प्रेरक कहानी

पारिवारिक कहानी

चार दीवारों के बाहर की हवा

  सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही कविता की आँख खुल चुकी थी। रसोई में जाकर उसने चूल्हा जलाया, दूध चढ़ाया, और मन ही मन दिन भर के काम...

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रिश्तों का सहारा

February 05, 2026
सुबह के सात बजे थे। पूजा आटे की लोई बना रही थी। चूल्हे पर सब्ज़ी चढ़ी थी और कुकर की सीटी आने वाली ही थी। तभी टेबल पर रखा उसका फोन लगातार कंप...Read More

जब डर ने आवाज़ पाई

February 05, 2026
  रसोई में चूल्हा जल रहा था, दाल की हल्की-सी खुशबू हवा में घुल रही थी। अनु के हाथ चल तो रहे थे, पर मन कहीं और अटका हुआ था। तभी मोबाइल बजा। स...Read More

खामोशी के बीच एक रिश्ता

February 04, 2026
  रात गहरी हो चुकी थी। घर के हर कोने में सन्नाटा था, बस घड़ी की टिक-टिक और खिड़की से आती ठंडी हवा। सोफे पर लेटी काव्या की आँखों में नींद नही...Read More

दो आँगन, एक रिश्ता

February 03, 2026
गाँव के किनारे बसे एक छोटे से इलाके में दो बहनें रहती थीं — मीरा और नंदिनी। मीरा बड़ी थी। उसकी शादी शहर के एक बड़े बिज़नेसमैन राघव से हुई थी...Read More

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