बहू की अच्छाई ने बदल दिया सास का दिल

 

Indian daughter-in-law standing silently with tea tray while family tension unfolds in a modern traditional home


“कभी-कभी इंसान अपने ही घर में सबसे ज्यादा अकेला तब महसूस करता है, जब उसकी अच्छाइयों को नजरअंदाज करके सिर्फ उसकी कमियां ढूंढी जाएं…”


रश्मि रसोई में खड़ी चुपचाप सब्जियां काट रही थी। हाथ काम कर रहे थे, लेकिन मन कहीं और भटक रहा था। तभी बाहर से उसकी सास कमला देवी की तेज आवाज आई,


“अरे रश्मि! जरा जल्दी चाय बना दे। शर्मा जी की पत्नी आई हैं।”


“जी मम्मी जी।”


रश्मि ने जल्दी-जल्दी चाय बनाई और ट्रे लेकर बाहर चली गई। ड्रॉइंग रूम में कमला देवी अपनी पड़ोसन विमला जी के साथ बैठी बातें कर रही थीं।


जैसे ही रश्मि ने चाय रखी, विमला जी मुस्कुराकर बोलीं, “बहू तो बड़ी सुंदर लाई हो कमला। बिल्कुल फिल्म वाली लगती है।”


कमला देवी ने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाई, लेकिन अगले ही पल बोलीं, “सुंदरता से क्या होता है भला? घर संभालना भी आना चाहिए। आजकल की लड़कियां बस सजने-संवरने में लगी रहती हैं।”


रश्मि का हाथ वहीं रुक गया।


विमला जी तुरंत बोलीं, “अरे क्यों? बहू काम नहीं करती क्या?”


कमला देवी ने लंबी सांस लेते हुए कहा, “अब क्या बताऊं बहन… सारा दिन तो मुझे ही खटना पड़ता है। इसे तो थोड़ा काम बोल दो तो सिर दर्द शुरू हो जाता है।”


ये सुनते ही रश्मि अंदर तक हिल गई।


क्योंकि सुबह से लेकर रात तक घर का ज्यादातर काम वही करती थी। कमला देवी तो बस कभी-कभार सब्जी काट देती थीं या मंदिर में पूजा कर लेती थीं। लेकिन बाहर वालों के सामने तस्वीर बिल्कुल उलटी पेश की जाती थी।


रश्मि कुछ बोलती, उससे पहले ही कमला देवी ने उसे घूरकर देखा, “क्या हुआ? खड़ी क्यों है? जा अंदर।”


रश्मि चुपचाप वापस रसोई में आ गई।


उसकी शादी को अभी सिर्फ दो महीने हुए थे। अमित ने खुद उसे पसंद किया था। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। बाद में परिवार की रजामंदी से शादी हुई।


अमित के पिता नहीं थे। घर में सिर्फ कमला देवी और अमित ही थे। शादी के बाद रश्मि ने पूरी कोशिश की थी कि घर में सब खुश रहें।


लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा था कि कमला देवी बाहर वालों के सामने हमेशा खुद को बेचारी और उसे लापरवाह बहू साबित करती थीं।


कभी रिश्तेदारों से कहतीं, “आजकल की लड़कियों को रसोई कहां पसंद आती है।”


तो कभी पड़ोसियों से, “मेरी तबीयत खराब रहती है, फिर भी घर मुझे ही संभालना पड़ता है।”


शुरुआत में रश्मि ने इन बातों को नजरअंदाज किया। उसे लगा शायद नई बहू होने के कारण ऐसा हो रहा हो। लेकिन अब बातें बढ़ने लगी थीं।


एक दिन उसकी बुआ सास घर आईं। आते ही बोलीं, “रश्मि बेटा, थोड़ा अपनी सास का भी ख्याल रखा करो। बेचारी बहुत थक जाती हैं।”


रश्मि हैरान रह गई।


उसने धीरे से पूछा, “मैंने क्या किया बुआ जी?”


तभी कमला देवी बीच में बोल पड़ीं, “अरे रहने दीजिए दीदी। नई पीढ़ी है। ज्यादा बोलो तो बुरा मान जाती है।”


रश्मि की आंखें भर आईं। लेकिन उसने फिर भी कुछ नहीं कहा।


उस रात अमित ऑफिस से लौटा तो उसने देखा कि रश्मि चुपचाप बालकनी में बैठी है।


“क्या हुआ?”


“कुछ नहीं।”


“रश्मि, मुझे पता है कुछ तो बात है।”


अब तक जो बातें रश्मि अंदर दबाकर बैठी थी, वो सब बाहर आ गईं। उसने अमित को सब बता दिया।


अमित कुछ देर तक शांत बैठा रहा। फिर बोला, “मुझे यकीन नहीं हो रहा मम्मी ऐसा कर रही हैं।”


“मैंने कभी उनसे बदतमीजी नहीं की अमित। फिर भी वो सबके सामने मुझे गलत साबित करती हैं।”


अमित ने उसका हाथ पकड़ लिया, “तुम चिंता मत करो। मैं बात करूंगा।”


अगले दिन घर में अमित की मौसी आई हुई थीं। हमेशा की तरह कमला देवी फिर शुरू हो गईं।


“अब क्या बताऊं दीदी… उम्र हो गई है। शरीर साथ नहीं देता। लेकिन घर का काम तो करना ही पड़ता है।”


मौसी जी बोलीं, “बहू क्या करती है फिर?”


कमला देवी कुछ बोलतीं, उससे पहले अमित बोल पड़ा, “मौसी, घर का ज्यादातर काम रश्मि ही करती है।”


कमला देवी चौंक गईं।


अमित आगे बोला, “सुबह सबसे पहले उठती है। सबका नाश्ता बनाती है। घर संभालती है। और फिर भी अगर बाहर लोगों से उसकी शिकायत की जाए, तो गलत है।”


कमला देवी का चेहरा उतर गया।


मौसी जी माहौल समझ गईं। उन्होंने बात बदल दी और थोड़ी देर बाद चली गईं।


उनके जाते ही कमला देवी गुस्से में बोलीं, “तो अब मैं झूठी हो गई?”


अमित शांत आवाज में बोला, “मम्मी, बात झूठ या सच की नहीं है। बात ये है कि आप अपने ही घर की इज्जत बाहर खराब कर रही हैं।”


“अच्छा! अब मैं गलत हो गई? बहू ने आते ही बेटे को बदल दिया।”


“मम्मी प्लीज… हर बात में बहू को दोष देना बंद करिए।”


कमला देवी गुस्से में अपने कमरे में चली गईं।


घर का माहौल भारी हो गया।


दो दिनों तक कमला देवी ने रश्मि से ठीक से बात नहीं की। रश्मि भी चुप रही।


फिर तीसरे दिन अचानक कमला देवी की तबीयत खराब हो गई। तेज बुखार था।


अमित ऑफिस गया हुआ था। रश्मि ही उन्हें डॉक्टर के पास लेकर गई। दवा लाई। पूरा दिन उनके पास बैठी रही।


रात में जब कमला देवी की आंख खुली तो देखा रश्मि उनके सिर पर पट्टी रख रही है।


उन्होंने धीमे से पूछा, “तू सोई नहीं अभी तक?”


“आपकी तबीयत ठीक नहीं है ना मम्मी जी।”


कमला देवी कुछ पल उसे देखती रहीं।


फिर उनकी आंखें भर आईं।


“मैंने तेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया रश्मि।”


रश्मि चुप रही।


कमला देवी की आवाज कांप गई, “पता नहीं क्यों… मुझे हमेशा लगता था कि तू मुझसे मेरा बेटा छीन लेगी। इसलिए मैं हर जगह तेरी बुराई करके खुद को सही साबित करना चाहती थी।”


“मम्मी जी, बेटा कभी मां से दूर नहीं होता। लेकिन अगर घर में प्यार ना मिले, तो रिश्तों में दूरी जरूर आ जाती है।”


कमला देवी की आंखों से आंसू निकल पड़े।


“मुझे माफ कर दे बहू।”


रश्मि ने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया, “ऐसा मत कहिए मम्मी जी।”


उसी समय अमित भी कमरे में आ गया। उसने देखा दोनों की आंखें नम थीं।


“अरे… यहां क्या चल रहा है?”


कमला देवी हल्का सा मुस्कुराईं, “अपनी गलती सुधार रही हूं।”


अमित भी मुस्कुरा दिया।


उस दिन के बाद कमला देवी सचमुच बदल गईं।


अब वो पड़ोसियों के सामने रश्मि की शिकायत नहीं करती थीं, बल्कि गर्व से कहतीं,


“मेरी बहू बहुत समझदार है… घर को घर बनाकर रखा है उसने।”


और ये सुनकर रश्मि के चेहरे पर हमेशा एक सुकून भरी मुस्कान आ जाती।



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