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तीज का पहला झूला

January 30, 2026
तीज आने में अभी दस दिन बाकी थे, लेकिन गाँव की हवा में हरियाली और उत्साह पहले ही घुलने लगा था। आँगनों में झूले टंगे थे, चूल्हों पर खीर की खुश...Read More

मिट्टी से सनी हथेलियाँ

January 30, 2026
  शहर की सबसे ऊँची इमारतों के बीच शर्मा परिवार का बंगला खड़ा था — चमकता हुआ, मगर ठंडा। घर में सब कुछ था, बस अपनापन नहीं। घर के मालिक सुरेश श...Read More

बेटी का साया

January 29, 2026
  सुबह का समय था। घर के आँगन में धूप उतर रही थी और तुलसी के पास रखे मटके में चिड़ियाँ पानी पी रही थीं। रमेश बाबू आज कुछ ज़्यादा ही खामोश थे।...Read More

रिश्तों के रंग

January 24, 2026
सुबह का समय था। आँगन में तुलसी के चौरे पर धूप उतर चुकी थी। घर के भीतर रसोई से बर्तनों की खनकती आवाज़ें आ रही थीं। “अरे बहु, ज़रा देख लेना… द...Read More

कर्ज़ में दबा एक पिता

January 24, 2026
रात के ग्यारह बज रहे थे। घर में सब सो चुके थे। बच्चों के कमरे से धीमी-सी साँसों की आवाज़ आ रही थी। नीलम दरवाज़े के पास खड़ी, अपने दोनों बेटो...Read More
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