समझ की मिठास
सुबह का समय था।
हल्की धूप आँगन में फैल रही थी और तुलसी के पास रखे दीये से हल्की खुशबू आ रही थी।
कमला देवी बरामदे में चारपाई पर बैठी चाय पी रही थीं। उनके चेहरे पर हल्की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। कारण भी था—कुछ ही दिनों में उनके बेटे रोहित की शादी होने वाली थी और घर में नई बहू आने वाली थी।
पड़ोस की दो औरतें भी वहीं बैठी थीं।
एक बोली,
“कमला, सुनो मेरी बात। बहू आए ना, तो शुरू में ही उसे लाइन पर रखना। नहीं तो बाद में घर पर कब्जा कर लेती है।”
दूसरी ने भी हाँ में हाँ मिलाई,
“सही कह रही है। मेरी बहू तो आते ही बोली—मम्मी जी, ये सोफा यहाँ क्यों रखा है, इसे वहाँ कर देते हैं। मैंने साफ कह दिया, बेटी ये मेरा घर है, जैसा है वैसा ही रहेगा।”
कमला देवी चुपचाप उनकी बातें सुन रही थीं।
उनके मन में डर बैठने लगा।
तभी उनकी बेटी रानी अंदर से बाहर आई।
“माँ, आप इतना क्यों सोच रही हो?”
कमला देवी बोलीं,
“बेटी, आजकल की बहुएँ बहुत तेज होती हैं। पता नहीं हमारी बहू कैसी होगी।”
रानी हँसते हुए बोली,
“अरे माँ, पहले आने तो दो। बिना जाने ही डर क्यों रही हो?”
कुछ दिनों बाद रोहित की शादी हो गई और घर में नई बहू सुहानी आ गई।
सुहानी बहुत ही शांत और समझदार लड़की थी।
पहले दिन ही उसने सबके पैर छुए और मुस्कुराकर बोली,
“माँजी, अब ये घर मेरा भी है। आप जो कहेंगी वही करूँगी।”
कमला देवी ने हल्की मुस्कान दी, लेकिन मन का डर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
अगली सुबह सुहानी जल्दी उठ गई।
उसने पूरे घर में झाड़ू लगाया, रसोई साफ की और चाय बनाकर लाई।
“माँजी, चाय लीजिए।”
कमला देवी ने चाय पी और बोलीं,
“अरे इसमें चीनी कम क्यों है?”
सुहानी ने धीरे से कहा,
“माँजी, रोहित ने बताया कि आपको शुगर की समस्या है। इसलिए मैंने थोड़ी कम चीनी डाली है।”
कमला देवी को थोड़ी झुंझलाहट हुई।
“मैं सालों से ऐसी ही चाय पीती आई हूँ। तुम आई और नियम बदल गए?”
सुहानी चुप हो गई।
वह समझ गई कि अभी ज्यादा बोलना ठीक नहीं।
कुछ दिन बीत गए।
एक दिन सुहानी ने देखा कि घर के पुराने बल्ब बहुत कम रोशनी दे रहे हैं।
उसने बाजार से नए LED बल्ब ला दिए।
शाम को जब कमला देवी ने देखा तो बोलीं,
“ये बल्ब किससे पूछकर बदल दिए?”
सुहानी ने मुस्कुराकर कहा,
“माँजी, पुराने बल्ब बहुत कम रोशनी दे रहे थे। इसलिए सोचा घर थोड़ा उजला हो जाएगा।”
रानी ने भी बीच में कहा,
“माँ, सच में अब घर ज्यादा अच्छा लग रहा है।”
लेकिन कमला देवी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा।
दिन धीरे-धीरे गुजरते गए।
एक दिन कमला देवी बाजार से लौटते समय अचानक चक्कर खाकर बैठ गईं।
पास की दुकान वाले ने तुरंत रोहित को फोन किया।
रोहित उन्हें डॉक्टर के पास ले गया।
डॉक्टर ने चेकअप किया और बोले,
“इनका शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इन्हें मीठा बिल्कुल बंद करना होगा।”
रोहित चिंतित हो गया।
“डॉक्टर साहब, हम कोशिश करेंगे।”
घर आने के बाद सुहानी ने बहुत ध्यान से उनकी देखभाल शुरू कर दी।
वह रोज समय पर दवा देती, हल्का खाना बनाती और टहलने के लिए भी ले जाती।
एक दिन कमला देवी ने देखा कि सुहानी खुद खाना खाने से पहले पूछती है,
“माँजी, आपने दवा ली ना?”
कमला देवी की आँखें भर आईं।
उन्होंने धीरे से कहा,
“बहू, मैंने तुम्हें गलत समझा।”
सुहानी ने तुरंत कहा,
“नहीं माँजी, आप ऐसा मत कहिए।”
कमला देवी बोलीं,
“लोगों की बातों में आकर मैं सोचती थी कि बहू आने के बाद घर बदल जाएगा। लेकिन तुमने तो इस घर को और संभाल लिया।”
तभी रानी भी वहाँ आ गई।
वह मुस्कुराकर बोली,
“माँ, मैंने पहले ही कहा था ना—हर बहू एक जैसी नहीं होती।”
कमला देवी ने सुहानी का हाथ पकड़ा और कहा,
“आज से ये घर सिर्फ मेरा नहीं, तुम्हारा भी है।”
सुहानी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
उस दिन घर में पहली बार सच में अपनापन महसूस हुआ।
सीख:
कई बार हम लोगों की बातों में आकर रिश्तों को गलत नजर से देखने लगते हैं।
लेकिन अगर दिल साफ हो और समझ हो, तो हर रिश्ता बहुत सुंदर बन सकता है।

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