दो रास्ते
रात के लगभग ग्यारह बजे थे। घर की लाइटें जल रही थीं, लेकिन माहौल बुझा-बुझा था। दरवाज़ा ज़ोर से खुला। “ये क्या तरीका है, काव्या?” पापा की आवाज...Read More
रात के लगभग ग्यारह बजे थे। घर की लाइटें जल रही थीं, लेकिन माहौल बुझा-बुझा था। दरवाज़ा ज़ोर से खुला। “ये क्या तरीका है, काव्या?” पापा की आवाज...