❝ नन्ही रिद्धि की खामोश पुकार ❞
दिल्ली की उस ठंडी शाम की हवा में अजीब-सी नमी थी।
मैं खिड़की के पास बैठा चाय पी रहा था कि तभी मेरी बेटी साक्षी ने कहा—
“पापा, हम दोनों सुपरमार्केट जा रहे हैं। रिद्धि सो रही है… बस आधा घंटा देख लीजिए।”
मैं मुस्कुराया।
“ज़रूर, अपनी नातिन के साथ समय कौन नहीं बिताना चाहेगा?”
दो महीने की रिद्धि अपने छोटे-से बेबी क्रिब में गुलाबी कंबल में लिपटी सोई थी। उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान थी—मानो सपने में किसी फ़रिश्ते से बात कर रही हो।
साक्षी और वरुण जल्दी-जल्दी बाहर निकल गए।
घर में मैं और रिद्धि—बस हम दो ही।
शुरुआत में सब बिल्कुल ठीक था...
मैंने उसके पास बैठकर टीवी हल्का-सा चला दिया। वह सोई रही।
मुझे लगा आज शाम बहुत आसान रहने वाली है।
पर दस मिनट भी नहीं बीते थे कि रिद्धि अचानक रो पड़ी।
पहले धीरे… फिर तेज़… और फिर इतनी जोर से कि मेरी धड़कन बढ़ गई।
मैंने उसे गोद में लिया, पीठ थपथपाई, लोरी गुनगुनाई—
“सो जा मेरी गुड़िया… सो जा…”
लेकिन उसका रोना किसी साधारण परेशानी जैसा नहीं था।
उसके चेहरे पर दर्द था—सचमुच का दर्द।
मैं घबरा गया।
कुछ तो गड़बड़ थी...
मैंने सोचा शायद भूख लगी होगी।
दूध गरम किया, बोतल लगाई—पर उसने मुँह तक नहीं लगाया।
रोना और बढ़ गया।
फिर सोचा शायद गैस होगी।
लेकिन उसकी टाँगें भी ऐसे झटके खा रही थीं जैसे वह कुछ सहन कर रही हो।
दादाजी का दिल काँपने लगा।
“ये रोना… मैं पहले कभी नहीं सुना…”
मैंने उसे धीरे से बेड पर लिटाया और उसकी नैपी चेक करने के लिए कपड़ा उठाया।
और उसी पल मेरी सांस अटक गई।
जो मैंने देखा… उसने मुझे हिला दिया...
नैपी के एक कोने पर लाल निशान था, जैसे कोई जलन या रैश बहुत खराब हो गया हो।
सतह पर हल्का खून भी दिख रहा था।
मेरे हाथ कांपने लगे।
रिद्धि इतनी जोर से रो रही थी कि उसका चेहरा लाल हो गया था।
मैंने बिना सोचे उसे उठाया, कंबल में लपेटा और बाहर भागा।
“भैया, जल्दी अस्पताल चलिए!”
सड़क पर पहुँचते ही मैंने एक ऑटो रोका।
आवाज़ काँप रही थी—
“जल्दी AIIMS जाना है… बच्ची की तबीयत खराब है!”
ऑटो वाला बिना सवाल किए तेज़ चल पड़ा।
मैं रिद्धि को सीने से लगाकर कह रहा था—
“बस थोड़ा सा और… पहुँच रहे हैं, बेटा…”
उसके रोने से मेरा दिल जैसे चीर रहा था।
इमरजेंसी में दौड़ते हुए पहुँच गया..
जैसे ही अस्पताल पहुँचा, नर्स ने मेरी घबराहट देखकर तुरंत बच्ची को ले लिया।
“क्या हुआ?” उसने पूछा।
“नैपी में… कुछ बहुत खराब हो गया है… और ये लगातार रो रही है…”
मैं बोलते-बोलते हाँफ रहा था।
डॉक्टर तुरंत अंदर आए।
मुझे बाहर रोक दिया गया।
मैं गलियारे में चक्कर लगाने लगा।
मन में एक ही बात—
“हे भगवान, इसे कुछ हो न जाए…”
डॉक्टर बाहर आए — और राहत मिली...
करीब दस मिनट बाद डॉक्टर आए।
चेहरे पर हल्की गंभीरता, पर साथ में भरोसा भी।
“आप चिंता न करें,” उन्होंने कहा,
“आपने उसे सही समय पर लेकर आ गए। उसके नैपी क्षेत्र में बहुत खराब रैश था, शायद कोई नया वाइप या साबुन सूट नहीं किया। रगड़ के कारण सतही खून निकल आया था, इसलिए बच्ची बहुत दर्द में थी।”
मैंने लंबी साँस ली।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं थी।
डॉक्टर ने कहा—
“हमने एक और चीज़ भी देखी है, जिस पर नज़र रखनी होगी।”
एक दूसरी समस्या भी मिली...
उन्होंने बताया—
“रिद्धि की त्वचा बहुत सेंसिटिव है। उसे हल्की hypoallergenic dermatitis है। अभी खतरा नहीं है, लेकिन बिना ध्यान दिए यह जल्दी बढ़ सकती है। बस सही क्रीम, सही नैपी और नियमित चेक-अप से यह बिल्कुल कंट्रोल में रहेगी।”
मैंने सिर हिलाया।
कम से कम कुछ बहुत बड़ा नहीं था।
तभी साक्षी और वरुण पहुँचे...
वे भागते हुए आए।
साक्षी की आँखों में डर था।
“पापा, क्या हुआ? रिद्धि ठीक है?”
मैंने उन्हें सब शांत होकर बताया।
साक्षी रोने लगी—
“क्या हमसे कोई गलती हुई?”
डॉक्टर मुस्कुराए।
“नहीं। छोटे बच्चों में यह बहुत सामान्य है। आप बस ध्यान रखेंगे तो सब ठीक रहेगा। और आपके पापा ने जो किया… वह सच में सराहनीय है। बच्ची को समय पर मदद मिल गई।”
वरुण ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
“थैंक्यू पापा… हम तो सोच भी नहीं सकते थे…”
मेरे मन में अजीब-सी शांति उतर आई।
घर लौटते वक़्त सबक समझ आया..
रात के करीब 12 बज रहे थे।
ठंडी हवा चल रही थी।
रिद्धि शांत सो रही थी, उसके छोटे-छोटे हाथ मेरी उँगलियों को पकड़े हुए।
घर लौटते हुए मैं सोच रहा था—
बच्चे सिर्फ रोते नहीं…
वे हमें पुकारते हैं।
दर्द होने पर बोल नहीं सकते, बस चीख सकते हैं।
और हमें सुनना पड़ता है—
समझना पड़ता है—
भागकर मदद करनी पड़ती है।
उस रात ने हम सबको सिखाया...
बच्चा नाज़ुक होता है, लेकिन उसकी परेशानियाँ बहुत बड़ी हो सकती हैं।
ध्यान की कमी नहीं, बस सतर्कता की जरूरत होती है।
दादा-दादी—या नाना-नानी—घर में
सिर्फ बुज़ुर्ग नहीं होते…
सुरक्षा बनकर भी खड़े होते हैं।
रिद्धि तो शायद कल ही सब भूल जाएगी,
लेकिन मैं उस रात को कभी नहीं भूलूँगा।
उसकी छोटी-सी खामोश पुकार ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया।

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