गरीब बहू को मिला प्यार से भरा अमीर ससुराल

 

Young Indian woman with a kind heart helping others, inspiring family story scene.


सुबह का समय था।

आँगन में हल्की सुनहरी धूप बिखरी हुई थी और पूरा घर सुबह की ताज़गी से भरा हुआ लग रहा था।


सीमा अपने घर के आँगन में झाड़ू लगा रही थी। उसकी उम्र लगभग बीस साल थी। चेहरे पर मासूमियत और आँखों में सादगी झलकती थी।


लेकिन उसकी जिंदगी उतनी आसान नहीं थी।


सीमा के माता-पिता की मौत तब हो गई थी जब वह सिर्फ नौ साल की थी। उसके बाद उसके चाचा रमेश और चाची सुनीता उसे अपने घर ले आए थे।


शुरू-शुरू में सीमा को लगा था कि अब उसे माँ-बाप की कमी नहीं महसूस होगी।


लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आ गया कि वह इस घर में भतीजी नहीं बल्कि नौकरानी बनकर रह रही है।


सुनीता हर समय उसे डाँटती रहती।


“सीमा, जल्दी उठ! अभी तक झाड़ू नहीं लगाया?

तुझे काम करने में इतनी आलस क्यों आती है?”


“चाची, अभी लगा रही हूँ।”


“बस बहाने बनाती रहती है। मेरी बेटी पूजा को देख, कितनी समझदार है।”


पूजा सुनीता की बेटी थी और सीमा से दो साल छोटी थी।


पूजा कभी कोई काम नहीं करती थी।

घर के सारे काम सीमा ही करती थी।



एक दिन...


सुनीता ने कहा


“सीमा, बाजार जाकर सब्ज़ी ले आ।”


“जी चाची।”


सीमा थैला लेकर बाजार चली गई।


वह सब्ज़ी वाले के पास जाकर बोली


“भैया, आधा किलो टमाटर और आधा किलो आलू दे दीजिए।”


उसी समय उसने देखा कि एक बूढ़ी अम्मा सड़क पार कर रही थीं।


अचानक एक बाइक तेज़ी से आई और उनसे टकरा गई।


अम्मा गिर गईं और उनकी सब्ज़ियाँ सड़क पर फैल गईं।


सीमा तुरंत दौड़कर उनके पास पहुँची।


“अम्मा जी, आपको लगी तो नहीं?”


“नहीं बेटा… बस थोड़ा दर्द हो रहा है।”


सीमा ने उनकी सारी सब्ज़ियाँ उठाईं और उनका हाथ पकड़कर बोली


“आइए अम्मा जी, मैं आपको घर तक छोड़ देती हूँ।”


अम्मा बहुत खुश हो गईं।



उसी समय...


पास ही खड़ी एक महिला यह सब ध्यान से देख रही थी।

उनका नाम ममता था।


सीमा जिस तरह बिना किसी स्वार्थ के उस बूढ़ी अम्मा की मदद कर रही थी, उसे देखकर ममता बहुत प्रभावित हो गई।


वह मन ही मन सोचने लगी,


“आज के समय में भी ऐसी लड़कियाँ मिलती हैं क्या?

कितनी दयालु, संस्कारी और मदद करने वाली है यह लड़की।

बिना किसी पहचान के भी इसने उस बूढ़ी अम्मा की इतनी मदद की।”


ममता के मन में उसी समय यह बात बैठ गई कि ऐसी ही लड़की उसे अपने बेटे के लिए बहू बनानी चाहिए।


वह सोचने लगी,


“मुझे इस लड़की के बारे में जरूर पता करना होगा।

अगर किस्मत ने साथ दिया तो मैं इसे अपने घर की बहू बनाऊँगी।”



अगले दिन...


ममता अपने बेटे रोहन के साथ बाजार आई।


थोड़ी देर बाद उन्हें सीमा फिर दिखाई दे गई।


ममता ने रोहन से कहा


“बेटा, वही लड़की है।”


रोहन ने सीमा को देखा।


वह सादे कपड़ों में थी लेकिन बहुत सुंदर और शांत स्वभाव की लग रही थी।


रोहन बोला


“माँ, लड़की सच में बहुत अच्छी लग रही है।”


ममता सीमा के पास गई।


“बेटी, तुम्हारा नाम क्या है?”


“सीमा।”


“तुम्हारे माता-पिता?”


सीमा की आँखें भर आईं।


“वो अब इस दुनिया में नहीं हैं।”


ममता को उस पर और भी दया आ गई।


“बेटा, क्या मुझे तुम्हारे घर का नंबर मिल सकता है?”


सीमा ने अपनी चाची सुनीता का नंबर दे दिया।



उसी शाम...


ममता ने उसी शाम सुनीता को फोन किया।


“नमस्ते बहन जी, मैं ममता बोल रही हूँ। कल मैं बाजार में आपकी बेटी से मिली थी। वह मुझे बहुत अच्छी लगी। अगर आपको कोई आपत्ति न हो तो मैं अपने बेटे के लिए उसका रिश्ता लेकर आपसे मिलने आना चाहती हूँ।”


यह सुनकर सुनीता बहुत खुश हो गई। उसे लगा कि ममता उसकी बेटी पूजा के लिए रिश्ता लेकर आ रही है।


खुशी से उसकी आवाज बदल गई। वह मुस्कुराते हुए बोली,


“अरे क्यों नहीं बहन जी, यह तो हमारे लिए बहुत खुशी की बात है। आप जरूर आइए, हमें आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगेगा।”



अगले दिन...


ममता अपने पति और बेटे रोहन के साथ सुनीता के घर पहुँची।


सुनीता ने उनका बड़े आदर से स्वागत किया और थोड़ी देर बाद सबके सामने चाय-नाश्ता परोसा गया। घर में बैठकर सब लोग इधर-उधर की बातें करने लगे।


कुछ देर बाद ममता मुस्कुराते हुए बोली,

“बहन जी, सच कहूँ तो हमें आपकी भतीजी सीमा बहुत पसंद आई है। वह बहुत ही सीधी, संस्कारी और मेहनती लड़की है। अगर आपको कोई आपत्ति न हो तो हम अपने बेटे रोहन के लिए सीमा का रिश्ता माँगने आए हैं।”


ममता की बात सुनकर सुनीता कुछ पल के लिए चुप रह गई। उसका चेहरा उतर गया, क्योंकि वह तो सोच रही थी कि यह रिश्ता उसकी अपनी बेटी पूजा के लिए आया होगा।


लेकिन ममता और रोहन दोनों को सीमा ही पसंद थी। उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें सीमा जैसी ही सरल और अच्छी लड़की अपनी बहू के रूप में चाहिए।


आखिरकार काफी बातचीत के बाद दोनों परिवारों की सहमति से रोहन और सीमा का रिश्ता तय हो गया।



शादी का दिन...


सीमा दुल्हन के रूप में बेहद सुंदर लग रही थी। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान और आँखों में भावनाओं की चमक थी। उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी शादी इतने अच्छे और सम्मानित घर में हो रही है।


विदाई का समय आया तो माहौल भावुक हो गया। सीमा की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने अपनी चाची सुनीता के पास जाकर नम आँखों से कहा,


“चाची, अगर मुझसे कभी कोई गलती हुई हो तो मुझे माफ़ कर दीजिए।”


सीमा की ये बात सुनकर सुनीता कुछ पल के लिए चुप रह गई। उसे अपने व्यवहार पर शर्म महसूस होने लगी। उसके मन में पछतावा भी था कि उसने सीमा के साथ हमेशा उतना अच्छा व्यवहार नहीं किया जितना करना चाहिए था।



ससुराल...


जब सीमा अपने ससुराल पहुँची तो वहाँ उसका बहुत ही भव्य और प्यार भरा स्वागत किया गया।


घर के दरवाज़े पर रंगोली बनी हुई थी और पूरे घर को फूलों से सजाया गया था। जैसे ही सीमा दहलीज़ पर पहुँची, उसकी सास ममता आरती की थाली लेकर खड़ी थीं।


ममता ने प्यार से आरती उतारी और फिर मुस्कुराते हुए सीमा को गले लगा लिया।


उन्होंने स्नेह भरी आवाज़ में कहा,

“बेटा, अब से यह घर ही तुम्हारा घर है।”


यह सुनते ही सीमा की आँखें भर आईं।


उसे ऐसा लगा जैसे कई सालों बाद किसी ने उसे सच में अपना कहा हो। उस पल सीमा ने पहली बार अपने ससुराल में माँ जैसा सच्चा प्यार और अपनापन महसूस किया।



मुंह दिखाई...


मुँह दिखाई की रस्म शुरू हुई।


सबसे पहले ममता ने प्यार से सीमा के गले में सोने का सुंदर हार पहनाते हुए कहा,

“बहू, ये मेरी तरफ से तुम्हारे लिए छोटा सा तोहफा है।”


फिर उसकी ननद मुस्कुराते हुए आगे आई और बोली,

“भाभी, ये कंगन मैंने आपके लिए खास बनवाए हैं।”


इसके बाद उसके ससुर ने भी प्यार से एक सोने की अंगूठी देते हुए कहा,

“बहू, इसे हमारी तरफ से आशीर्वाद समझकर रख लो।”


इतने सारे गहने देखकर सीमा हैरान रह गई।

उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए।


वह धीरे से बोली,

“माँ जी, इतने गहनों की क्या जरूरत थी?”


ममता मुस्कुराईं और प्यार से सीमा का हाथ पकड़कर बोलीं,

“बेटा, हमें गहनों से ज्यादा तुम्हारा अच्छा दिल पसंद आया है।

ये गहने तो बस तुम्हारे लिए हमारा प्यार है।”



कुछ दिन बाद...


सीमा कुछ दिनों बाद अपने मायके गई।


वह बहुत सादे और साधारण कपड़ों में थी।


उसे इस तरह देखकर सुनीता हैरान हो गई और बोली,


“अरे सीमा, तेरे गहने कहाँ हैं?

तेरे ससुराल वाले तो बहुत अमीर हैं, फिर तू बिना गहनों के कैसे आ गई?”


सीमा हल्के से मुस्कुराई और बोली,


“चाची, गहने तो मैंने अलमारी में रख दिए हैं।

माँ जी कहती हैं कि इंसान की असली खूबसूरती उसके गहनों में नहीं, बल्कि उसके अच्छे व्यवहार और संस्कारों में होती है।”


सीमा की यह बात सुनकर सुनीता कुछ देर के लिए चुप हो गई।


उसे अपने पुराने व्यवहार पर शर्म आने लगी और धीरे-धीरे उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा।



सीख:

अच्छाई और सच्चाई कभी व्यर्थ नहीं जाती। जो इंसान दिल का अच्छा होता है, उसे एक न एक दिन सम्मान और खुशियाँ जरूर मिलती हैं। इसलिए इंसान की असली दौलत उसका अच्छा दिल और नेक व्यवहार होता है, न कि धन-दौलत।




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