व्हाट्सऐप वाला प्यार
सुबह के करीब साढ़े सात बजे का समय था।
राकेश ऑफिस जाने की तैयारी में था कि तभी उसका मोबाइल टेबल पर झनझनाने लगा।
स्क्रीन पर एक अजनबी नंबर से व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आ रही थी।
पहले तो उसने इग्नोर कर दिया, लेकिन दूसरी बार कॉल फिर आया।
जिज्ञासावश उसने कॉल उठा लिया —
सामने से किसी महिला की मुस्कराती हुई शक्ल दिखाई दी।
“हेलो राकेश! कैसे हो तुम?”
आवाज़ कुछ जानी-पहचानी सी थी, लेकिन चेहरा समझ नहीं आया।
राकेश ने चश्मा ठीक करते हुए कहा,
“माफ कीजिए, आप कौन?”
सामने से ठहाका लगा —
“अरे, याद नहीं आया? तुम्हारे स्कूल की पूजा! रोल नंबर 47, वो जो गणित में हमेशा तुमसे आगे रहती थी…”
राकेश का चेहरा खिल उठा,
“अरे पूजा! तुम? इतने साल बाद! कहाँ थीं तुम?”
थोड़ी बातें हुईं, पुरानी यादें ताज़ा हुईं।
फिर पूजा ने कहा —
“राकेश, मैं कल ही अपने शहर वापस आई हूँ। चलो न, इतने सालों बाद मिलते हैं। मैं फ्री हूँ शनिवार को।”
राकेश के चेहरे पर चमक आ गई।
इतने सालों बाद कोई स्कूल फ्रेंड, वो भी उसकी पुरानी क्रश — कौन मना करेगा?
उसने झट से कह दिया,
“ठीक है पूजा, शनिवार को शाम में मिलते हैं।”
शनिवार की शाम...
राकेश ने सुबह से ही तैयारियाँ शुरू कर दीं।
पत्नी सीमा ने पूछा —
“आज इतने सजे-धजे क्यों हो? कोई स्पेशल मीटिंग है क्या?”
राकेश मुस्कुराया,
“हाँ, एक नया क्लाइंट आया है शहर से बाहर से, उसी से मिलने जा रहा हूँ।”
सीमा ने हँसते हुए कहा,
“ठीक है, बस घर देर मत आना।”
राकेश ने नया परफ्यूम लगाया, बालों में जेल लगाई, और मोबाइल की सेल्फी कैमरा में खुद को देखकर मुस्कराया —
“आज तो मैं भी हीरो लग रहा हूँ!”
होटल ब्लू डायमंड में मुलाक़ात...
शाम को 6 बजे राकेश पहुँचा।
सामने लॉबी में पूजा बैठी थी — अब और भी स्टाइलिश, आत्मविश्वासी और खूबसूरत।
दोनों ने हाथ मिलाया और पास की टेबल पर बैठ गए।
“वाह राकेश, तुम तो बिलकुल नहीं बदले!”
“और तुम तो पहले से भी ज़्यादा…” — राकेश बोलते-बोलते रुक गया।
फिर हँसी-मज़ाक, स्कूल की बातें, पुराने दोस्तों की यादें।
कुछ देर में पूजा ने कहा —
“राकेश, तुम बैंक में काम करते हो ना?”
“हाँ, शाखा प्रबंधक हूँ।”
“अच्छा! तो एक छोटा-सा काम है तुमसे…”
राकेश बोला —
“हाँ-हाँ, कहो।”
पूजा ने अपने बैग से एक फाइल निकाली —
“देखो, मेरे पति बिज़नेस करते हैं। हमारे एक प्रोजेक्ट का थोड़ा पैसा फँस गया है, और मुझे तुरंत दो लाख रुपये किसी को ऑनलाइन भेजने हैं।
लेकिन मेरा अकाउंट फिलहाल फ्रीज़ है। अगर तुम अपने अकाउंट से भेज दो तो मैं कल कैश दे दूँगी।”
राकेश थोड़ी देर सोच में पड़ा।
फिर दिल ने कहा — “इतनी पुरानी दोस्त है, बुरा क्या हो सकता है।”
उसने बिना सोचे-समझे ट्रांसफर कर दिया।
पूजा ने मुस्कुराकर कहा —
“थैंक यू डियर! तुमसे तो वही पुरानी उम्मीद थी।”
😶 अगली सुबह...
राकेश उठा तो मोबाइल में बैंक का मैसेज देखा —
“₹2,00,000 transferred successfully.”
पर अब पूजा का नंबर “switched off” दिखा रहा था।
व्हाट्सऐप प्रोफाइल भी गायब।
राकेश समझ गया कि वो ठगा गया है।
पत्नी सीमा ने पूछा —
“क्यों, कल तुम्हारी मीटिंग कैसी रही?”
राकेश ने फीकी हँसी हँसते हुए कहा,
“बहुत बढ़िया… बस, थोड़ा नुकसान हो गया।”
सीमा ने कहा —
“नुकसान? कैसा?”
राकेश बोला —
“बस इतना समझ लो कि किसी पुराने रिश्ते की चमक में नई समझ खो दी मैंने…”
सीमा ने हँसकर कहा —
“कोई बात नहीं, अब चाय पी लो। असली ‘क्लाइंट’ तो मैं ही हूँ, जो रोज़ तुम्हारे लिए बैठी हूँ।”
राकेश ने उसकी ओर देखा, हल्की मुस्कान दी —
और मन ही मन सोचा —
"कभी-कभी पुरानी यादें नहीं, बस पुराने सबक ही याद रखने चाहिए..."
🎵 रेडियो
पर धीमे सुरों में बज रहा था:
> “वो अफसाने जो कभी अधूरे रह गए,
वही तो ज़िंदगी के सबसे सच्चे सबक बन गए...”
#WhatsAppWalaPyar #EmotionalLoveStory

Post a Comment