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अब हम खुद संभाल लेंगे

February 02, 2026
  सुबह के साढ़े छह बजे थे। रसोई में चाय उबल रही थी और गैस की धीमी आंच पर दाल चढ़ी थी। सरला देवी चाय छानते हुए बोलीं— “हर महीने वही तीन हज़ार...Read More

उसके हिस्से की धूप

February 02, 2026
शाम के लगभग साढ़े आठ बज रहे थे। बस से उतरते समय सीमा के पैरों में जैसे जान ही नहीं बची थी। दिनभर खड़ी रहकर काम करना, फिर लोकल ट्रेन की धक्का...Read More

खामोश दस्तक

January 25, 2026
सुबह के साढ़े सात बज रहे थे। घड़ी की सुइयाँ जैसे मुझसे पहले भाग रही थीं। एक हाथ में लैपटॉप बैग, दूसरे में फाइलें और फोन कान से लगाए मैं तेजी...Read More

मेहनत की पहचान

January 16, 2026
सुबह के चार बजे थे। अंधेरा अभी पूरी तरह छँटा नहीं था। आँगन में तुलसी चौरे के पास रात की नमी अभी तक ठहरी हुई थी। घर पूरा शांत था, जैसे सब लोग...Read More

उस दिन मैं रुक गया

January 12, 2026
उस दिन सुबह कुछ अलग थी। आसमान हल्का-सा धुंधला था, जैसे सूरज भी पूरी तरह निकलने से पहले कुछ सोच रहा हो। मैं सुबह छह बजे घर से निकला। दिल में ...Read More

पहचान से पहले परख

January 10, 2026
  सुबह के साढ़े आठ बजे थे। सोसायटी के पार्क में हल्की-सी धूप बिखरी हुई थी। कुछ महिलाएँ टहल रही थीं, तो कुछ बेंचों पर बैठी आपस में बातें कर र...Read More
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