रिश्तों का सहारा
सुबह के सात बजे थे।
पूजा आटे की लोई बना रही थी।
चूल्हे पर सब्ज़ी चढ़ी थी और कुकर की सीटी आने वाली ही थी।
तभी टेबल पर रखा उसका फोन लगातार कंपन करने लगा।
एक के बाद एक…
चार मिस्ड कॉल।
पूजा के हाथ रुक गए।
स्क्रीन पर नाम चमक रहा था — दीपक भैया।
पूजा घबरा गई।
भैया जानते थे कि अगर पूजा फोन नहीं उठाती, तो ज़रूर किसी काम में फँसी होगी।
फिर भी चार बार कॉल आना…
मतलब बात साधारण नहीं थी।
पूजा ने जल्दी से हाथ धोए और फोन मिलाया।
“भैया…?”
उसकी आवाज़ खुद ही काँप गई।
उधर से रोती हुई आवाज़ आई —
“पूजा… मम्मी चली गईं…”
एक पल को पूजा को समझ ही नहीं आया कि उसने क्या सुना।
“क्या…?”
फोन हाथ से फिसलते-फिसलते बचा।
“रात को ठीक थीं… सुबह उठीं ही नहीं… डॉक्टर भी कुछ नहीं कर पाए…”
भैया की आवाज़ टूट रही थी।
पूजा फूट-फूटकर रोने लगी।
पिता तो बरसों पहले गुजर चुके थे।
अब माँ भी…
उसने काँपती आवाज़ में अपने पति अमित को सब बताया।
अमित बिना कुछ बोले चाभियाँ उठाकर बोला,
“चलो… अभी।”
माँ के बिना घर...
जैसे ही पूजा मायके पहुँची,
माँ का निर्जीव शरीर देखकर वह दौड़कर उनसे लिपट गई।
“माँ… मुझे छोड़कर मत जाओ…”
उसकी चीख़ों से पूरा घर भर गया।
अमित ने किसी तरह उसे संभाला।
अंतिम संस्कार हुआ।
रिश्तेदार लौट गए।
लेकिन पूजा का मन वहीं अटका रह गया।
रात को वह चुपचाप बैठी रोती रही।
तभी उसकी बुआ पास आकर बैठीं।
“बेटा… अब क्या ही बचा है तेरा मायका…”
उन्होंने आह भरते हुए कहा।
“माँ के बिना मायका सूना हो जाता है…
भाभी-भैया बस नाम के रिश्ते होते हैं…”
पूजा का दिल और बैठ गया।
उसने रोते हुए पूछा,
“तो क्या अब मेरा मायका नहीं रहा, बुआ…?”
भाभी की आवाज़...
कमरे के कोने में बैठी उसकी भाभी नेहा सब सुन रही थी।
वह उठकर पूजा के पास आई।
उसके सिर पर हाथ रखा और बोली —
“पूजा… रोना है तो रो लो,
लेकिन अपने रिश्तों पर ऐसे सवाल मत उठाओ।”
फिर वह बुआ की तरफ मुड़ी।
“बुआ जी, माँ की जगह कोई नहीं ले सकता, ये सच है।
लेकिन मायका सिर्फ माँ से नहीं होता।”
“जब तक भाई-भाभी हैं,
जब तक ये घर खड़ा है,
पूजा का मायका ज़िंदा है।”
नेहा की आँखें भर आईं।
“मैं भी एक बेटी हूँ।
मैं जानती हूँ मायका क्या होता है।
और मैं वादा करती हूँ —
पूजा को कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी।”
“यह घर कल भी उसका था,
आज भी है,
और हमेशा रहेगा।”
बुआ की आँखें झुक गईं।
“बहू…
गलती हो गई मुझसे।
आजकल तेरी जैसी सोच बहुत कम मिलती है…”
पूजा उठकर अपनी भाभी से लिपट गई।
“भाभी…
आज आपने मुझे माँ के बाद सबसे बड़ा सहारा दिया है।”
“लोग कहते हैं भाभी माँ जैसी नहीं होती…
लेकिन आज आपने साबित कर दिया
कि अगर दिल बड़ा हो
तो रिश्ता खुद-ब-खुद माँ जैसा बन जाता है।”
नेहा ने पूजा को सीने से लगा लिया।
उस पल पूजा को एहसास हुआ —
मायका सिर्फ जगह नहीं होता,
मायका वो लोग होते हैं
जो आपको अपना मानते हैं।

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