गलती में छिपी इंसानियत

 

Father and daughter in school meeting with teacher discussing exam results


ऑफिस में मीटिंग चल रही थी। तभी अरुण के फोन पर लगातार कॉल आने लगी। पहले उसने इग्नोर किया, लेकिन जब तीसरी बार फोन आया तो उसने बाहर आकर कॉल उठाया।


“हैलो सर, मैं आपकी बेटी की स्कूल से बोल रही हूँ… आपको अभी स्कूल आना होगा।”


आवाज़ में सख्ती थी।


“अभी? कोई समस्या है क्या?” — अरुण ने घबराकर पूछा।


“आप आ जाइए… बात वहीं होगी।”


फोन कट गया।


अरुण ने तुरंत मीटिंग छोड़ी और सीधे स्कूल पहुंच गया। रास्ते भर उसके मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे।


स्कूल में पहुंचते ही उसे ऑफिस में बुलाया गया।


अंदर प्रिंसिपल, क्लास टीचर और उसकी बेटी काव्या खड़ी थी। काव्या की आँखें लाल थीं, जैसे वो रोई हो।


अरुण का दिल बैठ गया।


“क्या हुआ?” उसने धीरे से पूछा।


क्लास टीचर ने बिना समय गंवाए कहा —

“आपकी बेटी ने आज क्लास में बहुत गलत काम किया है।”


अरुण ने काव्या की तरफ देखा —

“क्या किया बेटा?”


काव्या चुप रही।


मैम बोलीं —

“इसने टेस्ट के दौरान दूसरे बच्चे को अपने जवाब दिखाए।”


अरुण थोड़ा चौंका —

“मतलब… इसने नकल करवाई?”


“जी हाँ!” — मैम ने सख्ती से कहा।


कमरे में सन्नाटा छा गया।


अरुण कुछ सेकंड चुप रहा… फिर शांत आवाज़ में बोला —

“काव्या, ये सच है?”


काव्या ने सिर झुका लिया —

“हाँ पापा…”


मैम ने तुरंत कहा —

“देखिए, ये बहुत गलत आदत है। अभी से नहीं रोका गया तो आगे चलकर बड़ी समस्या बन जाएगी।”


अरुण ने सिर हिलाया —

“बिल्कुल सही कह रही हैं आप।”


फिर उसने काव्या की तरफ देखा —

“लेकिन तुमने ऐसा क्यों किया?”


काव्या ने धीरे-धीरे बोलना शुरू किया —

“पापा… वो जो रिया है ना… वो बहुत रो रही थी… उसे कुछ नहीं आ रहा था… अगर वो फेल हो जाती तो उसके घर वाले उसे बहुत डांटते…”


कमरे में सब चुप हो गए।


काव्या आगे बोली —

“मैंने सोचा… अगर मैं उसे थोड़ा दिखा दूँ… तो वो पास हो जाएगी…”


मैम ने तुरंत कहा —

“लेकिन ये गलत है!”


अरुण ने हाथ से इशारा किया —

“एक मिनट मैम…”


फिर वो काव्या के सामने झुककर बोला —

“तुम्हें पता था ये गलत है?”


काव्या — “हाँ पापा…”


“फिर भी किया?”


“क्योंकि वो बहुत डर गई थी…” — काव्या की आँखों से आँसू गिरने लगे।


अरुण कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा… फिर खड़ा हो गया।


उसने टीचर की तरफ देखा और कहा —

“मैम, इसने नियम तोड़ा है… ये गलती है, इसमें कोई शक नहीं।”


मैम ने सिर हिलाया — “जी।”


अरुण ने आगे कहा —

“लेकिन एक बात और है… इसने ये किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि मदद करने के लिए किया है।”


मैम थोड़ा असहज हो गईं।


अरुण बोला —

“आजकल बच्चे अपने नंबर के लिए एक-दूसरे से छिपाते हैं… ये पहली बार देख रहा हूँ कि किसी ने अपना रिस्क लेकर किसी की मदद की।”


प्रिंसिपल ध्यान से सुन रहे थे।


अरुण ने फिर कहा —

“गलती है… सजा भी मिलनी चाहिए… ताकि इसे सही-गलत का फर्क समझ आए… लेकिन इसकी सोच को गलत मत कहिए।”


कमरे में कुछ पल की खामोशी रही।


प्रिंसिपल ने धीरे से कहा —

“आप सही कह रहे हैं… हमें दोनों बातों को समझना होगा।”


मैम का चेहरा थोड़ा नरम पड़ गया।


उन्होंने काव्या की तरफ देखकर कहा —

“तुमने जो किया वो नियम के खिलाफ है… लेकिन तुम्हारी भावना गलत नहीं थी।”


काव्या ने आँसू पोंछे।


प्रिंसिपल बोले —

“इस बार हम इसे चेतावनी देकर छोड़ते हैं… लेकिन आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए।”


काव्या ने तुरंत कहा —

“जी सर… अब नहीं करूंगी।”


स्कूल से बाहर निकलते वक्त काव्या चुप थी।


अरुण ने उसका हाथ पकड़ा —

“डर लग रहा है?”


काव्या ने सिर हिलाया — “थोड़ा…”


अरुण मुस्कुराया —

“गलती से सीखना जरूरी है… लेकिन अपनी अच्छाई कभी मत छोड़ना।”


काव्या ने पहली बार हल्की मुस्कान दी।


उस दिन अरुण को ये समझ आ गया—

हर गलती के पीछे बुरा इरादा नहीं होता… कभी-कभी दिल अच्छा होता है, तरीका गलत।



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