मेरा नाम कमला बाई है। उम्र 60 साल। मैं शहर के छोटे से रेलवे स्टेशन के बाहर चाय का ठेला लगाती हूँ। सुबह चार बजे उठकर चूल्हा जलाती हूँ, अदरक क...Read More
रात के करीब साढ़े बारह बजे थे। कमरे में पंखा चल रहा था, फिर भी महेश बाबू को नींद नहीं आ रही थी। वे बार-बार करवट बदल रहे थे। “क्या हुआ? नींद ...Read More
सुबह के साढ़े पाँच बजे थे। अलार्म बजने से पहले ही राधिका की नींद खुल चुकी थी। कमर में हल्का दर्द था, लेकिन आदत बन चुकी थी—दर्द से पहले ज़िम्...Read More