चमक का सच
सुबह-सुबह रीना रसोई में चाय चढ़ा रही थी कि उसे बाहर हॉल से आवाज़ सुनाई दी—
“अरे, देखो अखबार में क्या ख़बर है… पिछले दो महीनों में शहर से 200 बच्चे गायब! पुलिस अभी तक कुछ पता नहीं लगा पाई।”
यह आवाज़ उसके पति श्याम की थी।
रीना ने चाय का कप रखा और बोली,
“हम्म… आज मुझे स्कूल जाना है, राहुल की बस की फीस जमा करनी है।”
श्याम ने आदत के मुताबिक कहा, “हाँ, ध्यान से जाना… आजकल जमाना पता नहीं कैसा है।”
रीना बिना छाता लिए ही निकल गई। शाम तक मौसम साफ था, इसलिए उसे लगा बारिश नहीं होगी। वह अक्सर स्कूल रिक्शे से जाती थी, क्योंकि घर की हालत ऐसी नहीं थी कि खुद का वाहन हो।
स्कूल में माता-पिता सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अपनी–अपनी कुर्सियों पर शांतिपूर्वक बैठे इंतज़ार कर रहे थे। रीना का नंबर हमेशा की तरह आख़िरी में था। वह चुपचाप बैठी इंतज़ार कर रही थी कि अचानक पीछे से किसी ने आवाज़ दी—
“रीना! अरे तू?”
रीना पीछे मुड़ी। मास्क पहने होने के कारण वह पहचान नहीं पाई, पर आवाज़ पहचानते ही हँस पड़ी—
“सीमा! तू?”
सीमा उसकी पुरानी पड़ोसन और कभी बहुत करीबी सहेली थी। पर पिछले दो-तीन सालों में कम बातचीत हुई थी।
रीना ने गौर किया कि सीमा की साड़ी बहुत महंगी थी, हाथ में चूड़ियाँ भी चमकदार, गले में सोने की मोटी चेन और चेहरा भी मेकअप से दमक रहा था।
जबकि कुछ महीनों पहले तक वही सीमा पुराने फीके कपड़े पहनती थी और हर बार पैसों की कमी की बातें किया करती थी।
रीना खुद को रोक नहीं पाई और बोली,
“सीमा, तू तो बदल ही गई! ये सब… इतनी महंगी साड़ी?”
सीमा ने साड़ी को संभालते हुए थोड़ा अकड़ कर कहा,
“अरे ये? ये तो बस ऐसे ही पहन ली। मेरे लिए यह कुछ खास नहीं है। अब थोड़ा पैसा आ गया है न… तो रहन-सहन भी बदलना चाहिए।”
रीना को बुरा लगा। कुछ महीने पहले तक यही सीमा उसके कपड़ों की तारीफ करती थी, और अब उसे ऐसे बोल रही थी जैसे वह कोई छोटी इंसान हो।
रीना मन ही मन सोचने लगी—
“इतना पैसा आया कैसे? क्या सच में उसके पति महेश को कोई बड़ी नौकरी मिल गई? या कोई धंधा चल पड़ा? या…?”
लाइन आगे बढ़ी, दोनों अपनी कुर्सी आगे खिसकाती चली गईं।
रीना ने फिर पूछा,
“सीमा, sudden इतनी तरक्की कैसे? कोई लॉटरी-वॉटरी लगी क्या?”
सीमा हँस पड़ी, पर हँसी में घमंड साफ दिखा।
“लॉटरी? अरे नहीं! दिमाग लगाया है, समझी? अब जो लोग सिर्फ नौकरी कर रहे हैं, वो कभी ऊपर नहीं जा सकते। जैसे तुम्हारे श्याम… दिनभर मेज पर बैठकर फाइलें घिसते रहते हैं। उसमें कमाई कितनी? टाइम लगेगा, बहुत टाइम!”
रीना को यह ताना बहुत चुभा।
उसने भी पलटकर कहा,
“नौकरी में इज्जत होती है। पैसा सब कुछ नहीं होता।”
सीमा तुनक गई।
“इज्जत का क्या करेगी? आजकल तो पैसा बोलता है।”
इसी बीच रीना का नंबर आया। वह काउंटर पर गई तो उसकी आंखें फटी रह गईं—
फीस उसकी उम्मीद से लगभग दोगुनी थी।
उसके पर्स में बस आधे पैसे ही थे।
वह नहीं चाहती थी कि सीमा को पता चले, पर सीमा ने रसीद लेकर कहा,
“कितना कम है? मैं भर देती हूं। बाद में दे देना।”
रीना ने बहुत मना किया, पर सीमा ने हँसते हुए चेक निकालकर उसके बच्चे की भी पूरी फीस भर दी।
रीना को भीतर से चोट लगी—
“आज वही लड़की मुझे एहसान दिखा रही है, जो पहले मेरे साथ रिक्शा शेयर करती थी…”
स्कूल से बाहर निकली तो अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। किसी रिक्शेवाले ने रुकना भी नहीं चुना।
रीना दरवाजे पर खड़ी बारिश रुकने का इंतज़ार कर रही थी,
जब अचानक एक चमचमाती सफेद कार उसके सामने आकर रुकी।
दरवाजा खुला—
सीमा अंदर बैठी थी।
“बैठ रीना, वरना भीग जाएगी,” उसने खिड़की से कहा।
रीना चुपचाप कार में बैठ गई।
अंदर पूरा माहौल महक रहा था—महंगी परफ्यूम, बड़ी स्क्रीन, चमचमाते इंटीरियर…
रीना के मन में तकलीफ़ हो उठी—
“इतना पैसा आखिर आया कहाँ से…?”
उसे पूछना ही पड़ा,
“कार कब ली?”
सीमा ने शान से कहा,
“पिछले हफ्ते। साढ़े तीस लाख की है। पूरा कैश दिया है।”
रीना के मन में ईर्ष्या का बादल और काला हो गया।
घर पहुंचकर उसने दरवाजा खोलना चाहा, पर दरवाजा लॉक था।
सीमा ने हँसकर बटन दबाया—
“अरे ये मॉडल ऐसा है, बच्चे गलती से खोल न दें इसलिए लॉक रहता है।”
रीना शर्मिंदा होकर उतर गई।
उस शाम घर पहुंचते ही वह श्याम पर चिल्ला पड़ी—
“तुम कभी कुछ कर ही नहीं सकते! दूसरे लोग कितना आगे निकल गए! सीमा को देखो—कार, सोना, नए कपड़े… और एक तुम हो—दिन भर मेहनत करके भी बस जीने भर को लाते हो!”
श्याम चुप हो गया।
रीना ने पूरा गुस्सा उस पर उतार दिया।
रात में दोनों ने बात नहीं की।
सुबह रीना उठी तो पाया कि श्याम ने खुद ही नाश्ता बना लिया था।
रीना को थोड़ी शर्म आई, पर वह मान नहीं पाई।
तभी टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आई—
“पिछले महीनों में बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार…
नाम – महेश।
यह वही व्यक्ति है जिसने कई परिवारों से बच्चों को झांसे देकर उठाया था।”
रीना का दिल जोर से धड़कने लगा।
तस्वीर में चेहरा ढका था, पर आंखें… चाल-ढाल…
वही सीमा का पति।
श्याम भी स्तब्ध था।
रीना की टांगों से जैसे जमीन खिसक गई—
“तो यही है अचानक आए पैसे का सच…”
तेज चमक के पीछे कितना काला अंधेरा छिपा था, वह अब समझ आ गया।
उस शाम रीना चुपचाप श्याम की पसंद का खाना बनाने लगी।
श्याम ने पूछा भी नहीं, पर रीना ने खुद कहा—
“आज तुम्हारी पसंद का बनाऊँगी… कल जो तस्वीर दिखाई थी वही डिश।”
श्याम मुस्कुरा
दिया।
रीना ने पहली बार महसूस किया—
सच्चा सुख दिमाग से नहीं, ईमानदारी और मेहनत से आता है।
शॉर्टकट कभी लंबा नहीं चलता।

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