जब नौकरानी घर की मालिक बनी
तेज बरसात के बीच पुराना बंगला किसी खामोश रहस्य की तरह खड़ा था। बड़े से लोहे के गेट के बाहर खड़ी सना अपने भीगे दुपट्टे को ठीक कर रही थी। उसके हाथ में एक छोटा बैग था और आंखों में बेचैनी।
उसे उस घर में नौकरी के लिए बुलाया गया था।
अखबार में छपे विज्ञापन में लिखा था—
“8 साल के बीमार बच्चे की देखभाल के लिए पढ़ी-लिखी और जिम्मेदार लड़की चाहिए। रहने और खाने की सुविधा मुफ्त।”
सना पिछले कई दिनों से नौकरी ढूंढ रही थी। मां के इंतकाल के बाद वह अपने चाचा के घर रह रही थी, जहां हर दिन उसे एहसास दिलाया जाता था कि वह बोझ है।
गार्ड ने गेट खोलते हुए पूछा,
“तुम ही सना हो?”
“जी…”
“मेमसाहब इंतजार कर रही हैं। अंदर चलो।”
सना घबराई हुई उस आलीशान बंगले के अंदर दाखिल हुई। सफेद संगमरमर का फर्श, दीवारों पर महंगी पेंटिंग्स और चारों तरफ फैली खामोशी उस घर को और भी भारी बना रही थी।
ड्राइंगरूम में पहुंचते ही उसकी नजर सोफे पर बैठी एक बेहद खूबसूरत लेकिन कमजोर औरत पर पड़ी। चेहरे की चमक बीमारी ने छीन ली थी।
उस महिला ने मुसकराते हुए कहा,
“मैं माहिरा हूं।”
सना धीरे से बैठ गई।
माहिरा ने पूछा,
“तुम्हें बच्चों को संभालने का अनुभव है?”
“नहीं मैडम… लेकिन मुझे बच्चों से बहुत लगाव है।”
“और नौकरी की जरूरत इतनी क्यों पड़ गई?”
सना कुछ पल चुप रही, फिर बोली,
“क्योंकि अब मेरा अपना कोई घर नहीं है।”
माहिरा उसकी आंखों में दर्द पढ़ चुकी थी।
तभी सीढ़ियों से उतरता हुआ एक लंबा, स्मार्ट और बेहद आकर्षक आदमी नीचे आया। उसके साथ एक कमजोर सा बच्चा था।
“यह मेरे पति कबीर हैं… और यह मेरा बेटा अयान।”
सना की नजर जैसे कबीर पर अटक गई।
कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“उम्मीद है अयान को तुम पसंद आ जाओगी।”
अयान धीरे से सना के पास आया और उसका हाथ पकड़ कर बोला,
“आप मेरे साथ खेलोगी?”
सना मुस्कुरा दी।
उसी दिन उसे नौकरी मिल गई।
धीरेधीरे सना उस घर का हिस्सा बन गई। अयान उससे बेहद घुलमिल गया। वह उसके बिना खाना तक नहीं खाता था।
लेकिन उन दिनों सना ने एक और चीज महसूस की…
कबीर का उसके आसपास जरूरत से ज्यादा रहना।
कभी चाय के बहाने, कभी अयान की चिंता के बहाने।
एक रात अयान को तेज बुखार था। सना पूरी रात उसके पास बैठी रही। सुबह कबीर कमरे में आया और बोला,
“तुम ने सारी रात जाग कर मेरे बेटे को संभाला… शुक्रिया।”
“यह मेरा फर्ज था।”
कबीर कुछ देर उसे देखता रहा, फिर बोला,
“तुम इस घर में बाकी लोगों जैसी नहीं हो।”
उस दिन पहली बार सना के दिल में हलचल हुई।
धीरेधीरे कबीर उससे अपने दुख बांटने लगा।
उसने बताया कि माहिरा को दिल की गंभीर बीमारी है। डॉक्टर जवाब दे चुके हैं।
“मैं अकेला पड़ गया हूं सना…”
कबीर अक्सर उदास आवाज में कहता।
सना को उस पर तरस आने लगा।
फिर एक दिन कबीर ने उसका हाथ पकड़ कर कहा,
“काश तुम मुझे पहले मिली होतीं…”
सना का दिल जोर से धड़क उठा।
वह समझ बैठी कि कबीर उससे मोहब्बत करता है।
कुछ ही महीनों में दोनों की नजदीकियां बढ़ गईं।
लेकिन दूसरी तरफ माहिरा सब समझ रही थी।
वह अक्सर चुपचाप सना को देखती रहती।
एक दिन उसने सना से पूछा,
“अगर किसी दिन मैं इस दुनिया में न रहूं तो तुम अयान का खयाल रखोगी?”
सना की आंखें भर आईं।
“मैं अपनी जान से ज्यादा उसका खयाल रखूंगी।”
माहिरा मुस्कुरा दी।
उसी रात उसने अपने वकील को बुलाया।
कुछ हफ्तों बाद माहिरा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।
मरने से पहले उसने सना का हाथ पकड़ कर कहा,
“हर मुस्कुराता चेहरा वफादार नहीं होता… अपने दिल से ज्यादा अयान पर भरोसा करना…”
सना उस वक्त उसकी बात समझ नहीं पाई।
माहिरा की मौत के बाद घर का माहौल बदल गया।
कबीर खुल कर सना के करीब आने लगा।
एक रात उसने कहा,
“अब हमें शादी कर लेनी चाहिए।”
सना का चेहरा शर्म से लाल हो गया।
उसे लगा उसकी जिंदगी संवर गई।
लेकिन अगले ही दिन उसने कबीर को अपने कमरे में एक लड़की के साथ देखा।
वह लड़की हंसते हुए कह रही थी,
“अब तो रास्ते का कांटा हट गया…”
सना के पैरों तले जमीन खिसक गई।
कबीर ने उसे देखते ही गुस्से में कहा,
“तुम्हें बिना दस्तक अंदर आने की तमीज नहीं?”
“यह सब क्या है?” सना कांपती आवाज में बोली।
कबीर हंस पड़ा।
“तुम सचमुच खुद को खास समझ बैठीं?”
सना की आंखों में आंसू आ गए।
कबीर बेरुखी से बोला,
“तुम जैसी लड़कियां सिर्फ जरूरत पूरी करने के काम आती हैं, शादी के नहीं।”
सना का दिल टूट गया।
“तुम ने मुझ से मोहब्बत का नाटक क्यों किया?”
“क्योंकि तुम बेवकूफ थीं।”
यह सुन कर सना जैसे पत्थर बन गई।
उसी वक्त वकील वहां आ पहुंचे।
उन्होंने सबको ड्राइंगरूम में बुलाया।
वसीयत पढ़ी गई।
“माहिरा अपनी सारी जायदाद और बिजनेस अपने बेटे अयान के नाम करती हैं…”
कबीर मुस्कुरा उठा।
लेकिन अगले ही पल वकील ने कहा,
“और अयान के बालिग होने तक उसकी कानूनी गार्जियन मिस सना होंगी।”
कबीर के चेहरे का रंग उड़ गया।
“क्या बकवास है!”
वकील ने सख्त आवाज में कहा,
“माहिरा मैडम को आप पर भरोसा नहीं था।”
सना हैरानी से सब सुन रही थी।
फिर वकील ने एक खत उसे दिया।
कांपते हाथों से सना ने खत खोला।
उसमें लिखा था—
“सना, मुझे नहीं पता तुम गलती से कबीर के जाल में फंसी या मजबूरी में, लेकिन मैं इतना जरूर जानती हूं कि तुम दिल की बुरी नहीं हो।
कबीर सिर्फ खुद से प्यार करता है।
अगर तुम यह खत पढ़ रही हो तो समझ लो मैं इस दुनिया में नहीं हूं।
अब अयान तुम्हारी जिम्मेदारी है।
उसकी जिंदगी बचा लेना…”
सना रो पड़ी।
उसे एहसास हुआ कि जिस औरत से वह शर्मिंदा थी, वही उस पर सबसे ज्यादा भरोसा कर गई।
कबीर गुस्से में चिल्लाया,
“यह सब मैं नहीं मानता!”
वकील ने फाइल खोलते हुए कहा,
“अगर आपने वसीयत के खिलाफ जाने की कोशिश की तो पुलिस केस होगा। माहिरा मैडम ने अपनी दवाओं की रिपोर्ट भी जमा करवाई थी।”
कबीर डर गया।
सना ने धीरे से अपने आंसू पोंछे। इस बार उसकी आंखों में बेबसी नहीं, बल्कि अजीब-सा आत्मविश्वास था। वह सीधी खड़ी हो गई और मजबूत आवाज में बोली—
“मिस्टर कबीर, आज शाम होने से पहले आपको यह घर छोड़ना होगा।”
कबीर गुस्से से तिलमिला उठा। उसने तेज आवाज में कहा—
“तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई कि मुझे मेरे ही घर से निकालो?”
सना ने बिना डरे उसकी आंखों में देखते हुए जवाब दिया—
“यह फैसला मैं अयान की कानूनी गार्जियन होने के नाते ले रही हूं। अब इस घर और अयान की जिम्मेदारी मेरी है… और उसकी सुरक्षा के लिए आपका यहां से जाना जरूरी है।”
कबीर उसे घूरता रह गया।
कुछ देर बाद वह हार कर सोफे पर बैठ गया।
सना अयान को गोद में उठा कर कमरे में चली गई।
अयान मासूमियत से बोला,
“क्या आप मुझे छोड़ कर तो नहीं जाएंगी?”
सना ने उसे सीने से लगा लिया।
“कभी नहीं…”
उस रात पहली बार सना ने आईने में खुद को देखा।
अब वह कमजोर लड़की नहीं रही थी, जो प्यार के झूठे सपनों में खो गई थी।
अब वह एक जिम्मेदार और मजबूत औरत बन चुकी थी।
कुछ दिनों बाद वह अयान को लेकर माहिरा की कब्र पर गई।
कब्र के पास बैठ कर उसने धीमे स्वर में कहा,
“मैं ने बहुत बड़ी गलती की थी… लेकिन अब अयान को कभी अकेला नहीं छोड़ूंगी। यह वादा है।”
हवा का एक ठंडा झोंका उसके चेहरे से टकराया।
ऐसा लगा जैसे माहिरा ने उसे माफ कर दिया हो।

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