दोपहर के ढाई बजे थे। ऑफिस में सन्नाटा पसरा हुआ था। एसी की ठंडी हवा में भी अरुण के माथे पर हल्की सिलवटें थीं। कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्सेल शीट ...Read More
रात के ग्यारह बज रहे थे। घर में सब सो चुके थे। बच्चों के कमरे से धीमी-सी साँसों की आवाज़ आ रही थी। नीलम दरवाज़े के पास खड़ी, अपने दोनों बेटो...Read More