Showing posts with label Social Reality. Show all posts
Showing posts with label Social Reality. Show all posts

मेरी बच्ची अब रोएगी नहीं

May 06, 2026
रसोई में प्रेशर कुकर की सीटी लगातार बज रही थी और आँगन में फैले कपड़ों को तेज हवा बार-बार उड़ा रही थी। घर के अंदर काम की भागदौड़ थी, लेकिन मी...Read More

घर का असली सम्मान

May 03, 2026
  दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयाँ अपनी रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन सविता देवी का मन जैसे किसी पुराने समय में अटका हुआ था। हाथों में पूजा की थाल...Read More

आख़िरी बार “बाबूजी”

May 01, 2026
  घर के अंदर एक अजीब-सी खामोशी थी। दीवारों पर टंगी घड़ी की टिक-टिक जैसे हर पल का हिसाब दे रही थी, और उस खामोशी के बीच बैठे थे रघुनाथ बाबू—एक...Read More

फैसले की कीमत

May 01, 2026
  घर के बड़े ड्रॉइंग रूम में रंग-बिरंगे गुब्बारे लगे थे, केक की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी और हँसी की आवाज़ें दीवारों से टकराकर लौट रही थी...Read More

बचत का सम्मान

April 30, 2026
  आँगन में रखे पुराने नीम के पेड़ की छाँव आज कुछ अलग ही सुकून दे रही थी, लेकिन घर के अंदर माहौल हल्का-सा तनाव भरा था। पूजा चुपचाप रसोई में स...Read More

जब माँ बोझ बन गई

April 28, 2026
  आँगन में तुलसी के पास रखा दिया बुझ चुका था, लेकिन घर के अंदर रिश्तों की रोशनी उससे भी पहले बुझ चुकी थी… सावित्री देवी दरवाज़े के पास रखी प...Read More
Powered by Blogger.