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खामोश दीवारों से बाहर

सर्दियों की कड़वी रात थी। घड़ी में दो बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में स्थित त्रिपाठी परिवार का मकान आधा अंधेरे में डूबा था। अगले दिन घर ...

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खामोश दीवारों से बाहर

February 14, 2026
सर्दियों की कड़वी रात थी। घड़ी में दो बज रहे थे। शहर के पुराने हिस्से में स्थित त्रिपाठी परिवार का मकान आधा अंधेरे में डूबा था। अगले दिन घर ...Read More

अधूरा साथ

February 14, 2026
  शाम का समय था। आसमान पर हल्की धूप की आखिरी किरणें ठहर-सी गई थीं। “कविता… मेरी बात तो सुनो!” रोहन बार-बार पुकार रहा था, लेकिन कविता बिना पी...Read More

ताले में बंद रिश्ते

February 13, 2026
दोपहर का समय था। घर के आँगन में धूप हल्की-हल्की फैल रही थी। शंकरलाल जी अपनी पुरानी लकड़ी की कुर्सी पर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। उम्र ढल चुकी थ...Read More

सोने का मोह

February 12, 2026
गांव के एक छोटे से घर में शारदा अपने परिवार के साथ रहती थी। उसके पति रमेश एक छोटी सी नौकरी करते थे। घर में एक बेटा अर्जुन और दो बेटियां रीमा...Read More

अधूरा वादा

February 12, 2026
रात के करीब साढ़े बारह बजे थे। कमरे में पंखा चल रहा था, फिर भी महेश बाबू को नींद नहीं आ रही थी। वे बार-बार करवट बदल रहे थे। “क्या हुआ? नींद ...Read More

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