सौ रुपये की कीमत January 30, 2026अमन को इस कॉलोनी में आए अभी ज़्यादा दिन नहीं हुए थे। सरकारी नौकरी लगी थी, इसलिए शहर बदलना पड़ा। कॉलोनी साफ़-सुथरी थी, लोग अपने-अपने काम में ...Read More
माँ की छाया और बेटी के सपने January 28, 2026 कॉलेज का बड़ा सा सभागार फूलों से सजा हुआ था। मंच पर चमकती लाइटें, सामने कतारों में बैठे छात्र-छात्राएँ और उनके गर्व से भरे माता-पिता। आज ब...Read More
छोटी सी ज्योति November 30, 2025 दिल्ली के यमुना पार इलाके में रोज शाम के वक्त एक छोटी लड़की सड़क के किनारे बैठती थी। नाम था—ज्योति। उम्र—11 साल। उसके कपड़े फटे हुए, बाल ब...Read More
वो बच्चा जो लोगों के दिल ठीक करता था November 29, 2025 दोस्तों, ये कहानी है एक ऐसे छोटे लड़के की, जिसकी जेब में कुछ नहीं था, पेट में खाना नहीं था, लेकिन दिल में ऐसी रोशनी थी कि वो टूटे हुए लोगो...Read More
एक गर्म रोटी… और एक नई ज़िंदगी November 29, 2025 शाम के पाँच बज रहे थे। दिल्ली की सर्द हवा हड्डियों तक चुभ रही थी। इंडिया गेट के पास बने एक बड़े और शानदार “हेरिटेज कैफ़े’’ में रोशनी चमक र...Read More
डॉक्टर अनिरुद्ध और विश्वास की शक्ति November 29, 2025 भोपाल के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अनिरुद्ध वर्मा अपने अलग अंदाज़ के लिए पूरे शहर में जाने जाते थे। दिल की बीमारी के मरीजों का वह इलाज ...Read More
Strong Soul Golgappa : Divorced to Rebirth November 28, 2025 सूरज की रोशनी खिड़की से अंदर आकर बस एक ही चीज़ पर पड़ रही थी— तलाक का वो कागज़, जिसे देखते ही अनाया की उंगलियाँ काँप रही थीं। ऊपर एक शब्द ...Read More
एक छत, दो जिंदगियाँ और उम्मीद का चिराग November 28, 2025 शहर की भीड़ भरी सड़कों के किनारे, ट्रैफिक के हॉर्नों और लोगों की पुकारों के बीच एक छोटा सा स्टॉल लगा था— “रामू चाय वाला।” रामू बारह साल का...Read More
वह बच्चा जो दीवारों को सुन सकता था November 27, 2025 शहर के पुराने मोहल्ले में एक टूटा-फूटा घर था। दीवारों में दरारें थीं, छत में टपकन, और कमरे में बस दो चार चीजें—एक टूटी चारपाई, एक पुराना म...Read More
एक छोटी सी मदद जिसने बदल दी तकदीर November 27, 2025 मुंबई शहर की भीड़ भरी, भागती-दौड़ती ज़िंदगी में एक लड़की रहती थी—सिया, उम्र सिर्फ़ 21 साल। ना माँ-बाप, ना कोई अपना… सिया एक छोटे से टूटे क...Read More
सफ़र अधूरा नहीं रहता November 23, 2025 शाम के लगभग 7 बज रहे थे। घर में हल्की भागदौड़, रसोई में भाप उठती सब्ज़ी की खुशबू और टीवी पर धीमी आवाज़ में चलता न्यूज़ चैनल— सब कुछ रोज़ ज...Read More
मां का घर November 21, 2025 शाम का समय था। धूप धीरे-धीरे आँगन की चौखट से फिसल रही थी। पूरे घर में अजीब-सी शांति थी, जैसे कोई सांसें रोककर ज़िंदगी को देख रहा हो। किरण ...Read More
वो आख़िरी बस November 21, 2025 रात के करीब साढ़े बारह बजे थे। वाराणसी की गलियाँ बारिश की मिट्टी की खुशबू से भरी हुई थीं। शहर का शोर कम हो चुका था—बस दूर घाटों से आती घंट...Read More