तिरंगा और रिश्तों की सच्चाई
“अरे सुनो, परसों क्या है याद है?”
सुबह-सुबह रसोई में चाय बनाते हुए सासु माँ ने पूछा।
“क्या?”
छोटी बहू ने मोबाइल से नज़र हटाए बिना कहा।
“अरे 26 जनवरी!”
सासु माँ की आँखों में चमक थी।
“ओह हाँ… रिपब्लिक डे।”
छोटी बहू ने ऐसे कहा जैसे कोई छुट्टी का दिन याद आया हो।
“रिपब्लिक डे नहीं बहू, गणतंत्र दिवस।
और इस घर में तो ये किसी त्यौहार से कम नहीं।”
इतना सुनते ही बड़ी बहू रिया की आँखें चमक उठीं।
वो तो पहले से ही मन में प्लान बना चुकी थी।
“माँ जी, आज से ही तैयारी शुरू कर देते हैं।
इस बार बच्चों के लिए कुछ नया करेंगे।”
छोटी बहू ने हल्की-सी हँसी दबाई।
इतनी तैयारी? 26 जनवरी के लिए?
बड़ी बहू की तैयारी...
रिया अरेंज मैरिज होकर इस घर में आई थी।
ना ज़्यादा पढ़ी-लिखी कहलाती, ना ज़्यादा स्मार्ट।
लेकिन दिल… दिल पूरा घर समेटे हुए था।
वो मार्केट गई —
रंगीन कागज़, रिबन, गुब्बारे, छोटे-छोटे झंडे।
ठंड में हाथ सुन्न हो रहे थे,
फिर भी चेहरे पर थकान नहीं थी।
“दीदी, इतना सामान किसलिए?”
दुकानदार ने पूछा।
“26 जनवरी के लिए।
घर सजाना है।”
दुकानदार मुस्कुरा दिया।
छोटी बहू की सोच...
घर लौटते ही रिया ने काग़ज़ और कैंची संभाल ली।
रंगीन काग़ज़ के टुकड़े कटने लगे,
मानो उसके हाथ नहीं, उसका मन तैयारी में जुट गया हो।
उसी समय ऊपर कमरे में
छोटी बहू आराम से बिस्तर पर बैठी
इंस्टाग्राम स्क्रॉल करने लगी।
“इस बार 26 जनवरी पर एक शानदार रील बनेगी—
देशभक्ति का गाना,
स्लो मोशन वीडियो,
और तिरंगे का ट्रेंडिंग फ़िल्टर…”
वो सोचने लगी—
इतनी मेहनत कौन करे?
आज के ज़माने में
कंटेंट बनाना ही तो
सबसे बड़ी तैयारी मानी जाती है।
शाम को नौकर रामू सब्ज़ी काट रहा था।
अचानक उँगली कट गई।
“अरे रामू!”
रिया दौड़कर आई।
“बैठो, पहले पट्टी बाँधते हैं।”
छोटी बहू ने दूर से कहा —
“अरे, नौकर लोग तो ऐसे बहाने बनाते रहते हैं।”
रिया ने कुछ नहीं कहा।
बस चुपचाप पट्टी बाँध दी।
रामू की आँखें भर आईं।
घर की तुलना...
एक तरफ
रिया —
रात-रात भर जागकर झंडे बना रही थी।
खुद की ड्रेस तक सिल रही थी।
दूसरी तरफ
छोटी बहू —
स्पा अपॉइंटमेंट,
नेल पेंट,
रील का ट्रांज़िशन सोच रही थी।
तैयारी के बीच टकराव...
छत पर सब मिलकर सजावट कर रहे थे।
रिया, देवर और ननद —
कोई झंडे की लड़ियाँ बाँध रहा था,
तो कोई रंगीन काग़ज़ काट रहा था।
तभी छोटी बहू वहाँ आ गई।
हाथ में मोबाइल था,
कैमरा पहले से ऑन।
“हाय गाइज़…”
वो मुस्कुराते हुए बोली,
“ये सारी डेकोरेशन मैंने खुद अपने हाथों से की है।”
रिया यह सुनकर चौंक गई।
उसने काम रोककर उसकी तरफ देखा।
“अभी वीडियो मत बनाओ,”
रिया ने शांत लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“पहले ये झंडे ठीक से लगा लेने दो।
झंडा सीधा लगना चाहिए।”
छोटी बहू ने हल्की हँसी के साथ कहा,
“अरे यार, एक झंडा उल्टा लग गया तो क्या हो जाएगा?
अलग लगेगा… यूनिक।”
रिया ने पहली बार थोड़ी सख़्ती दिखाई।
उसकी आवाज़ में अपमान नहीं था,
बस समझदारी थी।
“ये यूनिक नहीं है,”
उसने साफ़ कहा,
“ये गलत है।”
इतना सुनते ही
छोटी बहू का चेहरा उतर गया।
वो बिना कुछ कहे
मोबाइल हाथ में लिए वहाँ से चली गई।
26 जनवरी की सुबह...
सुबह ठीक पाँच बजे रिया की आँख खुल गई।
रसोई में जाकर उसने सबसे पहले हलवा बनाया।
फिर छोटे-छोटे तिरंगों को सहेजा,
बच्चों के लिए चॉकलेट अलग रख दी।
सादी-सी साड़ी पहने,
बिना किसी दिखावे के सजी हुई,
वह सबसे पहले नीचे आँगन में पहुँची।
कुछ देर बाद छोटी बहू भी आई—
डिज़ाइनर कुर्ता, परफेक्ट मेकअप,
हाथ में मोबाइल, आँखों में उत्साह।
हल्की मुस्कान के साथ उसने कहा,
“आज तो वीडियो ज़रूर वायरल होगा।”
असली पल...
ध्वजारोहण हुआ।
तिरंगा धीरे-धीरे लहराने लगा।
तभी राष्ट्रगान की पहली पंक्ति गूंजी।
रिया की आँखें भर आईं।
उसका दाहिना हाथ अपने आप दिल पर चला गया।
सिर थोड़ा झुक गया —
मानो उस पल में पूरा देश समा गया हो।
कुछ कदम दूर,
छोटी बहू कैमरा सेट कर रही थी।
एंगल ठीक कर रही थी,
रिकॉर्ड का बटन दबाने ही वाली थी…
लेकिन जैसे ही
“जन गण मन…”
हवा में गूंजा,
उसके हाथ रुक गए।
फोन धीरे से नीचे सरक गया।
स्क्रीन बुझ गई।
पहली बार
उसने वीडियो नहीं,
उस पल को महसूस करना चुना।
कार्यक्रम के बाद
सोसाइटी के लोगों ने कहा —
“आपकी बड़ी बहू ने दिल जीत लिया।”
यह सुनकर सासु माँ की आँखों में संतोष झलक उठा।
उन्होंने धीरे से छोटी बहू की ओर देखा और शांत स्वर में कहा —
“त्यौहार सिर्फ़ तस्वीरों और पोस्ट से नहीं मनाए जाते,
त्यौहार तो दिल के भावों से ज़िंदा रहते हैं।”
छोटी बहू कुछ बोल नहीं पाई।
वो चुप थी…
लेकिन आज पहली बार,
उसकी चुप्पी में समझ थी।
शाम को
छोटी बहू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की—
ना कोई फ़िल्टर,
ना कोई बैकग्राउंड म्यूज़िक।
तस्वीर के साथ उसने बस कुछ पंक्तियाँ लिखीं—
“आज पहली बार समझ आया,
देशभक्ति दिखाने की चीज़ नहीं होती,
इसे तो बस दिल से महसूस किया जाता है।”
वहीं दूसरी ओर,
रिया ने वह पोस्ट देखी…
कुछ नहीं कहा,
बस हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर फैल गई।

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