दिखावे की चमक, सच्ची खुशी से कम
घर के अंदर हल्की-सी खामोशी थी, लेकिन नेहा के मन में शोर मचा हुआ था…
वो अलमारी के सामने खड़ी थी, एक-एक कपड़ा निकालकर देखती और फिर वापस रख देती। चेहरे पर हल्की चिंता और आँखों में थकान साफ झलक रही थी।
“इतनी तैयारी किसके लिए…?” उसने खुद से ही धीरे से कहा।
कुछ दिन पहले ही उसकी चचेरी ननद रिया का फोन आया था।
“भाभी! मेरी शादी फिक्स हो गई है… और इस बार शादी बहुत ग्रैंड होगी। बड़े-बड़े लोग आएंगे… आपको तो आना ही पड़ेगा!”
रिया की आवाज में खुशी से ज्यादा दिखावे का रंग था।
नेहा ने मुस्कुराकर बधाई तो दे दी, लेकिन फोन रखते ही उसका मन घबरा गया।
“ग्रैंड शादी मतलब… महंगे कपड़े… ज्वेलरी… गिफ्ट…!”
उसने गहरी सांस ली।
उसका पति अमित एक साधारण नौकरी करता था। घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, EMI… सब कुछ मुश्किल से मैनेज होता था।
शाम को अमित घर आया तो उसने देखा नेहा चुप बैठी है।
“क्या हुआ?” उसने पूछा।
“कुछ नहीं…” नेहा ने नजरें चुरा लीं।
लेकिन अमित समझ गया।
“सीधे बोलो नेहा… क्या बात है?”
नेहा धीरे से बोली, “रिया की शादी है… बहुत बड़ी शादी होगी… सब लोग अच्छे कपड़े पहनेंगे… मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूँ…”
अमित ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “जितना है, उतना ही काफी है। हम किसी से कम नहीं हैं, बस दिखावे में मत पड़ो।”
नेहा ने सिर तो हिला दिया, लेकिन उसका मन नहीं माना।
अगले ही दिन वो बाजार निकल पड़ी।
एक से एक महंगी दुकानें… चमचमाते शो-रूम… हर ड्रेस उसे और छोटा महसूस करा रही थी।
“मैडम ये नया कलेक्शन है… 18,000 का है।”
“और ये वाला सिर्फ 22,000 का…”
वो “सिर्फ” शब्द उसके दिल पर भारी पड़ रहा था।
फिर भी उसने एक महंगा लहंगा खरीद लिया।
इसके बाद ज्वेलरी, सैंडल, मेकअप… धीरे-धीरे खर्च बढ़ता गया।
घर आकर उसने हिसाब लगाया… लगभग 45,000 रुपए खर्च हो चुके थे।
उसने थोड़ा अपने सेविंग्स से लिया, और बाकी अमित से छुपाकर क्रेडिट कार्ड से खर्च कर दिया।
कुछ दिनों बाद कार्ड का मैसेज अमित के फोन पर आया।
“नेहा… ये 30,000 का बिल किस चीज़ का है?”
नेहा चुप हो गई।
“शादी के लिए…” उसने धीरे से कहा।
अमित कुछ देर शांत रहा।
फिर बोला, “नेहा… हम अमीर बनने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अमीर दिखने की जरूरत क्यों है?”
उसकी ये बात नेहा के दिल में उतर गई… लेकिन अब देर हो चुकी थी।
शादी का दिन आ गया।
नेहा पूरी तरह तैयार हुई… महंगा लहंगा, भारी ज्वेलरी… सब कुछ परफेक्ट था।
वो खुद को आईने में देखकर खुश हुई।
“अब कोई मुझे कम नहीं समझेगा…”
लेकिन जैसे ही वो शादी में पहुंची…
उसकी सारी खुशी धीरे-धीरे खत्म होने लगी।
वहाँ हर कोई उससे भी ज्यादा महंगे कपड़ों में था।
किसी के पास असली हीरे थे, किसी के पास डिजाइनर आउटफिट।
नेहा का “महंगा” लहंगा वहाँ सामान्य लग रहा था।
रिया भी उससे ज्यादा बात नहीं कर पाई।
सब अपने-अपने स्टेटस में व्यस्त थे।
नेहा एक कोने में बैठी रही… मुस्कुराती हुई… लेकिन अंदर से खाली।
वो सोच रही थी—
“जिस इज्जत के लिए इतना खर्च किया… वो तो यहाँ किसी को दिख भी नहीं रही…”
खाना भी उसने मन से नहीं खाया।
लोग फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे… रिश्ते बस कैमरे तक सीमित थे।
वापस घर लौटते वक्त कार में सन्नाटा था।
अमित ने कुछ नहीं कहा।
नेहा खुद ही बोल पड़ी—
“मैं गलत थी…”
अमित ने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
“इतना पैसा खर्च कर दिया… सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए… और वहाँ जाकर समझ आया कि किसी को फर्क ही नहीं पड़ता…”
उसकी आँखों में हल्की नमी थी।
“अगर यही पैसे हम कहीं घूमने में लगाते… तो कम से कम खुश तो रहते…”
अमित ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “समझ आ गया ना… वही काफी है।”
नेहा ने सिर हिलाया।
उस दिन के बाद उसने एक फैसला लिया—
अब वो कभी किसी के दिखावे के लिए नहीं जिएगी।
वो अपनी खुशी के लिए जिएगी… अपने परिवार के साथ।
क्योंकि सच्ची खुशी महंगे कपड़ों में नहीं… अपने लोगों के साथ बिताए गए सच्चे पलों में होती है।

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