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दो रास्ते

रात के लगभग ग्यारह बजे थे। घर की लाइटें जल रही थीं, लेकिन माहौल बुझा-बुझा था। दरवाज़ा ज़ोर से खुला। “ये क्या तरीका है, काव्या?” पापा की आवाज...

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दो रास्ते

February 10, 2026
रात के लगभग ग्यारह बजे थे। घर की लाइटें जल रही थीं, लेकिन माहौल बुझा-बुझा था। दरवाज़ा ज़ोर से खुला। “ये क्या तरीका है, काव्या?” पापा की आवाज...Read More

पहली रसोई, पहली पहचान

February 09, 2026
सुबह का समय था। घर के आँगन में हल्की धूप उतर आई थी। दरवाज़े के पास आम के पत्तों की तोरण झूल रही थी और ज़मीन पर रंगोली अब भी ताज़ी लग रही थी।...Read More

घर का स्वाद

February 08, 2026
नेहा ने जैसे ही ससुराल की रसोई में कदम रखा, उसे पहली ही बात समझ आ गई थी— यहाँ चूल्हा सिर्फ नाम का था। किचन में माइक्रोवेव था, एयर फ्रायर था,...Read More

चुपचाप रखी चाबी

February 08, 2026
सरोज देवी को कमर में हमेशा दर्द रहता था। दर्द ऐसा कि सुबह उठते ही पहले हाथ दीवार पर टिकता, फिर ज़मीन पर पाँव पड़ता। डॉक्टर ने साफ कह दिया था...Read More

खामोश कुर्सी

February 07, 2026
शादी का घर था। ढोलक की थाप चल रही थी, और आँगन में लोग ऐसे घूम रहे थे जैसे सबके पास कोई न कोई ज़िम्मेदारी हो— सिवाय मेरे। मैं कुर्सी पर बैठा ...Read More

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