटा, आज तो छुट्टी नहीं है तुम्हारी?”

“हाँ माँ जी, है तो नहीं, पर सोचा आपसे कुछ बात करनी है।”


रीना ने धीरे से कहा —

“माँ जी, मुझे कविता दीदी से कोई शिकायत नहीं है। पर जब भी आप मेरी दी हुई चीज़ें उन्हें दे देती हैं, तो मन थोड़ा उदास हो जाता है। मुझे लगता है कि आप मेरी भावनाओं को उतनी अहमियत नहीं देतीं। मैं चाहती हूँ कि जैसे आप कविता दीदी को प्यार देती हैं, वैसे ही मुझे भी दें।”


नीलम जी कुछ पल के लिए चुप रह गईं।

फिर उन्होंने रीना का हाथ पकड़कर कहा,

“बेटा, मुझे माफ़ कर दो। मुझे लगा तुम समझ जाओगी कि मैं ऐसा क्यों करती हूँ। कविता बचपन से ही थोड़ी अकेली रही है, अब ससुराल में भी उसकी सास नहीं है, तो मुझे हमेशा डर रहता है कि वो उदास ना रहे। पर आज समझ आया कि तुम्हें भी तो मेरा वही प्यार चाहिए।”


उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया।

अब जब भी घर में कुछ अच्छा बनता या कोई चीज़ आती, नीलम जी सबसे पहले रीना से पूछतीं,

“बहू, बताओ ये कविता के घर भेजूं या तुम रखोगी?”

और रीना हँसते हुए कहती — “थोड़ा मैं रख लेती हूँ, बाकी दीदी को भेज दीजिए।”


धीरे-धीरे दोनों में गहरा रिश्ता बन गया।

कविता भी जब घर आती, तो कहती —

“माँ, अब तो लगता है कि रीना भाभी नहीं, आपकी अपनी बेटी बन गई हैं।”


नीलम जी हँसकर बोलीं —

“हाँ बेटा, अब रीना हमारे लिए बहू नहीं, बेटी ही है।”

और इतना कहकर उन्होंने रीना को प्यार से गले लगा लिया।


संदेश:

> “जब सास बहू को बेटी जैसा मान लेती है,

तो बहू भी अपने प्यार और समझदारी से उस रिश्ते को सबसे खूबसूरत बना देती है।”

#SaasBahuSamman #GharKiMithiKahani



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