विश्वास की डोर

 

Emotional family scene illustration of a husband apologizing to his sad wife while holding her hand inside a traditional Indian home.


सुबह का समय था।

आंगन में हल्की-हल्की धूप फैल रही थी और पेड़ों पर बैठी चिड़ियाँ चहचहा रही थीं।


राधा रसोई में खड़ी चाय बना रही थी। गैस पर चाय उबल रही थी और साथ में वह नाश्ते की तैयारी भी कर रही थी।


तभी पीछे से उसकी ननद पायल की आवाज आई —

“वाह भाभी! कितनी जल्दी इस घर पर कब्जा कर लिया आपने। अभी आए कुछ ही दिन हुए हैं और भैया तो बस आपके ही इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं।”


राधा ने हल्की मुस्कान दी और चुपचाप अपना काम करती रही।


असल में राधा इस घर में लव मैरिज करके आई थी। उसने रोहित से शादी की थी, जबकि दोनों के परिवार इस रिश्ते के खिलाफ थे। मगर रोहित ने सबके खिलाफ जाकर राधा का हाथ थाम लिया था और उसे अपने घर ले आया था।


लेकिन इस घर में राधा का स्वागत बिल्कुल भी अच्छा नहीं हुआ था।


रोहित की मां सुनीता देवी, बड़ी बहू सीमा और ननद पायल — तीनों ही राधा को पसंद नहीं करती थीं। उन्हें लगता था कि राधा ने उनके बेटे को उनसे छीन लिया है।


सीमा, जो पहले इस घर की इकलौती बहू थी, अब राधा के आने से खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी थी।


वह अक्सर ताना मारती —

“लव मैरिज वाली लड़कियों को तो बस घूमना-फिरना आता है, घर संभालना नहीं।”


राधा सब सुनकर भी चुप रहती।


वह रोज सुबह सबसे पहले उठती, घर की सफाई करती, चाय बनाती, खाना बनाती और सबका ख्याल रखती। उसे उम्मीद थी कि एक दिन सबका दिल जीत लेगी।


लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


सुनीता देवी हर छोटी-छोटी बात पर उसे डांट देतीं।


“ये क्या बनाया है? नमक ज्यादा है। तुम्हें खाना बनाना भी नहीं आता।”


राधा धीरे से कहती —

“मम्मी जी, अगली बार ध्यान रखूंगी।”


लेकिन चाहे वह कितना भी अच्छा काम करे, उसे कभी तारीफ नहीं मिलती थी।


रोहित ऑफिस चला जाता था और उसके बाद घर का माहौल बिल्कुल बदल जाता था।


एक दिन सीमा ने जानबूझकर रसोई में दूध गिरा दिया और फिर जोर से चिल्लाने लगी —


“मम्मी जी देखिए! राधा ने सारा दूध गिरा दिया।”


सुनीता देवी तुरंत आ गईं और बिना कुछ सुने राधा को डांटने लगीं।


“तुमसे कोई काम ढंग से नहीं होता। पता नहीं मेरे बेटे ने तुममें ऐसा क्या देख लिया।”


राधा की आंखों में आंसू आ गए, मगर उसने कुछ नहीं कहा।


वह नहीं चाहती थी कि रोहित के सामने घर में झगड़ा हो।


लेकिन धीरे-धीरे बातें इतनी बढ़ने लगीं कि राधा टूटने लगी।


एक दिन उसने रोहित से सब बताने की कोशिश की।


लेकिन रोहित ने कहा —

“राधा, मम्मी ऐसी नहीं हैं। शायद तुम्हें ही एडजस्ट करना होगा।”


ये सुनकर राधा का दिल टूट गया।


अब उसे लगा कि इस घर में उसका कोई नहीं है।


दिन बीतते गए और राधा अंदर ही अंदर घुटती रही।


एक दिन रोहित की तबीयत खराब हो गई और वह ऑफिस से जल्दी घर आ गया।


दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था, इसलिए वह चुपचाप अंदर आ गया।


तभी उसे अपनी मां के कमरे से हंसने की आवाज सुनाई दी।


सुनीता देवी कह रही थीं —

“देखना, कुछ दिनों में वो लड़की खुद ही ये घर छोड़कर चली जाएगी।”


सीमा हंसते हुए बोली —

“हमने उसे इतना परेशान किया है कि अब वो ज्यादा दिन नहीं टिकेगी।”


पायल बोली —

“और भैया को तो लगेगा कि गलती उसी की है।”


ये सब सुनकर रोहित के पैरों तले जमीन खिसक गई।


उसे समझ आ गया कि राधा सच कह रही थी।


वह तुरंत अपने कमरे में गया।


राधा खिड़की के पास बैठी थी और उसकी आंखें लाल थीं।


रोहित उसके सामने बैठ गया और बोला —


“राधा, मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं किया।”


राधा चुप रही।


रोहित ने उसका हाथ पकड़कर कहा —


“आज मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देख लिया। अब तुम्हें इस घर में एक पल भी और नहीं रहना पड़ेगा।”


फिर वह राधा का हाथ पकड़कर हॉल में गया और सबके सामने बोला —


“आज से राधा का अपमान इस घर में नहीं होगा। अगर मेरी पत्नी की इज्जत इस घर में नहीं है, तो मेरा भी यहां कोई काम नहीं।”


ये कहकर वह राधा को लेकर वहां से चला गया।


कुछ महीनों बाद दोनों ने एक छोटे से घर में अपनी नई जिंदगी शुरू की।


राधा ने एक स्कूल में नौकरी शुरू कर दी और रोहित भी अपने काम में व्यस्त रहने लगा।


धीरे-धीरे दोनों की जिंदगी खुशियों से भरने लगी।


वहीं दूसरी तरफ घर का माहौल बदल गया।


सीमा अब सुनीता देवी से भी बहस करने लगी थी और उन्हें बिल्कुल सम्मान नहीं देती थी।


तब सुनीता देवी को राधा की याद आने लगी।


एक दिन उन्होंने रोहित को फोन किया और कहा —


“बेटा, अगर हो सके तो राधा को लेकर एक बार घर आ जाओ।”


लेकिन रोहित ने शांत आवाज में कहा —


“मां, जिस दिन आपने राधा का दिल तोड़ा था, उसी दिन उसने इस घर से रिश्ता तोड़ लिया था।”


फोन कट गया।


सुनीता देवी की आंखों से आंसू बहने लगे।


अब उन्हें समझ आ गया था कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती की थी।


लेकिन अब पछताने के अलावा उनके पास कुछ नहीं बचा था।


कहानी की सीख:

किसी इंसान की अच्छाई को समझने में देर कर दी जाए, तो अक्सर वो इंसान हमेशा के लिए दूर चला जाता है।




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