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अधूरी आवाज़ का सहारा

May 05, 2026
बरसात के बाद की सुबह थी। आँगन में पानी की छोटी-छोटी बूंदें अब भी चमक रही थीं। घर के अंदर हल्की सी ठंडक थी, लेकिन माहौल में एक अजीब सा तनाव घ...Read More

दूसरी सुबह

May 04, 2026
  संध्या का समय था। हल्की-हल्की धूप अब ढलने लगी थी और आँगन में एक शांत सा सन्नाटा पसरा हुआ था। घर के अंदर एक अजीब-सी वीरानी थी। रामप्रसाद जी...Read More

दूरी में भी अपनापन

May 02, 2026
  घर के अंदर हल्की-हल्की हलचल थी, जैसे कोई नया अध्याय शुरू होने वाला हो। अलमारी के दरवाज़े खुले थे, बक्से इधर-उधर पड़े थे और बीच में खड़ी थी...Read More

आख़िरी बार “बाबूजी”

May 01, 2026
  घर के अंदर एक अजीब-सी खामोशी थी। दीवारों पर टंगी घड़ी की टिक-टिक जैसे हर पल का हिसाब दे रही थी, और उस खामोशी के बीच बैठे थे रघुनाथ बाबू—एक...Read More

फैसले की कीमत

May 01, 2026
  घर के बड़े ड्रॉइंग रूम में रंग-बिरंगे गुब्बारे लगे थे, केक की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी और हँसी की आवाज़ें दीवारों से टकराकर लौट रही थी...Read More

रुकना भी ज़रूरी है

April 30, 2026
रसोई की खिड़की से आती हल्की हवा में परदे धीरे-धीरे हिल रहे थे, लेकिन घर के अंदर जैसे सब कुछ थमा हुआ था। आस्था गैस पर खड़ी चाय उबाल रही थी। उ...Read More

बदलाव की शुरुआत

April 29, 2026
  शाम का समय था… हल्की ठंडी हवा चल रही थी और मोहल्ले के बच्चे गली में क्रिकेट खेल रहे थे। उसी गली के एक घर की बालकनी में खड़ी थी संध्या, जो ...Read More
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