एक थाली की सीख

 

Supportive husband standing up for his wife during a family disagreement in an Indian household


रसोई में बर्तन टकराने की तेज आवाज गूँजी और अगले ही पल स्टील की थाली फर्श पर गिरकर दूर तक सरक गई।


थाली में रखा खाना चारों तरफ बिखर गया था।


राधा कुछ पल के लिए बिल्कुल स्थिर खड़ी रह गई। उसके सामने उसकी ननद पायल गुस्से से तमतमाई हुई खड़ी थी।


“यह क्या बनाया है तुमने? मैं ये बेस्वाद उपमा नहीं खाऊँगी।”


पायल ने घूरते हुए कहा।


राधा ने धीरे से जवाब दिया,

“पायल, आज घर में यही सामान था इसलिए मैंने यही बना दिया। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए कुछ और बना देती हूँ।”


“मुझे अभी चाहिए था अच्छा नाश्ता, बाद में नहीं।”


पायल ने झुंझलाकर कहा।


तभी बाहर से उनकी सास शांति देवी अंदर आईं। उन्होंने फर्श पर बिखरा खाना देखा और फिर राधा की तरफ देखकर बोलीं,


“क्या हुआ यहाँ?”


पायल तुरंत बोली,

“मम्मी देखो ना, भाभी ने फिर वही बेस्वाद चीज बना दी। मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है।”


शांति देवी ने बिना कुछ सोचे राधा की तरफ देखकर कहा,


“बहू, तुम्हें इतना भी नहीं पता कि मेरी बेटी को क्या पसंद है?”


राधा हैरान रह गई।


“मम्मीजी, मैंने सोचा था सब यही खा लेंगे। अगर पायल को पसंद नहीं था तो वो कह देती, मैं दूसरा बना देती।”


शांति देवी का चेहरा सख्त हो गया।


“तुम्हें खुद समझना चाहिए था। घर में रहते हुए भी अगर घरवालों की पसंद नहीं पता तो इसका मतलब तुम ध्यान ही नहीं देती।”


राधा कुछ कहना चाहती थी लेकिन खुद को रोक लिया।


फर्श पर बिखरा खाना देखकर उसने झुककर चुपचाप सब समेटना शुरू कर दिया।


उसके मन में बहुत दुख था लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।


उसी समय उसका पति आदित्य ऑफिस से घर आया।


आदित्य ने जैसे ही घर का माहौल देखा तो उसे समझते देर नहीं लगी कि कुछ हुआ है।


“क्या बात है? सब इतने चुप क्यों हैं?”


उसने पूछा।


शांति देवी तुरंत बोलीं,

“अपनी बीवी से पूछो। इसे घरवालों की पसंद का बिल्कुल ख्याल नहीं है और ऊपर से पलटकर जवाब देती है।”


पायल भी बोल पड़ी,

“मैंने तो सिर्फ कहा कि मुझे ये खाना पसंद नहीं है।”


आदित्य ने शांत स्वर में राधा से पूछा,


“सच क्या है?”


राधा ने धीरे-धीरे पूरी बात बता दी।


आदित्य कुछ पल चुप रहा।


फिर उसने पायल की तरफ देखकर कहा,


“पायल, अगर तुम्हें खाना पसंद नहीं था तो तुम आराम से बोल सकती थीं। थाली फेंकना सही नहीं है।”


पायल को उम्मीद नहीं थी कि उसका भाई ऐसा कहेगा।


वो तुरंत बोली,

“तो अब तुम भी भाभी का ही पक्ष लोगे?”


आदित्य ने गंभीर होकर कहा,


“मैं किसी का पक्ष नहीं ले रहा। मैं सिर्फ सही और गलत की बात कर रहा हूँ।”


फिर उसने अपनी माँ की तरफ देखा।


“मम्मी, अगर घर में कोई गलती करता है तो उसे समझाना चाहिए, उसका साथ नहीं देना चाहिए।”


शांति देवी को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी।


उन्होंने गुस्से में कहा,


“ठीक है, अगर तुम्हें अपनी बीवी इतनी ही सही लगती है तो हम उसके हाथ का खाना नहीं खाएंगे।”


आदित्य ने बिल्कुल शांत स्वर में जवाब दिया,


“कोई बात नहीं मम्मी। रसोई सबकी है, आप अपने लिए खाना बना सकती हैं।”


पायल और शांति देवी दोनों चौंक गईं।


उन्हें लगा था कि आदित्य राधा को डांटेगा।


लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।


आदित्य ने राधा से कहा,


“तुम मेरे लिए खाना लगा दो।”


राधा चुपचाप खाना ले आई।


आदित्य आराम से बैठकर खाना खाने लगा।


शांति देवी और पायल गुस्से में अपने कमरे में चली गईं।


उस दिन दोनों ने खाना नहीं खाया।


अगले दिन उन्होंने बाहर से खाना मंगवा लिया।


कुछ दिन तक यही चलता रहा।


लेकिन रोज़-रोज बाहर का खाना खाने से दोनों परेशान हो गईं।


एक दिन शांति देवी रसोई में आईं और बोलीं,


“पायल, चल आज हम ही खाना बना लेते हैं।”


पायल ने कोशिश की लेकिन कुछ ही देर में थक गई।


“मम्मी, ये रोज़-रोज करना मुश्किल है।”


शांति देवी भी समझ चुकी थीं कि घर चलाना इतना आसान नहीं होता।


उधर राधा रोज़ की तरह अपना काम करती रही।


उसने किसी से कोई शिकायत नहीं की।


आखिर एक दिन शांति देवी खुद राधा के पास आईं।


कुछ पल चुप रहने के बाद बोलीं,


“बहू, आज दाल थोड़ी ज्यादा बना लेना।”


राधा ने उनकी तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुरा दी।


उस दिन के बाद फिर कभी घर में किसी ने थाली नहीं फेंकी।


क्योंकि सब समझ चुके थे कि

सम्मान से परोसी हुई थाली की कीमत क्या होती है।




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