प्रेरक कहानी

पारिवारिक कहानी

गलतफ़हमी की दीवार

सुबह का समय था। मोहल्ले में चाय की खुशबू फैल रही थी। औरतें दरवाज़े के बाहर झाड़ू लगा रही थीं और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी चल रही थी। उ...

Ad Home

गलतफ़हमी की दीवार

February 22, 2026
सुबह का समय था। मोहल्ले में चाय की खुशबू फैल रही थी। औरतें दरवाज़े के बाहर झाड़ू लगा रही थीं और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी चल रही थी। उ...Read More

टूटा भरोसा, सच्चा प्यार

February 22, 2026
  रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे थे। अस्पताल की सफेद दीवारें और तेज़ रोशनी माहौल को और ठंडा बना रही थीं। आदित्य घबराया हुआ था। उसकी बाहों में ...Read More

दो बहुएँ और एक सच

February 21, 2026
शर्मा परिवार लखनऊ में रहता था। घर में सास सरोज, उनके दो बेटे अमन और रोहन, बड़ी बहू रिया और छोटी बेटी पायल रहती थीं। रिया शहर की पढ़ी-लिखी, स...Read More

अब और नहीं

February 21, 2026
  रात के लगभग साढ़े दस बजे थे। अजय अपने कमरे में लैपटॉप बंद करने ही वाला था कि फोन बज उठा। “हेलो?” दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज़ आई — “जल्दी ...Read More

Tennis

Racing

Powered by Blogger.