आख़िरी कॉल… जो अधूरी नहीं थी

 

अंधेरे कमरे में पड़ा मोबाइल, आधा खुला दरवाज़ा और खोई हुई बहन की यादों से भरा सन्नाटा—एक सस्पेंस और इमोशन से भरी कहानी का दृश्य।


“कमरा बिल्कुल शांत था…

पर मेज पर रखा मोबाइल अब भी गर्म था, जैसे अभी-अभी किसी ने उसे बहुत कसकर पकड़ा हो।”


मैं दहलीज़ के पास खड़ा था, पर मेरे पैरों में ताकत नहीं थी।

किसी ने कहा—


“अपूर्वा ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था… और फिर…”


मेरे कान सुन्न हो गए।


मैं, राघव, अपनी छोटी बहन अपूर्वा के घर पहुँचा था।

वो घर, जहाँ पिछले साल तक दीवारें उसकी हँसी से गूँजती थीं,

और आज… उसकी परछाईं भी नहीं बची थी।


माँ को पड़ोसनें संभाल रही थीं।

पिता बिना पलक झपकाए दरवाज़े को देखते रहे… जैसे उनकी दुनिया उसी कमरे में फँसी हो।


और बीच में—एक रजिस्टर रखा था…

उसकी आख़िरी लिखावट।



अपूर्वा की शादी को पाँच महीने हुए थे।

शादी के दिन वह हँसते हुए मेरे गले लगकर बोली—


“भैया, मैं डरपोक नहीं हूँ… मैं सब संभाल लूँगी।”


लेकिन धीरे-धीरे उसके फ़ोन आने बंद होने लगे…

बातें छोटी होती गईं,

और संदेश तो जैसे हर दिन थोड़ा-थोड़ा कम होते-होते लगभग खत्म ही हो गए।

और उसकी मुस्कान तस्वीरों में भी बनावटी लगने लगी।


मैंने कई बार पूछा—


“सब ठीक है?”


वह वही पुराना जवाब भेजती—


“हाँ भैया, सब ठीक है…”


लेकिन बहनें ‘ठीक हूँ’ कहकर भी अपना दर्द छुपा नहीं पातीं…

उनकी आवाज़ ही बता देती है कि वे भीतर कहीं टूट रही हैं।



अपूर्वा की आख़िरी लिखावट...

कांपते हाथों से मैंने रजिस्टर खोला।


उसने लिखा था—


“भैया…

जिंदगी से लड़ते-लड़ते मैं थक गई हूँ।

किसी को दोष मत देना, क्योंकि दोषी अभी सामने नहीं है।

लेकिन अगर मैं हार जाऊँ, तो मेरी कहानी को आधा मत छोड़ना।

सच पूरा बाहर आएगा…

किसी न किसी के ज़रिए।”


बस इतना ही।


नीचे पेन की लाइन अधूरी थी—

जैसे वह लिखते-लिखते रो पड़ी हो।



पुलिस आई।

अपूर्वा के पति आर्यन और ससुराल वालों को पूछताछ के लिए ले जाया गया।


आर्यन बार-बार कहता—


“मैंने हाथ भी नहीं लगाया उसे…

अपूर्वा बस उदास रहती थी… पर कारण कभी नहीं बताया।”


मैं समझ नहीं पा रहा था—

क्या सच में यह सब घरेलू समस्याओं की वजह से हुआ?


तभी पड़ोसन ने बताया—


“बहू कई दिनों से किसी बात से घबराई रहती थी…

लेकिन किसी से कुछ नहीं कहती थी।”


कुछ तो गड़बड़ थी।

बहुत गहरी।



तभी एक धीमा, डरा हुआ सा स्वर मेरे पीछे से उठा—


“भैया… मुझे कुछ कहना है…”


वह थी आर्या, आर्यन की 10 साल की छोटी बहन।


चेहरा डर से सफेद।

आँखों में नींदहीन रातें।


मैं नीचे बैठा और पूछा—


“आर्या, तुम क्या जानती हो?”


उसने फुसफुसाकर कहा—


“दीदी… किसी से बहुत डरती थीं।

वो बार-बार कहती थीं—‘मुझे कोई देख रहा है… कोई पीछा कर रहा है।’

पर घर पर किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।”


मैं चौंक गया—


“कौन? कौन देख रहा था?”


आर्या ने काँपते हाथों से अपनी जेब से छोटा सा पेपर निकाला।


“ये उन्होंने मुझे देने को कहा था, अगर कभी उन्हें कुछ हो जाए।”


मेरी हथेलियाँ ठंडी हो गईं।


पेपर पर एक ही लाइन लिखी थी—


“मेरी मौत का जवाब मेरे फोन में है।”



पुलिस ने अपूर्वा का फोन अनलॉक किया।

जैसे ही मैसेज खोले गए, पूरा सच बाहर आने लगा।


अपूर्वा पिछले आठ महीनों से अपना इंस्टाग्राम हैक होने से परेशान थी।

जिस इंसान को उसने ब्लॉक किया था—

वही उसकी हर तस्वीर पर नजर रखता था।


नाम था—विवेक शर्मा।


वह उसका पुराना कॉलेज सीनियर था।

एकतरफा प्यार में पागल।


उसने अपूर्वा की शादी की खबर सुनी तो हिंसक हो गया।


फोन में उसके दर्जनों मेसेज थे—


“तू सिर्फ मेरी है।”

“तेरे पति को सब बता दूँगा।”

“तेरी प्राइवेट तस्वीरें वायरल कर दूँगा।”

“तू चाहे किसी की भी पत्नी बन जा—मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा।”


अपूर्वा ने कई बार जवाब दिया—


“रुक जाओ… मेरे घर मत आना… मुझे डर लग रहा है।”


लेकिन उसका पीछा बढ़ता गया।


उस दिन—जब उसने खुद को बंद किया—

उस सुबह विवेक ने आखिरी धमकी भेजी थी—


“आज रात 12 बजे तेरा नाम मेरे नाम के साथ सब जगह होगा।

तू चाहकर भी अपनी इज़्ज़त नहीं बचा पाएगी।”


अपूर्वा टूट गई।

उसे लगा—वह अपनी शादी भी बचा नहीं पाएगी,

न ही अपनी इज़्ज़त।


और उसने खुद को हारने दिया।



फोन के बाद पुलिस ने सबूत जुटाए।

पता चला—घर में किसी ने उसे सताया नहीं।


लेकिन…


किसी ने उसके डर को समझने की कोशिश भी नहीं की।


आर्यन रोते हुए बोला—


“वह बार-बार कहती थी—‘मुझे बचा लो।’

मैं समझा ही नहीं…

मुझे लगा शादी का स्ट्रेस है…”


कभी-कभी चुप रहना भी एक तरह का अपराध बन जाता है।



दराज़ में एक मुड़ा हुआ पेपर मिला।


उस पर लिखा था—


“भैया…

मैं बस थक गई हूँ।

रोज़-रोज़ डरकर जी नहीं सकती।

अगर मेरे बाद किसी को सज़ा मिले—तो वही मिले जिसका पीछा करते-करते मेरी साँसें थम गईं।”


पुलिस ने उसी रात विवेक शर्मा को गिरफ्तार किया।


उसकी चैट, लोकेशन हिस्ट्री, फेक अकाउंट्स—सब खुलकर सामने आ गए।




अपूर्वा की अर्थी पर खड़े होकर मैं कुछ भी नहीं बोल पाया।


पर जब उसकी तस्वीर के सामने दीया जलाया,

तो मन में एक ही बात आई—


“तुमने अपने डर से हार मान ली बहन…

पर तुम्हारी लड़ाई मैंने पूरी कर दी।”


कुछ अपराध वो नहीं करते जिन पर हम शक करते हैं—

कुछ अपराध वो करते हैं

जो परछाई की तरह पीछे लगे रहते हैं

और सामने आते ही नहीं।


अपूर्वा अब नहीं है—

पर उसे न्याय मिल चुका है।


उसका आख़िरी संदेश मेरे दिल में दर्ज है—


“मेरी कहानी अधूरी मत छोड़ना…”


और आज—वह कहानी अधूरी नहीं रही।

पूरी हो गई।


#सच्चाईकीआवाज़ #अधूरीकहानीकासच



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