भरोसे का रिश्ता
सुबह का समय था।
घर के आँगन में हल्की धूप फैल रही थी। रसोई से चाय और ताज़े पराठों की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी।
वर्मा परिवार में सब कुछ बहुत शांत और खुशहाल लगता था।
घर में सास लता देवी, बेटा अमित और बहू पूजा रहते थे। मोहल्ले में लोग अक्सर कहते थे,
“लता जी को तो बहू नहीं, बेटी मिली है।”
लता देवी सच में पूजा का बहुत ध्यान रखती थीं।
अगर पूजा थकी होती तो कहतीं, “तू बैठ जा, मैं काम कर लेती हूँ।”
अगर पूजा को सिर दर्द होता तो तुरंत उसके लिए अदरक वाली चाय बना देतीं।
पूजा भी अपनी सास का बहुत सम्मान करती थी। वह हर काम उनसे पूछकर करती और उन्हें कभी शिकायत का मौका नहीं देती थी।
लेकिन इस अच्छे रिश्ते में भी एक अजीब सी बात थी।
जब तक पूजा घर में रहती, लता देवी बहुत प्यार से रहतीं।
लेकिन जैसे ही पूजा अपने मायके जाने की बात करती, लता देवी का चेहरा बदल जाता।
एक दिन पूजा की माँ का फोन आया।
“बेटा, अगले हफ्ते तेरी छोटी बहन की कॉलेज में फेयरवेल पार्टी है। तू दो-तीन दिन पहले आ जा। बहुत दिन हो गए तुझे देखे,” माँ ने प्यार से कहा।
पूजा खुश हो गई।
शाम को उसने रसोई में लता देवी से कहा,
“माँ जी, मम्मी का फोन आया था। मैं दो-तीन दिन के लिए मायके जाना चाहती हूँ।”
लता देवी का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
उन्होंने धीमे लेकिन सख्त स्वर में कहा,
“इतनी जल्दी-जल्दी मायके जाने की क्या जरूरत है? अभी तो पिछले महीने ही गई थी।”
पूजा थोड़ी चुप हो गई।
“माँ जी… मम्मी ने बहुत प्यार से बुलाया है,” उसने धीरे से कहा।
लता देवी ने बस इतना कहा,
“देख लेंगे।”
उसके बाद पूरे दिन उनका व्यवहार थोड़ा ठंडा रहा।
रात का समय था।
पूजा कमरे में चुपचाप बैठी थी। उसके चेहरे पर उदासी साफ दिखाई दे रही थी।
अमित ने उसे गौर से देखा और धीरे से पूछा,
“क्या हुआ पूजा? तुम इतनी उदास क्यों लग रही हो?”
पूजा ने हल्की सी साँस ली और बोली,
“मुझे समझ नहीं आता अमित… जब भी मैं मायके जाने की बात करती हूँ, तुम्हारी माँ मुझसे नाराज़ हो जाती हैं। उनका व्यवहार अचानक बदल जाता है। मैंने ऐसा क्या गलत किया है?”
अमित कुछ पल के लिए चुप हो गया। वह भी सोच में पड़ गया।
फिर धीरे से बोला,
“पूजा, शायद माँ को अकेलापन महसूस होता होगा। उन्हें लगता होगा कि तुम्हारे जाने से घर सूना हो जाएगा। लेकिन सच कहूँ तो मैं भी पूरी तरह नहीं जानता कि उन्हें इतनी परेशानी क्यों होती है।”
अगले दिन पूजा अलमारी साफ कर रही थी।
उसे ऊपर वाले खाने में एक पुराना डिब्बा मिला। उसमें कुछ पुराने खत और तस्वीरें रखी थीं।
एक खत लता देवी ने अपनी सहेली को लिखा था।
उसमें लिखा था—
“जब मेरी शादी हुई थी, मुझे अपने मायके जाने की इजाज़त बहुत कम मिलती थी।
माँ को देखने का मन करता था, पर सासू माँ कहती थीं—
‘बहू का मायका शादी के बाद पराया हो जाता है।’
मैं कई बार रोई, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं समझी।”
पूजा वह खत पढ़कर चुप हो गई।
अब उसे सब समझ आ गया।
शाम को पूजा लता देवी के पास बैठ गई।
लता देवी आँगन में सब्ज़ी काट रही थीं।
पूजा ने धीरे से कहा,
“माँ जी, क्या आप मुझसे एक बात सच-सच बताएँगी?”
“क्या?” लता देवी ने पूछा।
पूजा बोली,
“क्या आपको डर लगता है कि अगर मैं मायके जाऊँगी तो आपसे दूर हो जाऊँगी?”
लता देवी के हाथ रुक गए।
कुछ पल तक वह चुप रहीं।
फिर उनकी आँखें भर आईं।
उन्होंने धीमे से कहा,
“हाँ… शायद मुझे वही डर लगता है। मुझे लगता है कि कहीं तू भी मुझे छोड़कर अपने मायके में ज्यादा खुश न रहने लगे।”
पूजा ने उनका हाथ पकड़ लिया।
“माँ जी, मायका इंसान को दूर नहीं करता… मजबूत बनाता है।
मैं जहाँ भी जाऊँगी, लौटकर तो यहीं आऊँगी ना… क्योंकि ये भी मेरा घर है।”
लता देवी की आँखों से आँसू बहने लगे।
उन्होंने पूजा को गले लगा लिया।
“मुझे माफ कर दे बेटी। मैं अपने पुराने दर्द से बाहर ही नहीं निकल पाई थी।”
अगले दिन लता देवी ने खुद ही पूजा की पैकिंग करवाई।
उन्होंने बड़े प्यार से उसके कपड़े बैग में रखे और जाते समय मिठाई का एक डिब्बा उसके हाथ में देते हुए कहा,
“ये अपनी माँ को देना… और कहना कि उनकी बेटी यहाँ बहुत खुश है और बहुत अच्छी है।”
लता देवी की बात सुनकर पूजा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
तीन दिन बाद जब पूजा मायके से वापस लौटी, तो उसने देखा कि लता देवी दरवाज़े पर ही खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थीं।
जैसे ही पूजा घर के अंदर आई, लता देवी आगे बढ़ीं और उसे प्यार से गले लगा लिया।
फिर मुस्कुराते हुए बोलीं,
“अब बार-बार मत जाया कर… तेरे बिना घर सच में बहुत खाली-खाली लगता है।”
लता देवी की यह बात सुनकर पूजा हँस पड़ी, और उस पल दोनों के बीच का रिश्ता पहले से भी ज्यादा गहरा हो गया।
सीख:
अक्सर लोग अपने साथ हुए पुराने दर्द और अनुभवों की वजह से दूसरों को वही करने से रोकने लगते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे रिश्ते को संभाल रहे हैं, लेकिन सच यह है कि रिश्ते किसी को बाँधकर नहीं, बल्कि भरोसा और आज़ादी देकर मजबूत बनते हैं।
जब रिश्तों में समझ, सम्मान और विश्वास होता है, तभी वह रिश्ता लंबे समय तक खुशहाल और सच्चा बना रहता है।

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