बहू और फिटनेस का जुनून
रीमा की शादी को अभी तीन दिन ही हुए थे। आज उसकी पहली रसोई थी। पीली साड़ी पहनकर वह रसोई में जाने की तैयारी कर रही थी। तभी उसके पति अमित उसे देखते हुए बोले—
“वाह रीमा! आज तो तुम बहुत सुंदर लग रही हो।”
रीमा मुस्कुराई, “सुंदर तो लगूंगी ही ना, आपने जो इतने प्यार से साड़ी दी है।”
इतना कहकर वह एक बड़ा सा बैग उठाने लगी।
अमित ने हैरानी से पूछा, “अरे, ये बैग किचन में क्यों ले जा रही हो? इसमें क्या है?”
रीमा बोली, “खजाना है।”
अमित की आंखें चमक उठीं, “क्या? ज्वेलरी लाई हो क्या?”
रीमा ने बैग खोला—अंदर भरी थीं पालक, मेथी, लौकी, तोरई, भिंडी, करेला, शिमला मिर्च, ब्रोकोली…
अमित चौंक गए, “ये सब क्या है?”
रीमा गर्व से बोली, “मेरी हेल्थ का खजाना! मैं दहेज में ये सब्ज़ियां लाई हूं।”
इतने में सासू मां कमला जी आ गईं।
“बहू, ये क्या? दहेज में लोग सोना-चांदी लाते हैं और तुम सब्ज़ी?”
रीमा हंसते हुए बोली, “मांजी, सोना शरीर को मजबूत नहीं करता, सब्ज़ी करती है।”
पहली रसोई...
रीमा ने अपनी पहली रसोई में बड़े मन से कई तरह के व्यंजन बनाए।
उसने तैयार किए —
पालक के परांठे
मेथी की पूरी
लौकी की सब्ज़ी
भिंडी मसाला
तोरई की तरकारी
हरी धनिया की चटनी
और मिठाई में — लौकी की खीर
डाइनिंग टेबल पर जब सब खाना सजाया गया, तो पूरा माहौल हरा-भरा दिखाई दे रहा था। हर थाली में हरी सब्ज़ियों की खुशबू और ताज़गी झलक रही थी।
ननद पूजा ने धीरे से मुस्कुराते हुए पूछा,
“भाभी, आपने पनीर नहीं बनाया?”
रीमा ने हल्की हंसी के साथ जवाब दिया,
“अरे पूजा, शादी में हमने इतना तेल-मसाले वाला खाना खाया है कि अब थोड़ा हल्का और हेल्दी खाना जरूरी है। इसलिए आज डिटॉक्स वाला मेन्यू रखा है।”
ससुर जी ने भी मुस्कुराते हुए कहा,
“ठीक है बहू, आज तुम्हारी पसंद का खाना खा लेते हैं…”
और फिर सबने मिलकर खाना शुरू किया।
एक हफ्ते बाद...
लेकिन असली परेशानी तब शुरू हुई, जब रीमा ने रोज़ के खाने का पूरा मेन्यू ही हरी सब्ज़ियों से भर दिया।
सुबह नाश्ते में — पालक उपमा
दोपहर में — लौकी वाली दाल
रात को — करेला और तोरई की सब्ज़ी
घर वालों ने सोचा था कि यह सब पहली रसोई तक ही रहेगा, लेकिन अब तो हर दिन यही सिलसिला चलने लगा था।
एक दिन तंग आकर पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“भाभी, आज मेरे लिए मैगी बना दीजिए ना, बहुत मन कर रहा है।”
रीमा तुरंत बोली,
“क्यों नहीं! मैं तुम्हारे लिए हेल्दी मैगी बनाती हूँ।”
पूजा खुश हो गई। उसे लगा आज तो मज़ा आ जाएगा।
लेकिन थोड़ी ही देर में जब रीमा किचन से मैगी लेकर आई, तो उसमें सिर्फ नूडल्स नहीं थे —
उसमें पालक, गाजर, बीन्स, शिमला मिर्च और ऊपर से हरा धनिया भी डाला हुआ था।
पूजा ने प्लेट की तरफ देखा, फिर भाभी की तरफ…
उसका सारा उत्साह एक ही पल में गायब हो गया।
धीरे से बोली,
“भाभी… ये मैगी है या सब्ज़ियों की टोकरी?”
रीमा मुस्कुरा दी, लेकिन पूजा का चेहरा पूरी तरह उतर चुका था।
जूस वाला मामला...
एक दिन पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“भाभी, ज़रा मेरे लिए जूस बना दीजिए ना।”
पूजा के मन में मीठा-सा ख्याल आया कि आज शायद आम या संतरे का ठंडा-ठंडा जूस मिलेगा। वह आराम से सोफे पर बैठकर इंतज़ार करने लगी।
थोड़ी देर बाद रीमा ट्रे में गिलास लेकर आई।
गिलास में हल्के हरे रंग का जूस चमक रहा था।
पूजा ने गिलास को गौर से देखा और चौंककर बोली,
“भाभी! ये क्या है? जूस भी हरा?”
रीमा बिल्कुल शांत स्वर में बोली,
“हाँ, लौकी का जूस है। बिल्कुल ताज़ा बनाया है। इसमें चीनी भी नहीं डाली — बहुत हेल्दी है।”
पूजा ने धीरे से लंबी सांस ली और मन ही मन बोली,
“हे भगवान! अब जूस भी हेल्दी ही पीना पड़ेगा!”
परिवार की बगावत...
धीरे-धीरे हालात ऐसे हो गए कि घर के सभी लोग बाहर का खाना खाने लगे।
कोई ऑफिस का बहाना करता, कोई पेट दर्द का, तो कोई कह देता कि आज भूख ही नहीं है।
एक दिन रीमा सब्ज़ी लेने बाज़ार गई थी। वहीं सड़क किनारे लगे एक स्टॉल पर उसने देखा कि उसके ससुर जी और सासू मां चुपके से चाउमीन और चिली पोटैटो खा रहे हैं। दोनों ऐसे इधर-उधर देख रहे थे, मानो कोई उन्हें पकड़ न ले।
यह देखकर रीमा हैरान रह गई। उसका दिल थोड़ा दुखी भी हो गया।
घर लौटकर वह काफी देर तक चुप रही। रसोई में काम करते-करते उसके मन में कई सवाल उठने लगे—
“मैं तो सबकी सेहत के लिए इतना ध्यान रख रही हूं…
हर दिन सोचती हूं कि सब स्वस्थ रहें।
लेकिन अगर मेरे बनाए खाने से कोई खुश ही नहीं है,
तो फिर उसका क्या फायदा?”
उस दिन पहली बार रीमा ने महसूस किया कि सिर्फ अच्छी नीयत ही काफी नहीं होती,
अपनों की खुशी भी उतनी ही जरूरी होती है।
बदलाव...
उस शाम पहली बार रसोई से कुछ अलग ही खुशबू आ रही थी। घर के सभी लोग हैरानी से एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
पूजा ने नाक सूंघते हुए कहा,
“ये… पनीर की खुशबू है क्या?”
अमित ने हंसते हुए जवाब दिया,
“नहीं-नहीं, जरूर गोभी वाला पनीर होगा!”
तभी रीमा रसोई से बाहर आई। उसके हाथों में बड़े-बड़े बर्तन थे। उसने एक-एक करके सब कुछ डाइनिंग टेबल पर सजा दिया।
आज सच में बना था—
शाही पनीर,
वेज पुलाव,
रायता,
पूड़ी
और मिठाई में खीर।
सबकी आंखें खुशी से चमक उठीं।
रीमा मुस्कुराते हुए बोली,
“मैंने सोचा है कि अब से दिन में एक बार हेल्दी खाना बनेगा और एक बार आप सबकी पसंद का। सेहत भी जरूरी है और खुशी भी।”
ससुर जी की आंखें भर आईं। उन्होंने प्यार से कहा,
“बहू, अब तुम सच में हमारे घर की लक्ष्मी हो।”
पूजा हंसते हुए बोली,
“भाभी, अब मैं रोज जूस पियूंगी… लेकिन कभी-कभी आम का भी चलेगा!”
इतना सुनते ही सब जोर से हंस पड़े। उस दिन सिर्फ खाना ही नहीं, घर का माहौल भी मीठा हो गया था।
सीख:
अच्छी सेहत ज़रूरी है,
लेकिन अपनों की खुशी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
ज़िंदगी में संतुलन बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।

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