घमंड का आईना

Woman feeling emotionally hurt while standing in a family living room scene


सुबह का समय था।

आँगन में हल्की धूप फैली हुई थी। घर में सब लोग नाश्ते की टेबल पर बैठे थे।


रीमा धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आई। पहले वो बहुत मोटी थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसने अपने ऊपर मेहनत की थी। अब उसका शरीर संतुलित और चेहरा आत्मविश्वास से भरा हुआ था।


लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसी घर में उसका मज़ाक उड़ाया जाता था।



पहले की कहानी...


रीमा की शादी बड़े बिज़नेस परिवार में हुई थी। पति आदित्य दिखने में स्मार्ट था, लेकिन स्वभाव से थोड़ा घमंडी।


सास कमला जी को अपनी “पतली बहुओं” पर बहुत गर्व था। घर की बाकी दो बहुएँ – निशा और काव्या – हमेशा फैशन में रहती थीं।


रीमा को खाने का बहुत शौक था। शादी के बाद उसका वजन बढ़ गया।


हर बात पर ताने मिलते —


“जरा धीरे चला करो, फर्श हिलने लगता है।”

“इतना मत खाओ, घर का राशन खत्म हो जाएगा।”


रीमा बाहर से हँस देती, लेकिन अंदर से टूट जाती।



एक दिन…


एक दिन आदित्य उसे अपने ऑफिस की पार्टी में लेकर गया।


हॉल रोशनी से जगमगा रहा था। हर तरफ सजे-धजे लोग, हँसी-मज़ाक और संगीत का माहौल था। जैसे ही रीमा अंदर दाखिल हुई, कुछ लोगों की नजरें उस पर ठहर गईं।


कुछ लोग धीमे स्वर में आपस में फुसफुसाने लगे —

“आदित्य ने इससे शादी कैसे कर ली?”

“यार, उसकी पर्सनैलिटी से मैच ही नहीं करती…”


वो शब्द भले धीमे थे, लेकिन रीमा के दिल तक साफ पहुँच गए।


पूरी पार्टी में वह मुस्कुराने की कोशिश करती रही, पर अंदर ही अंदर टूटती रही। आदित्य भी दोस्तों में व्यस्त रहा, उसने शायद उसकी आँखों की नमी देखी ही नहीं।


उस रात घर लौटते समय कार की खिड़की से बाहर देखते हुए रीमा खामोश थी।


घर पहुँचकर वह सीधे अपने कमरे में गई। आईने के सामने खड़ी हुई। कुछ पल खुद को देखती रही… फिर आँखों से आँसू बहने लगे।


उसने अपने आँसू पोंछे, गहरी साँस ली और आईने में खुद की आँखों में देखते हुए पहली बार दृढ़ आवाज में कहा —


“अब बहुत हो गया… मैं किसी के लिए नहीं, खुद के लिए बदलूंगी।”



बदलाव की शुरुआत...


अगले ही दिन से रीमा ने अपने जीवन की नई शुरुआत कर दी।


वह रोज़ सुबह ठीक पाँच बजे उठने लगी। जब पूरा घर सो रहा होता, तब वह चुपचाप छत पर चली जाती। ठंडी हवा में वह योग और प्राणायाम करती। धीरे-धीरे उसकी सांसें संतुलित होने लगीं और मन शांत रहने लगा।


योग के बाद वह पास के पार्क में जाती और तेज़ चाल से चलती। शुरुआत में थोड़ी थकान होती, पैरों में दर्द भी होता, लेकिन उसने हार नहीं मानी। हर दिन वह खुद को थोड़ा और आगे बढ़ाने की कोशिश करती।


रीमा ने अपने खाने-पीने की आदतें भी बदल दीं।

जंक फूड पूरी तरह बंद कर दिया। तली-भुनी चीज़ों की जगह उसने घर का बना हल्का और पौष्टिक खाना चुना — सलाद, हरी सब्जियाँ, फल और पर्याप्त पानी।


शुरुआत में घरवालों को लगा कि यह सिर्फ कुछ दिनों का उत्साह है। उन्हें विश्वास था कि रीमा जल्द ही थक जाएगी और फिर पहले जैसी हो जाएगी।


लेकिन इस बार बात अलग थी। रीमा सच में गंभीर थी। यह बदलाव किसी को दिखाने के लिए नहीं, खुद के लिए था।


कुछ ही हफ्तों में फर्क साफ दिखने लगा।

उसका वजन धीरे-धीरे कम होने लगा। चेहरे पर नई चमक आ गई। चलने के अंदाज़ में आत्मविश्वास झलकने लगा।


अब वह सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से भी मजबूत हो रही थी।



तीन महीने बाद परिवार को एक रिश्तेदार की शादी में जाना था।


घर में तैयारियों की हलचल थी। सब लोग सज-धज कर निकलने की तैयारी कर रहे थे।


रीमा अपने कमरे से बाहर आई तो सबकी नज़रें उसी पर टिक गईं।


उसने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी। साड़ी बहुत भारी नहीं थी, लेकिन उस पर बारीक कढ़ाई उसे बेहद सुंदर बना रही थी। उसके बाल खुले थे, हल्की-सी लहराते हुए कंधों पर गिर रहे थे। चेहरे पर सिर्फ सादा मेकअप था — हल्की लिपस्टिक, काजल और एक छोटी-सी बिंदी।


लेकिन सबसे अलग बात थी उसका आत्मविश्वास।

उसकी चाल में अब झिझक नहीं थी। आँखों में चमक थी। मुस्कान में संतुलन था।


शादी में पहुँचते ही रिश्तेदारों ने आदित्य को घेर लिया।


“अरे आदित्य, भाभी तो आज कमाल लग रही हैं!”

“इतनी ग्रेसफुल और खूबसूरत… पहचान ही नहीं पाए पहले!”


कुछ महिलाएँ रीमा के पास आकर उसकी साड़ी और फिटनेस की तारीफ़ करने लगीं।


आदित्य बस सब सुनता रहा। पहली बार उसके पास कोई ताना नहीं था, कोई शिकायत नहीं थी। उसके चेहरे पर हल्की-सी हैरानी और गर्व दोनों साथ दिखाई दे रहे थे।


कमला जी भी दूर खड़ी सब देख रही थीं।

उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि यही उनकी वही बहू है, जिसे वे कभी तानों से तोलती थीं।


उस शाम पहली बार रीमा को महसूस हुआ कि लोगों की नज़रें बदलने से पहले इंसान को खुद अपनी नज़र बदलनी पड़ती है।



घर लौटते समय गाड़ी में हल्की खामोशी थी। सड़क की लाइटें शीशे पर पड़ रही थीं।


आदित्य ने धीमे स्वर में कहा —

“रीमा… आज तुम्हें देखकर सच में गर्व हुआ। तुम बहुत बदल गई हो।”


रीमा खिड़की से बाहर देखते हुए हल्का सा मुस्कुराई।

“हाँ, बदली तो हूँ… लेकिन ये बदलाव आपके लिए नहीं है।”


आदित्य थोड़ा चौंका।

“तो फिर किसके लिए?”


रीमा ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में अब पहले वाली झिझक नहीं थी, आत्मविश्वास था।


“मतलब ये कि मैं पहले भी बुरी नहीं थी, आदित्य। बस मुझे खुद पर भरोसा नहीं था। मैं सबकी बातों से टूट जाती थी। आपने… और इस घर के माहौल ने मुझे ये एहसास करा दिया कि अगर मुझे इज़्ज़त चाहिए, तो पहले खुद को मज़बूत बनाना होगा। इसलिए मैंने खुद के लिए मेहनत की… ताकि आईने में खुद को देखकर मुझे शर्म नहीं, गर्व महसूस हो।”


आदित्य चुप हो गया। उसके पास कहने के लिए शब्द नहीं थे।


उस दिन के बाद घर का माहौल सच में बदलने लगा।

अब रीमा पहले की तरह सहमी हुई नहीं रहती थी।

वो मुस्कुराती थी — लेकिन अब उसकी मुस्कान में आत्मसम्मान भी शामिल था।


रीमा ने केवल अपना शरीर नहीं बदला था, उसने अपनी सोच भी बदल दी थी।

अब वह पहले वाली चुप और सहमी हुई लड़की नहीं रही थी।


अगर कोई उसे ताना मार देता, तो वह अब आहत होकर चुप नहीं होती।

वह हल्की मुस्कान के साथ शांत स्वर में कहती—


“स्वस्थ रहना जरूरी है, लेकिन किसी को छोटा दिखाकर नहीं।”


उसके शब्दों में अब आत्मविश्वास था, शिकायत नहीं।


धीरे-धीरे घरवालों को भी समझ आने लगा कि असली खूबसूरती सिर्फ चेहरे या शरीर में नहीं होती, बल्कि इंसान के व्यवहार, उसके संस्कार और उसके आत्मसम्मान में होती है।


आदित्य भी यह बदलाव महसूस करने लगा।

उसे समझ आया कि रीमा पहले भी बुरी नहीं थी — बस उसने कभी खुद को महत्व नहीं दिया था।


अब वह न केवल रीमा की तारीफ करता था, बल्कि उसका सम्मान भी करने लगा था।

रीमा के आत्मविश्वास ने पूरे घर की सोच बदल दी थी।



सीख:


किसी का मज़ाक उड़ाकर कोई भी इंसान कभी बड़ा नहीं बनता।

दूसरों को छोटा दिखाने से नहीं, बल्कि उनका सम्मान करने से आपकी असली पहचान बनती है।


बदलाव तभी सार्थक होता है जब वह आत्मसम्मान के साथ हो।

सिर्फ दूसरों को खुश करने के लिए किया गया परिवर्तन अधूरा होता है,

लेकिन जब बदलाव खुद की खुशी और आत्मविश्वास के लिए किया जाए,

तो वही असली और स्थायी परिवर्तन बनता है।


और सबसे जरूरी बात —

खुद से प्यार करना सीखिए।

जब आप खुद को स्वीकार करते हैं, अपनी कमियों और खूबियों के साथ,

तो दुनिया का नजरिया अपने आप बदलने लगता है।




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