बेटे ने पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ दिया, बेटी ने खोला ऐसा राज कि सब दंग रह गए!
“कई बार इंसान अपने सबसे करीबी लोगों पर आँख बंद करके भरोसा कर लेता है। उसे लगता है कि जिन लोगों के लिए उसने पूरी जिंदगी मेहनत की है, वे कभी उसका बुरा नहीं सोच सकते। लेकिन जब लालच रिश्तों से बड़ा हो जाए, तब अपने ही लोग ऐसा घाव दे जाते हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और फिर एक दिन सच सामने आकर हर झूठ का हिसाब बराबर कर देता है...”
रामकिशोर बाबू अपने इलाके में बहुत सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अपने दोनों बच्चों, बेटे विकास और बेटी नंदिनी को अकेले ही बड़ा किया था।
विकास शहर में बड़ा बिजनेस करता था, जबकि नंदिनी अपने पति अमित के साथ दूसरे शहर में रहती थी।
रामकिशोर बाबू हमेशा कहते थे, “मेरे लिए मेरे दोनों बच्चे बराबर हैं। यही मेरी असली दौलत हैं।”
लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी इसी दौलत में से एक उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाला है।
एक दिन विकास अपने पिता के पास आया और बोला, “पापा, अब आपकी उम्र हो गई है। आप अकेले रहते हैं। मेरे साथ मुंबई चलिए। मैं आपकी सेवा करूँगा।”
रामकिशोर बाबू खुश हो गए।
उन्हें लगा कि बेटा सच में उनकी चिंता करता है।
कुछ दिनों बाद वे अपना घर बंद करके विकास के साथ मुंबई चले गए।
शुरू के कुछ दिन सब ठीक चला।
फिर धीरे-धीरे विकास और उसकी पत्नी रश्मि का व्यवहार बदलने लगा।
वे रामकिशोर बाबू को एक कमरे तक सीमित रखने लगे।
खाने के लिए भी समय पर कुछ नहीं देते थे।
अगर वे कुछ पूछ लेते, तो रश्मि चिढ़कर कहती,
“पापा जी, हर समय कुछ न कुछ चाहिए होता है आपको।”
रामकिशोर बाबू चुप रह जाते।
वे नहीं चाहते थे कि बेटे का घर खराब हो।
एक दिन उन्होंने सुना कि विकास किसी से फोन पर कह रहा था,
“बस पापा से साइन करवा लूँ, फिर पुराना घर भी बिक जाएगा।”
यह सुनकर रामकिशोर बाबू का दिल बैठ गया।
उन्हें समझ आ गया कि बेटा उन्हें अपने साथ क्यों लाया है।
उसी रात विकास कुछ कागज लेकर आया।
“पापा, ये बैंक के कागज हैं। साइन कर दीजिए।”
रामकिशोर बाबू ने कागज पढ़ने की कोशिश की।
तो विकास झल्लाकर बोला,
“क्या आपको अपने बेटे पर भरोसा नहीं है?”
रामकिशोर बाबू ने साइन करने से मना कर दिया।
उस दिन के बाद उनका जीवन और कठिन हो गया।
कई बार उन्हें भूखा तक रहना पड़ता।
लेकिन उन्होंने फिर भी किसी से शिकायत नहीं की।
उधर नंदिनी हर हफ्ते पिता से बात करने की कोशिश करती थी।
हर बार विकास कोई न कोई बहाना बना देता।
“पापा सो रहे हैं।”
“पापा मंदिर गए हैं।”
“पापा की तबीयत ठीक नहीं है।”
नंदिनी को अजीब लगता था।
लेकिन उसे कभी सच्चाई का अंदाजा नहीं हुआ।
कुछ महीनों बाद अचानक विकास ने नंदिनी को फोन किया।
“बहन, पापा अब बहुत कमजोर हो गए हैं। ज्यादा बात नहीं कर पाते।”
नंदिनी परेशान हो गई।
उसने कहा, “मैं आकर मिलती हूँ।”
लेकिन विकास ने मना कर दिया।
“अभी मत आओ, डॉक्टर ने आराम करने को कहा है।”
नंदिनी मजबूरी में चुप हो गई।
इधर एक दिन विकास और रश्मि ने एक भयानक फैसला लिया।
उन्होंने रामकिशोर बाबू को एक वृद्धाश्रम के बाहर छोड़ दिया।
जाते-जाते विकास बोला,
“अब यहीं रहिए। हमारे पास आपकी देखभाल का समय नहीं है।”
रामकिशोर बाबू स्तब्ध रह गए।
उनकी आँखों से आँसू बहने लगे।
जिस बेटे के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी लगा दी, वही आज उन्हें बेसहारा छोड़ गया था।
कुछ दिनों बाद सदमे के कारण उनकी याददाश्त कमजोर होने लगी।
उन्हें अपना अतीत धुंधला-धुंधला याद रहने लगा।
उधर नंदिनी को लगातार बेचैनी हो रही थी।
एक दिन उसने अचानक मुंबई जाने का फैसला किया।
वह बिना बताए विकास के घर पहुँच गई।
घर पहुँचते ही उसने पूछा,
“पापा कहाँ हैं?”
विकास घबरा गया।
“वो... वो तीर्थ यात्रा पर गए हैं।”
नंदिनी को पहली बार भाई की बात पर शक हुआ।
उसने कहा,
“तो वीडियो कॉल करा दो।”
विकास ने बहाना बना दिया।
अब नंदिनी को यकीन हो गया कि कुछ न कुछ गलत जरूर है।
वह अगले कई दिनों तक पिता को ढूँढ़ती रही।
फिर एक दिन एक वृद्धाश्रम में कपड़े और दवाइयाँ दान करने पहुँची।
वहाँ एक कोने में बैठे दुबले-पतले बुजुर्ग को देखकर वह रुक गई।
वह चेहरा उसे बहुत परिचित लगा।
नंदिनी धीरे-धीरे उनके पास गई।
“पापा...”
बुजुर्ग ने उसकी तरफ देखा।
लेकिन पहचान नहीं पाए।
नंदिनी की आँखों से आँसू बहने लगे।
वह उनके पैरों में बैठ गई।
“पापा, मैं आपकी नंदिनी हूँ।”
रामकिशोर बाबू उसे खाली नजरों से देखते रहे।
वृद्धाश्रम के संचालक ने कहा,
“बेटी, इन्हें यहाँ कोई छोड़ गया था। तब से यहीं हैं।”
नंदिनी का कलेजा फट गया।
वह पिता को अपने साथ घर ले आई।
फिर उनका इलाज शुरू करवाया।
डॉक्टर ने कहा,
“इनकी याददाश्त सदमे की वजह से प्रभावित हुई है। प्यार और पुराने माहौल से शायद सुधार हो जाए।”
नंदिनी ने पूरी लगन से पिता की सेवा शुरू कर दी।
वह उन्हें पुरानी तस्वीरें दिखाती।
पुराने गाने सुनाती।
बचपन की बातें याद दिलाती।
एक दिन उसने परिवार का पुराना एल्बम खोला।
जैसे ही रामकिशोर बाबू की नजर विकास की तस्वीर पर पड़ी, उनका चेहरा बदल गया।
अचानक उनके हाथ काँपने लगे।
उन्होंने सिर पकड़ लिया।
कुछ देर बाद वे जोर से बोले,
“मुझे वृद्धाश्रम छोड़कर मत जाओ विकास... मैं तुम्हारा बाप हूँ...”
नंदिनी खुशी और दुख दोनों से रो पड़ी।
उसे समझ आ गया कि पिता की याददाश्त लौट रही है।
धीरे-धीरे रामकिशोर बाबू को सब कुछ याद आ गया।
उन्होंने नंदिनी को पूरी सच्चाई बता दी।
नंदिनी का खून खौल उठा।
लेकिन अमित ने उसे समझाया।
“गुस्से से नहीं, सबूत से काम लेना होगा।”
फिर दोनों ने एक योजना बनाई।
नंदिनी ने विकास को फोन किया।
“भैया, पापा के नाम की एक पुरानी जमीन मिली है। उसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। कुछ कागजों पर आपके साइन भी चाहिए।”
यह सुनते ही विकास अगले ही दिन आ गया।
घर पहुँचते ही उसने पूछा,
“कहाँ हैं कागज?”
नंदिनी मुस्कुराई।
“पहले किसी से मिल लो।”
इतना कहकर उसने अंदर से रामकिशोर बाबू को बुला लिया।
पिता को सामने देखकर विकास के चेहरे का रंग उड़ गया।
रश्मि भी डर गई।
रामकिशोर बाबू गुस्से में बोले,
“क्यों बेटा? मुझे तीर्थ यात्रा पर भेजा था या वृद्धाश्रम में?”
विकास के पास कोई जवाब नहीं था।
नंदिनी ने मोबाइल निकाला।
“भैया, सच-सच बता दो। सब रिकॉर्ड हो रहा है।”
डर के मारे विकास टूट गया।
उसने सारी सच्चाई कबूल कर ली।
कैसे उसने पिता को धोखा दिया।
कैसे उन्हें घर बेचने के लिए मजबूर किया।
कैसे उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ दिया।
सब कुछ।
कुछ ही देर बाद पुलिस वहाँ पहुँच गई।
विकास और रश्मि को अपने साथ ले गई।
जाते-जाते विकास रोने लगा।
“पापा, मुझे माफ कर दीजिए।”
रामकिशोर बाबू की आँखों में आँसू थे।
उन्होंने कहा,
“गलती करने वाला हमेशा माफी मांग लेता है बेटा, लेकिन जो भरोसा टूट जाता है, उसे जोड़ना बहुत मुश्किल होता है।”
विकास सिर झुकाकर चला गया।
उसके जाने के बाद रामकिशोर बाबू ने नंदिनी का हाथ पकड़ लिया।
“बेटी, आज मुझे समझ आया कि औलाद बेटा या बेटी नहीं होती... औलाद सिर्फ वह होती है जो मुश्किल समय में साथ खड़ी रहे।”
नंदिनी रोते हुए पिता के गले लग गई।
अमित भी भावुक हो गया।
रामकिशोर बाबू मुस्कुराते हुए बोले,
“भगवान का शुक्र है कि उसने मुझे देर से ही सही, लेकिन सच दिखा दिया।”
घर में लंबे समय बाद सुकून लौट आया था।
और उस दिन सभी ने एक बात अच्छी तरह समझ ली—
रिश्तों की असली कीमत खून से नहीं, निभाने से तय होती है।

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