मौन की आग January 27, 2026 रेखा बहुत सीधी-सादी लड़की थी। गाँव के छोटे से घर में पली-बढ़ी, ज़्यादा सपने नहीं थे उसके— बस एक शांत घर, थोड़ा सा अपनापन और इज़्ज़त से जीन...Read More
माँ की गोद और घर की दीवारें January 07, 2026 दोपहर के लगभग दो बज चुके थे। घर में अजीब-सी खामोशी थी। बरामदे में पड़ी पुरानी कुर्सी पर बैठी सरला देवी बार-बार दीवार घड़ी की ओर देख रही थी...Read More
दो बहुएँ, एक घर और बदलता हुआ दिल January 07, 2026 गाँव के किनारे बसा था शर्मा परिवार का पुराना मकान। ईंटों की दीवारें, खपरैल की छत और आँगन में एक नीम का पेड़। घर पुराना था, लेकिन उसमें रहन...Read More
दो माँ, एक बहू January 06, 2026 नेहा आईने के सामने खड़ी खुद को देख रही थी। हल्दी की खुशबू, मेहंदी का रंग और आँखों में सपनों की चमक। “सच में… अब मैं ससुराल जाने वाली हूँ,”...Read More
माँ से प्यारी सास January 04, 2026 शादी का दिन था। घर में शहनाइयों की आवाज़ गूँज रही थी, लेकिन काव्या के दिल में अजीब-सी घबराहट थी। माँ की कमी उसे हर मौके पर खलती थी, पर आज ...Read More
दो बहुएँ, एक घर और सच का आईना January 01, 2026 गृह प्रवेश... “चलो… कलश गिराओ।” सास सुरेखा की आवाज़ में वर्षों का अधिकार और घर की मुखिया होने का गर्व साफ़ झलक रहा था। सबकी नज़रें दरवाज़े...Read More