डाँट में छिपा प्यार
सुबह की हल्की ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी। राधा रसोई में चाय बना रही थी, लेकिन उसका मन कहीं और था। आज उसके पापा का जन्मदिन था… और यह पहला साल था जब वह ससुराल में थी।
राधा ने धीरे से चाय कप में डाली और आँगन में आकर बैठ गई। सामने तुलसी का पौधा था, जिसे पानी देते हुए उसकी आँखें भर आईं।
“पापा होते तो आज सुबह ही आवाज़ लगा देते—‘बेटा, चाय बनी कि नहीं?’”
उसने जल्दी से आँसू पोंछे और मंदिर जाने की तैयारी करने लगी।
मंदिर में उसने हाथ जोड़कर भगवान से बस एक ही प्रार्थना की—
“मेरे पापा हमेशा खुश रहें… स्वस्थ रहें… और कभी अकेला महसूस न करें।”
घर लौटकर उसने सासू माँ के साथ मिलकर काम किया। सासू माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा—
“आज कुछ खास है क्या, बहू? सुबह से कुछ अलग लग रही हो।”
राधा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“जी माँ, आज पापा का जन्मदिन है।”
सासू माँ ने तुरंत कहा—
“अरे! तो फिर शाम को अच्छे से मनाएंगे। तुम केक ले आना।”
राधा को बहुत अच्छा लगा। उसे लगा जैसे इस घर में भी उसकी भावनाओं की कद्र है।
शाम को घर में छोटी-सी तैयारी हो गई। केक टेबल पर रखा था। सब लोग इकट्ठा हो गए थे। लेकिन राधा का दिल तेज़-तेज़ धड़क रहा था।
उसने मोबाइल उठाया और पापा को वीडियो कॉल किया।
उधर उसके पापा और मम्मी चुपचाप बैठे थे। जैसे ही कॉल उठी, राधा की आवाज़ खुशी से भर गई—
“हैप्पी बर्थडे पापा!!!”
पापा ने जैसे ही उसे देखा, उनकी आँखें चमक उठीं, लेकिन उनमें हल्की नमी भी थी।
राधा हँसते हुए बोली—
“पापा, यहाँ सब लोग आपका बर्थडे मना रहे हैं। आप जानते हैं, यहाँ सब मुझे बहुत प्यार करते हैं… खासकर सासू माँ।”
फिर थोड़ी देर रुककर उसने धीरे से कहा—
“पापा… मैं आपको बहुत मिस करती हूँ… आपकी डाँट भी…”
पापा चुप रहे, बस उसे देखते रहे।
राधा की आवाज़ थोड़ी भर आई—
“याद है पापा, जब मैंने वो मॉडर्न ड्रेस खरीदी थी और आपने गुस्से में उसे फेंक दिया था? उस दिन मुझे आपसे बहुत गुस्सा आया था…”
“और जब आप मुझे पार्टी से सबके सामने डाँटकर घर ले आए थे… तब तो मुझे लगा था कि आप दुनिया के सबसे सख्त पापा हो…”
राधा हल्का सा हँसी, फिर बोली—
“लेकिन आज समझ आता है… आप गलत नहीं थे।”
घर के बाकी लोग चुपचाप उसकी बातें सुन रहे थे।
“पापा, अगर उस दिन आपने मुझे नहीं रोका होता… तो शायद मैं आज इतनी समझदार नहीं होती… आपने मुझे हमेशा सुरक्षित रखा…”
“आप कहते थे ना—‘दुनिया बदलना मुश्किल है, लेकिन खुद को संभालना जरूरी है।’ तब समझ नहीं आता था… अब आता है।”
राधा की आँखों से आँसू बहने लगे—
“पापा… आज मैं एक स्कूल में टीचर बन गई हूँ। बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें ये भी सिखाती हूँ कि माँ-बाप की डाँट में भी प्यार होता है…”
“क्योंकि अगर वो प्यार न हो… तो डाँट भी नहीं होती…”
उधर पापा अब खुद को रोक नहीं पाए। उनके आँसू लगातार बह रहे थे।
उन्होंने काँपती आवाज़ में कहा—
“बेटा… मुझे माफ़ कर देना… अगर कभी ज्यादा डाँट दिया हो…”
राधा तुरंत बोली—
“नहीं पापा… अब लगता है कि काश… थोड़ी और डाँट लेते आप…”
यह सुनकर सबकी आँखें नम हो गईं।
सासू माँ ने पास आकर राधा के कंधे पर हाथ रखा।
पापा ने हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया—
“खुश रहो बेटा… हमेशा ऐसे ही सही रास्ते पर चलो…”
राधा मुस्कुरा दी, लेकिन उसकी आँखों में आँसू अब भी थे।
फिर उसने केक काटा… और मोबाइल स्क्रीन के सामने पापा को दिखाया—
“ये आपके लिए है पापा…”
उस पल दूरी तो थी… लेकिन दिल बिल्कुल पास थे।
सीख:
माँ-बाप की डाँट अक्सर हमें बुरी लगती है, लेकिन वक्त के साथ समझ आता है कि वही डाँट हमारे लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होती है।
जिसे हम रोक-टोक समझते हैं, वही असल में उनका प्यार होता है… ❤️

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