बस स्टैंड की बारिश
शाम के पाँच बज रहे थे।
बरसात पूरे शहर पर ऐसे टूट रही थी जैसे बादलों ने आज सारे हिसाब बराबर करने हों।
मुख्य बस स्टैंड के बाहर बारिश का पानी घुटनों तक भर गया था। लोग भीगने से बचने के लिए छत के नीचे सिमटकर खड़े थे और अपनी-अपनी बसों का इंतज़ार कर रहे थे।
छोटे से ठेले पर एक लड़का गर्म चाय उबाल रहा था—
नाम था आर्यन।
पतली-सी टी-शर्ट, भीगे बाल, चेहरे पर थकान…
और दूरी में खोई आँखें, जैसे किसी का इंतज़ार सालों से बाकी हो।
वो चाय बनाते-बनाते अचानक रुक गया।
बस नंबर 22 धीरे-धीरे सामने आकर रुकी।
भीड़ में एक लड़की उतरी—काले रंग की रेनकोट, हाथ में फाइल, और कंधे पर चमकता हुआ बैग जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था—
“Dr. Kavya Sharma – Government Hospital”
आर्यन का दिल एक पल को सचमुच रुक गया।
काव्या।
वही काव्या,
जिसे वो कभी “टॉपर” कहकर चिढ़ाता था।
वही, जिसे वो मेडिकल कॉलेज तक छोड़ने जाया करता था।
वही, जिसके साथ उसने जिंदगी भर साथ रहने के सपने देखे थे।
पर किस्मत की रफ़्तार हमेशा इंसान के हाथ में नहीं होती।
उसके पिता की मौत के बाद
आर्यन की दुनिया पलट गई।
पढ़ाई छूट गई, घर बेच देना पड़ा, और गुज़ारा करने के लिए उसने बस स्टैंड पर चाय बेचना शुरू कर दिया।
दूसरी तरफ काव्या ने मेहनत से अपनी राह बनाई और आज शहर के बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टर बनकर लौटी थी।
पाँच साल बाद…
इस बारिश में…
दोनों एक ही छत के नीचे खड़े थे।
काव्या ने जैसे ही भीगे हुए बाल पीछे किए—उसकी नज़र सीधे आर्यन से टकरा गई।
इतना सन्नाटा हो गया मानो बारिश भी सुनने लगी हो।
काव्या कुछ सेकंड उसे देखती रही।
चेहरा सख्त था, पर आँखों में हल्का-सा झटका था—एक ऐसा झटका जिसे दिल पहचान लेता है।
आर्यन ने तुरंत नज़र झुका ली।
वो चाय के गिलास धोने लगा, लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे।
काव्या धीरे से उसके ठेले तक आई और बोली—
“कैसे हो आर्यन?”
आर्यन मुस्कुराया… वो दर्द भरी मुस्कान जिसने कई बातें छुपा दीं।
“मैं ठीक हूँ, मैडम। चाय चाहिए? अदरक डाल दूँ?”
काव्या को ये “मैडम” शब्द सीधा दिल में चुभ गया।
वो वही लड़का था जिसने कभी उसे नाम लेकर पुकारा था…
और आज इतना दूर।
काव्या ने गहरी सांस ली—“आर्यन… तुम यहाँ चाय बेच रहे हो?”
आर्यन ने हल्के से सिर हिलाया।
“ज़िंदगी सबको डॉक्टर नहीं बनाती काव्या…
किसी को मरीजों की नहीं, थके हुए लोगों की चाय भी तो देनी होती है।”
काव्या की आँखें भर आईं, उसने नजरें फेर लीं।
बारिश और तेज़ हो गई।
काव्या ने काँपती आवाज़ में पूछा—“तुमने बताया क्यों नहीं? मैं थी न… तुम्हारे साथ।”
आर्यन ने हँसकर कहा—
“और तुम अपनी उड़ान छोड़कर मेरे टूटे घर में क्या करती?
तुम्हें जहाँ थी, वहीं रहना चाहिए था।
तुम्हारा सपना बड़ा था…
और मैं उसका बोझ नहीं बनना चाहता था।”
काव्या की सांस थम गई।
एक वक्त था जब आर्यन उसे मोटिवेट करता था,
और आज वही उसे अपनी दुनिया से बाहर रख रहा था।
भीड़ पास से गुजरती रही,
लेकिन उनके आस-पास जैसे एक अदृश्य घेरा बन गया था—
जिसमें सिर्फ दो धड़कते दिल थे।
काव्या ने हिम्मत कर कहा—“आर्यन… क्या तुम खुश हो?”
आर्यन ने एक पल सोचा… मुस्कुराया…
“मैं खुशी ढूंढने की कोशिश करता हूँ।
और जब तुम्हें ऐसे मुस्कुराते देखता हूँ…
तो लगता है कोशिश बेकार नहीं गई।”
काव्या की आँखों से आँसू गिर पड़े।
बारिश में वो छुप भी नहीं सकते थे।
काव्या ने अपना पर्स खोला—कुछ पैसे निकालने लगी।
“ये लो… कुछ मदद है—”
आर्यन ने तुरंत पीछे हटकर कहा—
“नहीं काव्या।
तुम्हारा प्यार ले सकता था…
पर एहसान नहीं।”
ये सुनकर काव्या खुद को संभाल नहीं पाई।
उसने आँसू पोंछे।
**“तो वादा करो…” उसने धीमे से कहा,
“कि तुम अपनी जिंदगी खुश होकर जीओगे।”**
आर्यन ने उसकी तरफ देखा—
“और तुम भी…
अपनी दुनिया में चमकती रहो।
मेरी दुआ हमेशा तुम्हारे साथ है।”
बस नंबर 22 फिर से आने लगी।
काव्या ने एक आखिरी बार पीछे मुड़कर देखा—
आर्यन अपनी चाय की केतली संभाल रहा था,
लेकिन इस बार उसकी आँखों में एक अजीब-सी शांति थी।
काव्या बस में बैठ गई।
काँच के धुंधले शीशे के पीछे से
उसने आर्यन को आखिरी बार देखा।
बस चल पड़ी।
आर्यन ने गहरी सांस ली…
और फिर स्टोव जलाकर चाय उबालने लगा।
बारिश लगातार गिर रही थी,
पर उसके अंदर का तूफ़ान अब थम चुका था।
और फिर… जिंदगी अपनी राह पर चल पड़ी।
दो दिल चुपचाप अलग हुए,
पर एक-दूसरे के लिए दुआओं से भरे रहे।

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