छोटी सोच नहीं, बड़ा हौसला

 

Indian father sitting on a sofa looking worried after losing his job while his family supports him at home.


रवि जी शाम को ऑफिस से घर लौटे। आज उनके चेहरे पर रोज़ वाली मुस्कान नहीं थी। वे चुपचाप सोफे पर बैठ गए।


उनकी बेटी अनन्या पढ़ाई कर रही थी। उसने देखा कि पापा कुछ उदास हैं।


अनन्या: पापा, आप ठीक तो हैं?


रवि जी: हाँ बेटा… बस थोड़ा थका हूँ।


इतने में सीमा जी (अनन्या की मम्मी) पानी लेकर आईं।


सीमा जी: क्या बात है? आप कुछ परेशान लग रहे हैं।


रवि जी ने गहरी सांस ली।


रवि जी: आज कंपनी में मीटिंग थी… कंपनी घाटे में चल रही है। कई लोगों को निकाल दिया गया… और मेरा नाम भी उनमें था।


सीमा जी कुछ पल के लिए चुप रह गईं।


सीमा जी: अब क्या करेंगे?


रवि जी: समझ नहीं आ रहा। घर का खर्च, किराया, अनन्या की पढ़ाई… सब कैसे चलेगा?


यह सब बातें अनन्या अपने कमरे से सुन रही थी। वह बाहर आई।


अनन्या: पापा, आप चिंता मत करो। सब ठीक होगा।


रवि जी मुस्कुरा तो दिए, लेकिन मन में चिंता बनी रही।



नया विचार...


अगले कुछ दिन बहुत भारी गुज़रे। रवि जी नौकरी ढूंढते रहे, पर कहीं बात नहीं बनी।


एक दिन रविवार को सब नाश्ता कर रहे थे।


अनन्या: पापा, आप अपना काम क्यों नहीं शुरू करते?


रवि जी: बेटा, बिज़नेस करना आसान नहीं होता। उसमें पैसा लगता है। अगर नुकसान हो गया तो?


अनन्या: पापा, आपने मेरे कॉलेज के लिए जो पैसे बचा रखे हैं… वो इस्तेमाल कर लीजिए।


सीमा जी: नहीं बेटा, वो तुम्हारी पढ़ाई के लिए हैं।


अनन्या: मैं स्कॉलरशिप ले लूंगी। मेहनत करूंगी। लेकिन आप कोशिश तो कीजिए।


रवि जी ने पहली बार उम्मीद की किरण देखी।



मेहनत की शुरुआत...


रवि जी को खाना बनाने का शौक था। उन्होंने घर का बना मसाला और अचार बनाने का छोटा सा काम शुरू किया।


शुरू में ऑर्डर कम आए। कई बार नुकसान भी हुआ। लेकिन अनन्या सोशल मीडिया पर उनके प्रोडक्ट की जानकारी डालती रही।


धीरे-धीरे लोगों को स्वाद पसंद आने लगा।


एक दिन पास के बड़े स्टोर से बड़ा ऑर्डर मिला। रवि जी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।


रवि जी: बेटा, यह सब तेरी वजह से हुआ।


अनन्या: नहीं पापा, यह आपकी मेहनत का फल है।



समय बदला...


कुछ साल बीत गए। बिज़नेस अब अच्छी तरह चल रहा था। अनन्या ने अपनी पढ़ाई पूरी की और बिज़नेस मैनेजमेंट सीखा।


अब वह पापा का काम संभालने लगी।


एक दिन उसने कहा —


अनन्या: पापा, अब आप आराम कीजिए। मैं सब संभाल लूंगी।


रवि जी: लेकिन बेटा, तुम्हारी शादी?


अनन्या: शादी तब करूंगी जब मुझे ऐसा साथी मिलेगा जो मेरे सपनों का सम्मान करे।


सीमा जी मुस्कुरा दीं। अब उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था।



सही निर्णय...


कुछ समय बाद एक बड़ा व्यापारी अपने बेटे के साथ उनके घर आया। उनका बेटा भी उसी क्षेत्र में काम करता था और अनन्या के साथ कई प्रोजेक्ट कर चुका था।


उन्होंने कहा —


व्यापारी: आपकी बेटी बहुत मेहनती और समझदार है। हम अपने बेटे के लिए उसका हाथ मांगने आए हैं। और हमें कोई दहेज नहीं चाहिए।


रवि जी की आँखें भर आईं।


अनन्या से पूछा गया। उसने मुस्कुराकर हाँ कह दी — क्योंकि वह जानती थी कि सामने वाला उसके सपनों को समझता है।


कुछ समय बाद दोनों की सादगी से शादी हो गई। दोनों ने मिलकर बिज़नेस को और बड़ा बना दिया।



कहानी की सीख:


मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता।


परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत है।


बेटियाँ बोझ नहीं, घर की शक्ति होती हैं।


सही सोच और हिम्मत से छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता बन सकती है।






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