प्रेरक कहानी

पारिवारिक कहानी

चलते रहना ही जीवन है

  गाँव के उस पुराने घर के बरामदे में एक लकड़ी की चौकी पड़ी रहती थी। उसी चौकी पर दादाजी शाम को बैठा करते थे। सफेद धोती, हल्का-सा कुर्ता, आँखो...

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चलते रहना ही जीवन है

March 20, 2026
  गाँव के उस पुराने घर के बरामदे में एक लकड़ी की चौकी पड़ी रहती थी। उसी चौकी पर दादाजी शाम को बैठा करते थे। सफेद धोती, हल्का-सा कुर्ता, आँखो...Read More

अब चुप नहीं रहूंगी

March 20, 2026
  सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। पूजा अपने कमरे में बैठी थी, हाथ पेट पर रखा हुआ था। सातवां महीना चल रहा था, लेकिन चेहरे पर खुशी ...Read More

अपनापन सबसे बड़ा धन

March 20, 2026
  रसोई से काम निपटाकर जब राधिका अपने कमरे में आई, तो उसने देखा कि मेज पर रखा मोबाइल लगातार चमक रहा था। स्क्रीन पर उसके पिताजी का नाम बार-बार...Read More

आदतों का सच

March 19, 2026
  “बहू, ये क्या तरीका है काम करने का? सुबह-सुबह भी तुझे जल्दी नहीं होती!” दरवाज़े के पास खड़ी विमला देवी ने ऊँची आवाज़ में कहा। रसोई में खड़...Read More

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