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खामोश कुर्सी

शादी का घर था। ढोलक की थाप चल रही थी, और आँगन में लोग ऐसे घूम रहे थे जैसे सबके पास कोई न कोई ज़िम्मेदारी हो— सिवाय मेरे। मैं कुर्सी पर बैठा ...

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खामोश कुर्सी

February 07, 2026
शादी का घर था। ढोलक की थाप चल रही थी, और आँगन में लोग ऐसे घूम रहे थे जैसे सबके पास कोई न कोई ज़िम्मेदारी हो— सिवाय मेरे। मैं कुर्सी पर बैठा ...Read More

चाय में चीनी कम थी

February 07, 2026
सुबह के साढ़े पाँच बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही राधिका की नींद खुल चुकी थी। कमर में हल्का दर्द था, लेकिन आदत बन चुकी थी—दर्द से पहले ज़िम्...Read More

बहनें और बदलती किस्मत

February 06, 2026
हल्द्वानी शहर के एक पुराने मोहल्ले में दो बहनें रहती थीं — सरोज और कविता, अपनी माँ शारदा देवी के साथ। माँ रोज़ सुबह मंदिर जाती, और लौटते समय...Read More

रिश्तों का सहारा

February 05, 2026
सुबह के सात बजे थे। पूजा आटे की लोई बना रही थी। चूल्हे पर सब्ज़ी चढ़ी थी और कुकर की सीटी आने वाली ही थी। तभी टेबल पर रखा उसका फोन लगातार कंप...Read More

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