बरसात के बाद की सुबह थी। आँगन में पानी की छोटी-छोटी बूंदें अब भी चमक रही थीं। घर के अंदर हल्की सी ठंडक थी, लेकिन माहौल में एक अजीब सा तनाव घ...Read More
रसोई की खिड़की से आती हल्की हवा में परदे धीरे-धीरे हिल रहे थे, लेकिन घर के अंदर जैसे सब कुछ थमा हुआ था। आस्था गैस पर खड़ी चाय उबाल रही थी। उ...Read More