अंधेरे में जलता दिया
सुबह का वक्त था।
सर्दियों की ठंडी हवा हड्डियों तक चुभ रही थी।
रेलवे स्टेशन के बाहर एक छोटी-सी चाय की दुकान पर
एक औरत काँपते हाथों से चाय बना रही थी।
उसका नाम था पायल।
साधारण चेहरा, सांवला रंग,
लेकिन आँखों में एक अजीब-सी चमक थी —
जैसे हालात ने उसे तोड़ तो दिया हो,
पर झुकाया नहीं।
“एक चाय देना…”
एक आदमी ने कहा।
“अभी लाई भैया।”
पायल ने मुस्कुराकर चाय दी।
कोई नहीं जानता था
कि यही पायल कभी एक बड़े घर की बहू थी।
प्यार से शुरू हुई ज़िंदगी...
पायल और अमन की मुलाकात कॉलेज में हुई थी।
अमन पढ़ाई में तेज़ था,
और पायल दिल से बहुत सच्ची।
अमन अक्सर कहा करता—
“तू मेरे साथ है,
तो मुझे किसी से डर नहीं लगता।”
कॉलेज खत्म होते ही
अमन को एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई।
धीरे-धीरे तरक्की होने लगी।
पायल ने हमेशा उसका साथ दिया—
कभी थकान में पैर दबाए,
कभी रात-रात भर जागकर उसका काम पूरा कराया।
कुछ साल बाद
अमन की शादी पायल से हो गई।
शादी सादगी से हुई,
क्योंकि पायल के मायके की हालत ठीक नहीं थी।
सास की सोच...
अमन की माँ, सरला देवी,
दिल से तो बुरी नहीं थीं,
लेकिन रंग-रूप और समाज की सोच में फँसी थीं।
पायल को देखते ही
उनके चेहरे पर हल्की-सी निराशा आ गई।
“बहू ठीक है…
पर थोड़ी और गोरी होती तो अच्छा लगता।”
पायल ने ये बातें सुनीं,
लेकिन चुप रही।
देवरानी की एंट्री...
कुछ महीनों बाद
अमन के छोटे भाई रोहित की शादी हुई।
रोहित की पत्नी नैना
बहुत खूबसूरत,
तेज़-तर्रार
और चालाक थी।
सरला देवी नैना पर जान छिड़कने लगीं।
“मेरी छोटी बहू तो लक्ष्मी है।”
धीरे-धीरे
घर में फर्क साफ़ दिखने लगा।
पायल काम करे तो—
“ये तो तुम्हारा फर्ज़ है।”
नैना काम न करे तो—
“अरे रहने दो, नई बहू है।”
नैना को ये सब देखकर
जलन होने लगी।
उसे डर था कि
अमन की कमाई का बड़ा हिस्सा
पायल के हाथ में रहेगा।
वह धीरे-धीरे
सरला देवी के कान भरने लगी।
“माँजी,
भाभी पड़ोस में बहुत बातें करती हैं।”
“माँजी,
भाभी खर्चा ज़्यादा करती हैं।”
एक दिन
सरला देवी का सब्र टूट गया।
“पायल!
तुम्हें घर के काम से ज़्यादा
दुनिया भर की बातें सूझती हैं!”
पहली बार
पायल की आँखों से आँसू निकले।
कुछ दिन बाद
अमन एक ज़रूरी मीटिंग के लिए
दूसरे शहर गया।
जाने से पहले
पायल ने दही-शक्कर दी।
लेकिन सरला देवी ने
कटोरी छीन ली।
“मेरे हाथ से खा कर जा बेटा।”
अमन चला गया…
और उसी रात
एक भयानक सड़क हादसे में
उसकी मौत हो गई।
पायल की दुनिया उजड़ गई।
वह बिलख-बिलख कर रोती रही।
लेकिन नैना के चेहरे पर
अजीब-सी शांति थी।
कुछ दिन बाद
नैना ने कह दिया—
“अब इसका यहाँ क्या काम?
जब पति ही नहीं रहा।”
सरला देवी
दुख और अंधविश्वास में
नैना की बातों में आ गईं।
“तू इस घर के लिए अपशकुन है।”
एक रात
पायल को घर से निकाल दिया गया।
सड़क से नई शुरुआत...
ठंड में
पायल सड़क पर भटकती रही।
कभी भूखी,
कभी रोती।
आख़िर उसने
स्टेशन के बाहर
चाय की एक छोटी-सी दुकान लगा ली।
धीरे-धीरे
लोग उसकी चाय पसंद करने लगे।
“बहन,
तेरी चाय में कुछ अलग बात है।”
पायल मुस्कुरा देती।
सच का खुलासा...
एक दिन
अमन का पुराना दोस्त
राघव
उसे पहचान लेता है।
“पायल?
तुम यहाँ?”
और फिर
वह सच बताता है—
“अमन ने सारी प्रॉपर्टी
तुम्हारे नाम कर दी थी।”
पायल को झटका लगता है।
काग़ज़ात सामने आते हैं।
सरला देवी और नैना
सच जानकर
पायल के पैरों में गिर जाती हैं।
“बहू,
हमें माफ़ कर दे।”
पायल चुप रही
फिर बोली—
“मैं बदला नहीं लूँगी।
बस इतना चाहती हूँ
कि किसी और बहू के साथ
ये न हो।”
पायल ने
अपनी चाय की दुकान
एक कैफ़े में बदल दी।
आज वह
कई लोगों को रोज़गार देती है।
और सब कहते हैं—
“असली खूबसूरती
रंग में नहीं,
इंसानियत में होती है।”

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