समझ का असली आईना
सविता जी रसोई में खड़ी थीं। चाय बनाते-बनाते उनका ध्यान बार-बार दरवाज़े की ओर जा रहा था। तभी फोन की घंटी बजी। “हैलो मम्मी…” “हाँ बेटा, बोल ...Read More
सविता जी रसोई में खड़ी थीं। चाय बनाते-बनाते उनका ध्यान बार-बार दरवाज़े की ओर जा रहा था। तभी फोन की घंटी बजी। “हैलो मम्मी…” “हाँ बेटा, बोल ...