खामोश दीवारों से बाहर
सर्दियों की कड़वी रात थी। घड़ी में दो बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में स्थित त्रिपाठी परिवार का मकान आधा अंधेरे में डूबा था। अगले दिन घर ...Read More
सर्दियों की कड़वी रात थी। घड़ी में दो बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में स्थित त्रिपाठी परिवार का मकान आधा अंधेरे में डूबा था। अगले दिन घर ...