सपनों की असली उड़ान

 

Young Indian village woman cooking food on a traditional clay stove in a rural home kitchen


सुबह का समय था।

गाँव के छोटे से घर के आँगन में धूप की हल्की किरणें फैल रही थीं। रसोई से चूल्हे की आँच और ताजे बने रोटी की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी।


रसोई में खड़ी रीमा अपनी माँ सविता के साथ सब्ज़ी काट रही थी। तभी दरवाज़े पर उसके पिता गोपाल खेत से लौटे।


“अरे सविता! आज तो बहुत बड़ी खुशखबरी है,” गोपाल ने उत्साह से कहा।


“क्या हुआ जी?” सविता ने पूछा।


गोपाल मुस्कुराते हुए बोले,

“हमारी रीमा के लिए शहर से रिश्ता आया है। लड़का बहुत अच्छी नौकरी करता है। बस एक बात है… उन्हें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए।”


सविता खुश हो गई।

“अरे ये तो बहुत अच्छी बात है। हमारी बेटी शहर में रहेगी।”


लेकिन रीमा के चेहरे पर खुशी नहीं थी।

वह पढ़ना चाहती थी… कॉलेज जाना चाहती थी… पर घर की हालत ऐसी थी कि बारहवीं के बाद उसकी पढ़ाई रुक गई।



दूसरी तरफ...


शहर में रहने वाला अर्जुन एक बड़ी कंपनी में काम करता था।


जब उसकी माँ कमला ने उसे रीमा के रिश्ते के बारे में बताया तो वह नाराज़ हो गया।


“माँ, मैं इतने साल पढ़ा हूँ। मेरी पत्नी भी पढ़ी-लिखी होनी चाहिए। गाँव की लड़की से शादी करूँगा तो लोग क्या कहेंगे?”


कमला बोली,

“बेटा, पढ़ाई से ज्यादा ज़रूरी संस्कार होते हैं। और लड़की बारहवीं पास है। घर संभालना भी जानती है।”


तभी अर्जुन की छोटी बहन नेहा बोली—


“भैया, मुझे तो भाभी चाहिए… वो कैसी भी हों। अगर अच्छी होंगी तो घर भी अच्छा लगेगा।”


परिवार के समझाने पर अर्जुन आखिरकार शादी के लिए मान गया।



शादी के बाद...


कुछ ही दिनों में अर्जुन और रीमा की शादी हो गई।


जब रीमा पहली बार अपने ससुराल आई तो घर में मेहमानों की भीड़ थी।


कमला ने कहा,

“बहू, अब यह घर तुम्हें संभालना है।”


अगले दिन रीमा की पहली रसोई थी।


सुबह चार बजे उठकर उसने बिना किसी की मदद के पूरे घर के लिए खाना बनाया—

हलवा, पूरी, पनीर, पुलाव और कई तरह की सब्ज़ियाँ।


जब सबने खाना खाया तो सभी उसकी तारीफ करने लगे।


“कमला, तुम्हारी बहू तो बहुत गुणी है,” एक पड़ोसन बोली।


कमला गर्व से बोली,

“मेरी बहू को सिलाई भी बहुत अच्छी आती है।”


लेकिन अर्जुन चुपचाप खाना खाकर उठ गया।

उसे अभी भी लग रहा था कि उसकी पत्नी कम पढ़ी-लिखी है।



एक दिन...


एक दिन अर्जुन ने रीमा से पूछा—


“रीमा, तुम हमेशा साड़ी या सूट ही क्यों पहनती हो? क्या तुम्हें कुछ और पहनना पसंद नहीं है?”


रीमा हल्की मुस्कान के साथ बोली—

“पसंद तो बहुत कुछ है, लेकिन सच कहूँ तो मैंने कभी साड़ी और सूट के अलावा कुछ और पहना ही नहीं।”


अर्जुन मुस्कुराते हुए बोला—

“कोई बात नहीं। तुम जो भी पहनती हो, उसमें बहुत सुंदर लगती हो।”


थोड़ी देर रुककर अर्जुन ने कहा—

“वैसे कल रविवार है और मेरी ऑफिस की छुट्टी भी है। मैंने अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने का प्लान बनाया है। अगर तुम चाहो तो तुम भी मेरे साथ चल सकती हो।”


यह सुनते ही रीमा के चेहरे पर खुशी आ गई।

वह पहली बार अर्जुन के साथ बाहर घूमने जाने वाली थी, इसलिए उसके मन में हल्की-सी उत्सुकता और खुशी दोनों थी।



मॉल में...


अगले दिन सभी लोग शहर के एक बड़े मॉल में घूमने गए।


अर्जुन के दोस्त रोहित और उसकी पत्नी सोनल भी उनके साथ थे। मॉल की चमक-दमक देखकर रीमा कुछ देर तक इधर-उधर देखती रही। उसके लिए यह सब थोड़ा नया था, लेकिन वह सहज बनी रही।


सोनल ने अपने लिए कई तरह के कपड़े खरीदे—कुछ इंडियन और कुछ वेस्टर्न। वहीं रीमा ने अपने लिए कुछ साधारण कपड़े लिए और अपनी ननद नेहा के लिए एक सुंदर वेस्टर्न ड्रेस पसंद की।


कुछ देर बाद सभी लोग बिल काउंटर पर पहुँचे। तभी रीमा ने बिना झिझक अपना कार्ड निकाला और तुरंत पेमेंट कर दी।


यह देखकर सोनल थोड़ी हैरान रह गई।


वह मुस्कुराते हुए बोली,

“भाभी, आपको तो सब अच्छे से आता है। पहली बार में ही आपने कार्ड से पेमेंट कर दी।”


रीमा हल्की मुस्कान के साथ बोली,

“दरअसल मेरी एक दोस्त बहुत अमीर थी। वह अक्सर मुझे अपने साथ मॉल ले जाया करती थी। जब भी वह शॉपिंग करती थी, तो ऐसे ही कार्ड से पेमेंट करती थी। बस वहीं देखकर मैंने भी यह सब सीख लिया।”



रेस्टोरेंट में...


बाद में सभी लोग एक अच्छे से रेस्टोरेंट में खाना खाने चले गए।


जैसे ही वे सब अपनी-अपनी सीट पर बैठे, कुछ ही देर में वेटर उनके पास मेन्यू लेकर आ गया। अर्जुन के दोस्त अभी मेन्यू देख ही रहे थे कि रीमा ने मुस्कुराते हुए वेटर से बहुत सहज तरीके से अंग्रेज़ी में खाना ऑर्डर कर दिया।


रीमा को इतनी अच्छी अंग्रेज़ी बोलते देखकर अर्जुन के दोस्त रोहित को थोड़ा आश्चर्य हुआ। उसने उत्सुकता से पूछा—


“भाभी, आप तो बहुत अच्छी अंग्रेज़ी बोल लेती हैं। फिर आपने आगे पढ़ाई क्यों नहीं की?”


रोहित का सवाल सुनकर रीमा के चेहरे की मुस्कान थोड़ी धीमी पड़ गई। उसकी आँखों में हल्की उदासी झलकने लगी।


वह धीरे से बोली—


“मैं पढ़ाई में हमेशा बहुत अच्छी थी। स्कूल में हर साल अच्छे नंबर आते थे, और कई बार पूरे गाँव में भी मैंने टॉप किया था। मेरा सपना था कि मैं कॉलेज जाकर आगे पढ़ाई करूँ… लेकिन घर की हालत ठीक नहीं थी। पिताजी की आमदनी बहुत कम थी, इसलिए बारहवीं के बाद मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी।”


रीमा की बात सुनकर कुछ पल के लिए वहाँ सन्नाटा छा गया।


अर्जुन चुपचाप रीमा की ओर देखने लगा।

उसके मन में कई विचार चल रहे थे।


उसे पहली बार एहसास हुआ कि उसने सिर्फ कम पढ़ी-लिखी समझकर रीमा को गलत समझ लिया था। असल में उसके अंदर कितनी समझदारी और हुनर छिपा हुआ है, यह वह आज समझ पा रहा था।



अर्जुन का फैसला...


घर लौटकर अर्जुन बोला—


“रीमा, अगर तुम पढ़ना चाहती हो तो मैं तुम्हें कॉलेज भेजूंगा।”


रीमा की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।


लेकिन अर्जुन के माता-पिता को यह बात पसंद नहीं आई।


कमला बोली—


“बहू घर के काम छोड़कर कॉलेज नहीं जाएगी।”


अर्जुन बोला—


“माँ, पढ़ाई करने से घर की इज्जत कम नहीं होती।”


बहुत बहस के बाद कमला बोली—


“ठीक है, अगर बहू कॉलेज जाएगी तो एक शर्त पर…”


1. बहू घर के सारे काम करके जाएगी।



2. और कॉलेज में साड़ी या सूट ही पहनेगी।




रीमा ने तुरंत कहा—


“मुझे मंजूर है।”



कॉलेज का पहला दिन...


पहले दिन रीमा सूट पहनकर कॉलेज गई।


कुछ अमीर लड़कियों ने उसका मज़ाक उड़ाया।


“देखो, कोई गाँव की लड़की आ गई,” एक लड़की हँसते हुए बोली।


यह सब देखकर नेहा भी चुप रही।

उसे डर था कि दोस्त उसका भी मज़ाक उड़ाएँगे।


लेकिन रीमा ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया।


वह पढ़ाई में लग गई।



कॉलेज का इवेंट...


कुछ महीनों बाद कॉलेज में एक बड़ा फैशन शो होने वाला था।


रीमा ने भी उसमें नाम लिखवा दिया।


जब घरवालों को पता चला तो कमला गुस्से में बोली—


“बहू, तुम रैम्प वॉक करोगी?”


अर्जुन बोला—


“अगर नेहा कर सकती है तो रीमा भी करेगी।”



तैयारी...


नेहा ने महंगी वेस्टर्न ड्रेस खरीदी।


लेकिन रीमा ने खुद अपने पुराने कपड़ों से एक खूबसूरत लहंगा सिल लिया।


अर्जुन ने कहा—


“अगर चाहो तो मैं तुम्हारे लिए नया कपड़ा ला दूँ।”


रीमा बोली—


“नहीं… मैं अपनी बनाई ड्रेस ही पहनना चाहती हूँ।”



इवेंट का दिन...


कॉलेज का बड़ा ऑडिटोरियम छात्रों की भीड़ और तालियों की आवाज़ से गूंज रहा था। चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइटें चमक रही थीं और स्टेज पर म्यूज़िक बज रहा था।


एक-एक करके लड़कियाँ स्टेज पर आ रही थीं। सभी ने खूबसूरत वेस्टर्न ड्रेस पहनी हुई थी और आत्मविश्वास के साथ रैम्प वॉक कर रही थीं। दर्शक उनकी हर चाल पर तालियाँ बजा रहे थे।


कुछ देर बाद एंकर ने अगला नाम पुकारा —

“अब स्टेज पर आ रही हैं… रीमा।”


रीमा का नाम सुनते ही वह हल्की घबराहट के साथ परदे के पीछे से बाहर आई। उसने अपने हाथों से सिलकर बनाया हुआ सुंदर सा लहंगा पहना हुआ था।


जैसे ही रीमा ने स्टेज पर कदम रखा, पूरे हॉल की नज़रें उसी पर टिक गईं।


उसकी आत्मविश्वास भरी चाल, चेहरे की सादगी भरी मुस्कान और उसकी अलग ही स्टाइल ने सबको हैरान कर दिया।


रीमा पूरे आत्मविश्वास के साथ रैम्प पर आगे बढ़ी, फिर धीरे से मुड़कर कुछ शानदार पोज़ दिए।


उसकी अदाओं और आत्मविश्वास को देखकर पूरा ऑडिटोरियम ज़ोरदार तालियों से गूंज उठा।

लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि साधारण कपड़ों में रहने वाली वही रीमा आज स्टेज पर सबसे अलग और खास लग रही थी।



परिणाम...


फाइनल राउंड में अब सिर्फ तीन लड़कियाँ बची थीं—

नेहा, रीमा और करिश्मा।


पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया था। सभी लोग उत्सुकता से परिणाम का इंतज़ार कर रहे थे। तीनों लड़कियाँ स्टेज पर खड़ी थीं और जज आपस में चर्चा कर रहे थे।


कुछ ही पलों बाद एंकर माइक लेकर स्टेज पर आए और मुस्कुराते हुए बोले—


“और अब वो पल आ गया है जिसका हम सभी को इंतज़ार था… इस साल के रैम्प वॉक कॉम्पिटिशन की विजेता हैं…”


कुछ सेकंड के लिए पूरा हॉल बिल्कुल शांत हो गया।


फिर एंकर ने जोर से नाम लिया—


“रीमा!”


यह सुनते ही पूरा ऑडिटोरियम ज़ोरदार तालियों से गूंज उठा।


रीमा कुछ पल के लिए खुद भी हैरान रह गई। उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। जिस लड़की का कुछ दिन पहले तक उसके कपड़ों और सादगी की वजह से मज़ाक उड़ाया जाता था, आज वही लड़की पूरे कॉलेज की विजेता बन चुकी थी।


स्टेज पर खड़ी रीमा के चेहरे पर आत्मविश्वास और खुशी साफ दिखाई दे रही थी। उस पल उसने सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं जीती थी, बल्कि सबको यह भी दिखा दिया था कि सादगी, मेहनत और आत्मविश्वास किसी भी चमक-दमक से कहीं ज्यादा ताकतवर होते हैं।



घर लौटते समय अर्जुन ने पूरे मोहल्ले के सामने कहा—


“आज मेरी पत्नी ने मेरा सिर गर्व से ऊँचा कर दिया।”


कमला की आँखों में भी आँसू थे।


वह बोली—


“बहू, मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हें गलत समझा।”


“आज से तुम जितना चाहो पढ़ो… और जो पहनना चाहो पहन सकती हो।”


नेहा भी बोली—


“भाभी, आज मुझे आप पर बहुत गर्व है।”



उस दिन रीमा ने सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं जीती थी…

उसने लोगों की सोच भी बदल दी थी।


क्योंकि असली सुंदरता कपड़ों में नहीं,

हिम्मत और आत्मविश्वास में होती है। 





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