आख़िर किसकी गलती?
सुबह के ठीक नौ बजे थे।
रसोई में अदरक की चाय की भाप उठ रही थी, और बाहर बालकनी में तेज़ धूप खड़ी थी।
कपिल ने अख़बार मोड़ा ही था कि तभी पीछे से एक आवाज़ आई—
“सी यू, मॉम… बाय डैडी!”
नैना अपने छोटे बैकपैक को कंधे पर डालकर हड़बड़ी में बाहर भाग रही थी।
कपिल की त्यौरियाँ चढ़ गईं—
“अरे! कितनी बार कहा है डैडी नहीं—पापा बोला करो… ये अंग्रेज़ी किसको दिखा रही हो?”
नैना मुस्कुराई, जल्दी से बाहर निकली और गाड़ी की चाबी घुमाकर उसे स्टार्ट कर दिया।
सीमा ने कपिल के सामने कप चाय रखते हुए प्यार से कहा—
“कपिल, आजकल के बच्चे ऐसे ही बोलते हैं। तुम भी ना… सुबह-सुबह गुस्सा क्यों करते हो?”
कपिल ने खीझकर कहा—
“इस घर में मेरी किसी बात की वैल्यू ही कहाँ है!”
सीमा ने आह भरी—
“मैं थोड़ी देर में निकल रही हूँ। एनजीओ की मीटिंग है, फिर सिलाई क्लास। आज वापसी देर से होगी। लंच में कुछ हल्का खा लेना, ठीक है?”
कपिल चुप रहा।
उसे महसूस हो रहा था कि उसकी पत्नी और बेटी दोनों जैसे उसकी दुनिया से दूर होते जा रहे हों।
कपिल का अकेलापन...
कपिल बैंक से रिटायर होकर घर पर था।
रिटायरमेंट के बाद वह एक दोस्त की तरह घर में रहना चाहता था—
सीमा के साथ बातें करना चाहता था, बेटी के साथ चाय पीना चाहता था।
पर सीमा सुबह से शाम तक इतनी व्यस्त रहती कि कपिल को दिनभर दीवारें ताड़नी पड़तीं।
और नैना… उसकी ज़िंदगी में बस सोशल मीडिया, डांस ग्रुप, प्रतियोगिता, और सेल्फ़ियां थीं।
एक दिन कपिल ने बड़ी उम्मीद से कहा—
“सीमा, इस रविवार नैना के लिए लड़का देखने जाना है। शर्मा जी का बेटा डॉक्टर है, बहुत अच्छा परिवार है।”
सीमा ने तुरंत जवाब दिया—
“कपिल, पहले उससे पूछ तो लो! वो अपनी डांस अकादमी खोलना चाहती है, शादी अभी नहीं।”
कपिल के मन में निराशा भर गई।
“अरे, हम मां-बाप हैं, हम क्या गलत चाहेंगे?”
सीमा कुछ कहना चाहती थी, पर उसने चुप रहना ही ठीक समझा।
वह दर्दनाक दिन...
रविवार आया, और शर्मा परिवार मिलने भी आ गये।
पर नैना का कोई पता नहीं।
सब इंतज़ार कर ही रहे थे कि तभी अचानक घर का दरवाज़ा खुला…
और नैना हंसते हुए अंदर आई—
“मॉम! मैं सिलेक्ट हो गई! इंटरस्टेट डांस शो के लिए! अब नेक्स्ट लेवल के लिए मुंबई जाना होगा!”
शर्मा परिवार को लगा जैसे उन्हें बैठकर शर्मिंदा किया गया हो।
वे विनम्रता से उठकर चले गए—
“आपकी बेटी वाकई बहुत प्रतिभाशाली है, लेकिन हमारे घर की बहू की ज़िम्मेदारियाँ अलग होंगी… शायद वह उन्हें निभा न पाए। इसलिए हमें माफ़ कीजिए। रिश्ता शायद नहीं बन पाएगा।”
कपिल को लगा किसी ने दिल पर चोट कर दी।
नैना को कोई ग्लानि नहीं थी, सीमा भी चुप थी।
उस रात कपिल देर तक जागता रहा।
कुछ महीनों बाद नैना को वही डांस शो के दौरान
एक युवा कोरियोग्राफर—आरव—से प्यार हो गया।
आरव समझदार, शांत, बेहद विनम्र था।
सीमा को लड़का बहुत पसंद आया।
कपिल की इच्छा के विरुद्ध जाकर शादी कर दी गई।
शादी के बाद दो महीने सब हंसते-खेलते बीते।
फिर नैना के भीतर वही पुरानी बेचैनी जाग उठी—
“आरव की दुनिया बस रिहर्सल, सिखाना, घर, परिवार…
और मेरी दुनिया है—स्टेज, रोशनी, संगीत, सपने…”
धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरी आने लगी।
एक दिन बहस के दौरान आरव ने कहा—
“नैना, थोड़ा परिवार को भी समय दो…”
और नैना ने गुस्से में कहा—
“मेरे सपनों को तुम्हें समझ ही नहीं आएगा!”
वह रोती हुई अपने मायके लौट आई।
टूटे रिश्तों की आग...
कपिल ने समझाया—
“बेटा, घर ऐसे छोड़ा नहीं जाता। लौट जाओ।”
सीमा बोली—
“तुम उसे क्यों समझा रहे हो? इसके सपने पहले हैं, शादी बाद में!”
कपिल ने पहली बार सीमा पर आवाज़ ऊंची की—
“तुमने अपनी बेटी को कब परिवार का अर्थ सिखाया?
सारा दोष इस बच्ची का नहीं… हमारी गलतियों का है।”
नैना वहीं रह गई।
डांस का जुनून अब कहीं खो चुका था…
प्रतियोगिताओं में उसकी जगह अब नई लड़कियाँ ले चुकी थीं।
पुराने दोस्त उसे “मैरिड” कहकर मस्ती उड़ा देते।
आरव की यादें लगातार सतातीं—
उसका धैर्य, उसकी मुस्कान, उसका साथ…
एक दिन टूटकर वह रो पड़ी।
तभी फोन आया—
“मैडम, आपकी मां बेहोश होकर गिर गई हैं। दिल का दौरा पड़ा है।”
नैना घबरा गई।
वह दौड़ती हुई अस्पताल पहुँची।
पहली बार उसने किसी को कॉल किया—
आरव।
और वह बिना एक मिनट गंवाए दौड़ा आया।
प्यार का असली चेहरा...
आरव ने सारा काम संभाल लिया—
फॉर्म भरे, पैसे दिए, डॉक्टरों से बात की, कपिल को हिम्मत दी और शांत किया।
सीमा जब होश में आई तो सबसे पहले आरव को ही देखा।
उसकी आँखें भर आईं—
“तुम यहाँ?”
आरव मुस्कुराया—
“मम्मी जी… यहाँ आपका ही परिवार है।”
सीमा रो पड़ी।
अगले तीन दिन में उसने
कपिल के चुप चेहरे, नैना की टूटन, और आरव की इंसानियत देखी।
उसे एक-एक पल में महसूस हुआ—
कितनी बड़ी गलती उससे हुई थी।
सीमा घर लौटी तो सब कुछ बदल चुका था।
नैना रसोई में थी—
“मम्मा, आराम कीजिए… मैं बना देती हूँ।”
कपिल मुस्कुरा रहे थे।
आरव बोला—
“मम्मी जी, जब आपका मन करे… हमारे घर आ जाइएगा। वो भी आपका ही घर है।”
सीमा ने पहली बार दिल से शांति महसूस की।
उसने नैना का हाथ पकड़ा—
“बेटा…
अगर तुम चाहो तो मैं खुद तुम्हें आरव के घर छोड़ने चलूंगी।
और इस बार मैं तुम्हें रोकने
नहीं दूंगी।”
नैना रोते हुए मां से लिपट गई।

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