सच की जीत
निशा खिड़की के पास खड़ी आसमान की ओर देख रही थी। उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी। मन में कई सपने और हल्की-सी घबराहट भी थी, क्योंकि कुछ ही दिनों में उसकी ज़िंदगी एक नए मोड़ पर जाने वाली थी। बस कुछ ही दिनों बाद उसकी शादी होने वाली थी, और वह अपने जीवन की एक नई शुरुआत करने वाली थी।
निशा एक छोटे शहर के साधारण परिवार की लड़की थी। उसके पिता स्कूल में क्लर्क थे और माँ घर संभालती थीं। घर में ज़्यादा पैसा नहीं था, लेकिन प्यार और संस्कार की कोई कमी नहीं थी।
निशा के सपने भी बहुत बड़े नहीं थे।
बस वह चाहती थी कि उसका पति उसे समझे, उसका सम्मान करे और उसे अपने जीवन का साथी बनाए।
कुछ महीनों पहले ही एक रिश्ता आया था।
लड़के का नाम आरव था।
आरव एक बड़ी कंपनी में काम करता था और मुंबई में रहता था। उसका परिवार भी काफी संपन्न था।
जब रिश्ता आया, तो निशा के माता-पिता पहले तो थोड़ा घबरा गए। उन्हें लगा कि इतने बड़े घर का रिश्ता शायद उनके बस का नहीं होगा।
लेकिन जब आरव और उसका परिवार निशा को देखने आया, तो सब कुछ बहुत सहज लगा।
आरव ने निशा से बहुत ही सामान्य बातें कीं। उसने कहा—
“मुझे सादगी पसंद है। मुझे दिखावे वाली ज़िंदगी नहीं चाहिए। मुझे ऐसी पत्नी चाहिए जो घर को घर बना सके।”
उसकी बातें सुनकर निशा के माता-पिता को भी संतोष हुआ और निशा के दिल में भी विश्वास पैदा हो गया।
कुछ ही समय में शादी तय हो गई।
शादी बहुत साधारण तरीके से हुई। आरव के परिवार ने साफ कहा था—
“हमें किसी भी तरह का दहेज नहीं चाहिए।”
पूरे मोहल्ले में आरव की खूब तारीफ होने लगी।
लोग कहते—
“आज के समय में ऐसे संस्कारी लड़के बहुत कम मिलते हैं।”
निशा भी अपने भाग्य को धन्यवाद दे रही थी।
शादी के बाद निशा मुंबई आ गई।
आरव का घर बहुत सुंदर था। बड़ा सा फ्लैट, शानदार फर्नीचर और हर तरह की सुविधा।
शुरू के कुछ दिन तो जैसे किसी सपने की तरह बीते।
आरव निशा को बाहर घुमाने ले जाता, उसके लिए उपहार लाता और उसकी हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखता।
निशा को लगने लगा कि उसे सच में बहुत अच्छा जीवनसाथी मिला है।
लेकिन धीरे-धीरे निशा ने एक अजीब बात नोटिस की।
आरव अक्सर उससे कहता—
“हमें जल्दी से जल्दी बच्चा कर लेना चाहिए।”
निशा हर बार मुस्कुराकर टाल देती।
“अभी तो शादी को कुछ ही महीने हुए हैं। थोड़ा समय तो साथ बिताएँ।”
लेकिन आरव हर बार इस बात पर ज़ोर देता।
एक दिन तो वह थोड़ा नाराज़ भी हो गया।
“तुम्हें समझ क्यों नहीं आता? मुझे जल्दी बच्चा चाहिए!”
निशा को उसकी यह जल्दबाज़ी समझ नहीं आ रही थी।
लेकिन उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
कुछ दिनों बाद एक दिन आरव ऑफिस चला गया।
निशा घर के काम कर रही थी कि तभी आरव का लैपटॉप टेबल पर खुला हुआ दिखा।
निशा उसे बंद करने लगी, तभी अचानक एक ईमेल खुला हुआ दिखाई दिया।
उसमें लिखा था—
“अगर आरव एक साल के अंदर पिता बन जाता है, तो कंपनी की पार्टनरशिप का बड़ा हिस्सा उसे मिल जाएगा।”
निशा यह पढ़कर चौंक गई।
उसे समझ आ गया कि आरव इतनी जल्दी बच्चा क्यों चाहता था।
लेकिन अभी भी उसे पूरी सच्चाई नहीं पता थी।
कुछ दिन बाद एक रात आरव बाथरूम में था और उसका फोन बजने लगा।
निशा ने फोन उठाया।
दूसरी तरफ़ से एक लड़की की आवाज़ आई—
“आरव, तुम्हारी पत्नी प्रेग्नेंट हुई या नहीं? हमें जल्दी फैसला करना होगा। तुम्हें पता है न—अगर बच्चा नहीं हुआ तो तुम्हें वो प्रॉपर्टी नहीं मिलेगी।”
निशा के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अब उसे सब समझ आ गया था।
आरव ने उससे शादी प्यार के लिए नहीं की थी।
वह सिर्फ अपनी संपत्ति और फायदे के लिए यह सब कर रहा था।
निशा का दिल टूट गया।
लेकिन उसने खुद को संभाला।
उसे पता था कि अगर वह घबराएगी तो शायद वह खुद को बचा नहीं पाएगी।
उसने फैसला किया कि वह सही समय का इंतज़ार करेगी।
कुछ दिनों बाद उसने आरव से कहा—
“मुझे कुछ दिनों के लिए अपने घर जाना है। माँ की तबीयत ठीक नहीं है।”
आरव पहले तो थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन फिर मान गया।
निशा अपने घर पहुँच गई।
वहाँ पहुँचकर उसने सबसे पहले अपने माता-पिता को सारी सच्चाई बताई।
फिर उन्होंने एक वकील से संपर्क किया।
जाँच के बाद पता चला कि आरव पहले भी दो लड़कियों को इसी तरह धोखा दे चुका था।
इस बार निशा ने हिम्मत दिखाई।
कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और आरव की सच्चाई सबके सामने आ गई।
कुछ महीनों बाद कोर्ट ने निशा को न्याय दिलाया।
आरव को उसके धोखे और साज़िश के लिए सज़ा मिली।
एक दिन निशा अपने घर की छत पर खड़ी थी।
हवा धीरे-धीरे चल रही थी।
माँ उसके पास आईं और बोलीं—
“बेटी, तूने बहुत हिम्मत दिखाई।”
निशा मुस्कुराई और बोली—
“माँ, अगर हम चुप रहें तो गलत लोग और ताकतवर हो जाते हैं। कभी-कभी सच के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ी जीत होती है।”
उस दिन निशा को महसूस हुआ कि उसने सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि कई और लड़कियों के लिए भी एक मिसाल कायम की है।

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