अधूरा वादा
“क्या मम्मी की तबीयत पहले से खराब थी, अंकल? लेकिन उन्होंने तो मुझे कभी कुछ नहीं बताया। आखिर हुआ क्या है उन्हें?” रितिक ने घबराते हुए पूछा। उसकी आँखों में चिंता साफ दिखाई दे रही थी और उसकी निगाहें बार-बार अपनी माँ के चेहरे पर जा रही थीं।
डॉ. रजत कुछ कहने ही वाले थे कि रागिनी ने उन्हें आँखों से रोक दिया।
“मैं बिल्कुल ठीक हूँ बेटा। बस अचानक चक्कर आ गया था।”
रितिक ने राहत की साँस ली, लेकिन उसके चेहरे पर चिंता अभी भी साफ दिखाई दे रही थी।
उधर प्रिया चुपचाप खड़ी थी। उसका चेहरा भी पीला पड़ गया था। वह बार-बार रागिनी की ओर देख रही थी, जैसे कुछ कहना चाहती हो, लेकिन शब्द नहीं मिल रहे हों।
कुछ देर बाद रितिक और प्रिया कमरे से बाहर चले गए ताकि रागिनी आराम कर सके।
दरवाजा बंद होते ही डॉ. रजत ने गंभीर स्वर में कहा,
“रागिनी, आखिर कब तक सच छिपाओगी?”
रागिनी की आँखों में आँसू भर आए।
“मैं नहीं चाहती कि रितिक को पता चले।”
“लेकिन अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी है।”
रागिनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसकी आँखों के सामने अतीत के पन्ने खुलने लगे।
करीब पच्चीस साल पहले...
रागिनी मेडिकल कॉलेज में पढ़ती थी। वहीं उसकी मुलाकात आदित्य से हुई थी।
आदित्य हँसमुख, समझदार और बेहद ईमानदार युवक था।
दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आ गए।
दोस्ती प्यार में बदल गई।
पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों शादी करना चाहते थे।
लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
आदित्य के पिता एक बड़े उद्योगपति थे और उन्होंने बेटे की शादी अपनी पसंद की लड़की से तय कर दी।
आदित्य ने बहुत विरोध किया, लेकिन परिवार के दबाव के आगे हार गया।
जिस दिन उसकी शादी हुई, उस दिन रागिनी पूरी रात रोती रही।
उसने फैसला कर लिया कि वह कभी शादी नहीं करेगी।
उसके लिए उसका काम ही उसकी दुनिया होगा।
समय बीतता गया।
रागिनी एक सफल डॉक्टर बन गई।
इसी दौरान उसे पता चला कि आदित्य की शादी ज्यादा समय तक नहीं चली।
पत्नी उसे छोड़कर विदेश चली गई थी।
उनकी एक छोटी बेटी थी—प्रिया।
आदित्य ने अकेले ही अपनी बेटी को पालना शुरू किया।
रागिनी ने यह सब सुना तो उसके दिल में पुरानी यादें फिर जाग उठीं, लेकिन उसने कभी आदित्य से संपर्क नहीं किया।
फिर एक दिन खबर आई कि एक सड़क दुर्घटना में आदित्य की मृत्यु हो गई।
यह खबर सुनकर रागिनी टूट गई।
उसे ऐसा लगा जैसे उसने दूसरी बार अपना प्यार खो दिया हो।
उसी दिन उसने मन ही मन एक वादा किया।
अगर कभी मौका मिला तो वह आदित्य की बेटी का ख्याल रखेगी।
लेकिन उसे नहीं पता था कि किस्मत उसके लिए कितना बड़ा खेल तैयार कर रही है।
कमरे के बाहर...
रितिक और प्रिया बैठे थे।
दोनों की नजरें बार-बार कमरे के दरवाजे पर जा रही थीं।
“तुम परेशान मत हो,” प्रिया ने कहा।
“मम्मी ही मेरी पूरी दुनिया हैं,” रितिक बोला।
यह सुनकर प्रिया मुस्कुरा दी।
“और अब मैं भी।”
रितिक हँस पड़ा।
उसी समय रागिनी ने उन्हें अंदर बुला लिया।
प्रिया जैसे ही कमरे में आई, रागिनी की आँखें भर आईं।
उसे लग रहा था जैसे आदित्य उसके सामने खड़ा हो।
प्रिया की मुस्कान बिल्कुल अपने पिता जैसी थी।
“आंटी, क्या अब आप ठीक हैं?” प्रिया ने पूछा।
रागिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“हाँ बेटी।”
‘बेटी’ शब्द सुनकर प्रिया का दिल भर आया।
बचपन में ही उसने अपनी माँ को खो दिया था।
फिर पिता भी चले गए।
किसी ने उसे इतने अपनापन से बेटी कहकर नहीं पुकारा था।
कुछ दिनों बाद...
रितिक और प्रिया की शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं।
घर में खुशियों का माहौल था।
लेकिन रागिनी के मन में एक तूफान चल रहा था।
उसे कई बार लगता कि वह सब सच बता दे।
लेकिन फिर वह रुक जाती।
एक दिन उसने प्रिया को अपने कमरे में बुलाया।
“बेटी, क्या मैं तुमसे एक बात पूछ सकती हूँ?”
“जी आंटी।”
“क्या तुम्हारे पास अपने पापा की कोई तस्वीर है?”
प्रिया मुस्कुरा उठी।
“बहुत सारी हैं।”
उसने मोबाइल निकालकर तस्वीरें दिखानी शुरू कीं।
रागिनी कुछ पल तक तस्वीर को देखती रही। उसकी आँखें नम हो गई थीं।
प्रिया ने हैरानी से पूछा, “आंटी, आप पापा को जानती थीं क्या?”
रागिनी ने धीरे से सिर हिलाया।
“हाँ बेटी... मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह जानती थी।”
“सच?” प्रिया की आँखें आश्चर्य से फैल गईं।
रागिनी ने गहरी साँस ली। जैसे वर्षों से दिल में दबे हुए शब्द बाहर आने का रास्ता तलाश रहे हों।
“तुम्हारे पापा और मैं एक ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ते थे। पहले हमारी दोस्ती हुई और फिर धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। हम दोनों ने साथ मिलकर अपने भविष्य के कई सपने देखे थे।”
प्रिया चुपचाप सुनती रही।
“हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे बेटी। हम शादी भी करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियाँ हमारे खिलाफ थीं। परिवार के दबाव और जिम्मेदारियों के कारण तुम्हारे पापा को एक ऐसा फैसला लेना पड़ा, जिसने हमारी राहें हमेशा के लिए अलग कर दीं।”
रागिनी की आवाज भर्रा गई।
“उस दिन के बाद हम दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें समय भी पूरी तरह मिटा नहीं पाता।”
प्रिया की आँखें भी नम हो गई थीं।
“पापा ने कभी आपके बारे में नहीं बताया।”
रागिनी हल्का-सा मुस्कुराई।
“शायद इसलिए क्योंकि वह अपने परिवार को किसी पुराने दर्द की परछाईं से दूर रखना चाहते थे। तुम्हारे पापा बहुत अच्छे इंसान थे। उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्यों को अपनी खुशियों से ऊपर रखा।”
कुछ पल कमरे में खामोशी छाई रही।
फिर रागिनी ने प्यार से प्रिया का हाथ थाम लिया।
“जब मुझे पता चला कि तुम्हारे पापा इस दुनिया में नहीं रहे, तब मुझे बहुत दुख हुआ। लेकिन आज तुम्हें अपने सामने देखकर ऐसा लग रहा है जैसे उनकी कोई निशानी मेरे जीवन में वापस लौट आई हो।”
यह सुनते ही प्रिया की आँखों से आँसू बह निकले। उसने आगे बढ़कर रागिनी को गले लगा लिया।
रागिनी ने भी उसे अपनी बाँहों में भर लिया। उस पल दोनों के बीच कोई रिश्ता नाम का नहीं था, सिर्फ अपनापन था।
प्रिया ने उत्सुकता से पूछा, “आंटी, एक बात पूछूँ? अगर आप और पापा अलग हो गए थे और आपने शादी नहीं की, तो रितिक...?”
रागिनी हल्का-सा मुस्कुराई। उसने सामने रखी रितिक की तस्वीर की ओर देखा।
“रितिक मेरा बेटा है, लेकिन मेरी कोख से जन्मा नहीं है।”
प्रिया हैरानी से उन्हें देखने लगी।
रागिनी ने कहना जारी रखा,
“आदित्य से बिछड़ने के बाद मैंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई और काम में लगा दिया। मैंने शादी नहीं की। मुझे लगा था कि अब मेरी जिंदगी बस अस्पताल और मरीजों तक ही सीमित रहेगी।”
“फिर एक दिन मैं एक अनाथालय गई। वहाँ एक तीन साल का छोटा-सा बच्चा कोने में चुपचाप बैठा था। उसकी आँखों में न जाने कितना अकेलापन था। पता नहीं क्यों, उसे देखते ही मेरा दिल उसके लिए पिघल गया।”
रागिनी की आँखों में ममता उतर आई।
“मैं उससे मिलने जाती रही। धीरे-धीरे वह मुझसे घुलने-मिलने लगा। एक दिन उसने मेरा हाथ पकड़कर पूछा—‘आप फिर आओगी ना?’ बस उसी पल मैंने फैसला कर लिया कि अब उसे कभी अकेला नहीं छोड़ूँगी।”
“वही बच्चा रितिक था?”
“हाँ बेटी,” रागिनी मुस्कुराई, “मैं उसे अपने घर ले आई। मैंने उसे गोद लिया और उसी दिन से वह मेरी पूरी दुनिया बन गया। मैंने कभी उसे यह महसूस नहीं होने दिया कि वह मेरा जन्मा हुआ बेटा नहीं है।”
प्रिया की आँखें नम हो गईं।
“और सच कहूँ, उसने भी मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं उसकी असली माँ नहीं हूँ।”
रागिनी की आवाज भर्रा गई।
“भगवान ने मुझे जन्म से बेटा नहीं दिया था, लेकिन रितिक के रूप में माँ बनने का सौभाग्य जरूर दे दिया।”
यह सुनकर प्रिया ने आगे बढ़कर रागिनी का हाथ थाम लिया।
“और अब भगवान ने आपको एक बेटी भी दे दी है, माँ।”
रागिनी की आँखों से आँसू बह निकले। उसने प्रिया को गले लगा लिया। वर्षों से खाली पड़ा उसके दिल का एक कोना जैसे आखिर भर गया था।
शादी का दिन आ गया।
रितिक और प्रिया मंडप में बैठे थे।
चारों तरफ खुशियाँ थीं।
रागिनी दूर खड़ी दोनों को देख रही थी।
उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार ये आँसू दुख के नहीं थे।
उसे लग रहा था जैसे वर्षों पहले बिछड़ा हुआ एक रिश्ता आज किसी नए रूप में उसके जीवन में लौट आया है।
फेरे पूरे हुए।
प्रिया ने झुककर रागिनी के पैर छुए।
रागिनी ने उसे गले लगा लिया।
“आज से तुम सिर्फ मेरी बहू नहीं हो।”
“फिर क्या हूँ मैं?” प्रिया ने मुस्कुराकर पूछा।
रागिनी ने उसके माथे को चूम लिया।
“मेरी बेटी।”
यह सुनते ही प्रिया की आँखें भर आईं।
उसी क्षण रागिनी की नजर दीवार पर टंगी आदित्य की तस्वीर पर पड़ी।
तस्वीर में वही पुरानी मुस्कान थी।
रागिनी को लगा जैसे आदित्य कह रहा हो—
“अब मेरा अधूरा वादा पूरा हो गया।”

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