बहू के रूप में मिली बेटी
“कई बार इंसान यह सोच लेता है कि अच्छी बहू वही होती है जो हमेशा सिर झुकाकर चले, धीरे बोले और हर समय परंपराओं के अनुसार व्यवहार करे। उसे लगता है कि आधुनिक सोच और संस्कार एक साथ नहीं चल सकते। लेकिन समय अक्सर यह साबित कर देता है कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों या बोलने के तरीके से नहीं, बल्कि उसके दिल और व्यवहार से होती है।”
सविता जी अपने ड्राइंग रूम में बैठी थीं। सामने उनके पति राघव जी अखबार पढ़ रहे थे। दोनों अपने इकलौते बेटे आर्यन की शादी की बात कर रहे थे।
“आजकल के बच्चों की पसंद भी न जाने कैसी होती है,” सविता जी ने धीरे से कहा।
राघव जी मुस्कुरा दिए, “तुम पहले लड़की से मिल तो लो।”
कुछ दिनों बाद वे लड़की वालों के घर गए। लड़की का नाम था अनन्या।
सविता जी ने मन ही मन एक ऐसी बहू की कल्पना कर रखी थी जो साड़ी पहने, धीरे-धीरे बोले और हर बात में “जी मम्मी जी” कहे।
लेकिन दरवाजा खुला तो सामने जींस और कुर्ती पहने एक लड़की खड़ी थी।
“नमस्ते अंकल, नमस्ते आंटी,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
उसकी मुस्कान बहुत आत्मविश्वास से भरी थी।
थोड़ी देर बाद बातचीत शुरू हुई।
“आप क्या करती हैं बेटा?” सविता जी ने पूछा।
“मैं एक आर्किटेक्ट हूँ आंटी। नई-नई बिल्डिंग्स डिजाइन करती हूँ।”
बात करते समय अनन्या अपने विचार खुलकर रख रही थी। कभी-कभी वह अपने पापा से मजाक भी कर रही थी।
सविता जी को लगा कि यह लड़की उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग है।
घर लौटते समय उन्होंने कहा, “बहुत अच्छी लड़की है, लेकिन बहू जैसी नहीं लगती।”
आर्यन हँस पड़ा।
“माँ, बहू जैसी कोई अलग चीज़ नहीं होती। वह इंसान अच्छी होनी चाहिए।”
कुछ महीनों बाद दोनों की शादी हो गई।
शादी के बाद अनन्या घर आ गई।
सविता जी मन ही मन सोच रही थीं कि अब उन्हें हर बात सिखानी पड़ेगी।
लेकिन अगले ही दिन उनकी सोच बदलने लगी।
जब वे कमरे से बाहर निकलीं तो देखा कि घर एकदम साफ-सुथरा था।
रसोई से नाश्ते की खुशबू आ रही थी।
अनन्या मुस्कुराकर बोली, “मम्मी जी, आज पहली बार आपके लिए नाश्ता बनाया है। अगर अच्छा न लगे तो सच-सच बता दीजिएगा।”
सविता जी ने प्लेट में रखा पोहा चखा।
“बहुत स्वादिष्ट है बेटा।”
अनन्या खिलखिलाकर हँस पड़ी।
“बच गई मैं।”
उसकी वही खुली हँसी पूरे घर में खुशी भर देती थी।
दिन बीतते गए।
अनन्या ऑफिस भी संभालती और घर का भी ध्यान रखती।
उसे हर काम पूरी तरह नहीं आता था।
कई बार रोटियाँ गोल नहीं बनती थीं।
कई बार सब्जी में नमक थोड़ा ज्यादा हो जाता।
लेकिन वह हर गलती पर हँस देती और अगली बार बेहतर करने की कोशिश करती।
धीरे-धीरे सविता जी को उसकी आदत हो गई।
फिर एक दिन अचानक राघव जी बाथरूम में फिसल गए।
उनके पैर में गंभीर चोट आ गई।
डॉक्टर ने कई महीनों तक आराम करने को कहा।
घर का माहौल बदल गया।
सविता जी घबरा गईं।
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।
ऐसे समय में अनन्या सबसे मजबूत बनकर खड़ी हो गई।
सुबह ऑफिस जाने से पहले वह ससुर जी की दवाइयाँ तैयार करती।
दोपहर में फोन करके उनका हाल पूछती।
शाम को लौटकर उनके साथ बैठती।
रात में कई बार उठकर देखती कि उन्हें किसी चीज़ की जरूरत तो नहीं।
एक दिन सविता जी की आँखों में आँसू आ गए।
“बेटा, तुम इतना सब कैसे कर लेती हो?”
अनन्या ने उनका हाथ पकड़ लिया।
“जिस घर ने मुझे बेटी की तरह अपनाया है, उसके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ।”
सविता जी कुछ नहीं बोल पाईं।
उनकी आँखें भर आईं।
कुछ समय बाद राघव जी ठीक हो गए।
घर में फिर से खुशियाँ लौट आईं।
लेकिन सविता जी के दिल में अनन्या के लिए सम्मान और बढ़ गया था।
फिर आया सविता जी का साठवाँ जन्मदिन।
उन्होंने सोचा था कि परिवार के साथ साधारण-सा दिन रहेगा।
लेकिन जैसे ही वे हॉल में पहुँचीं, पूरा कमरा फूलों से सजा हुआ था।
दीवार पर उनकी पुरानी तस्वीरों का सुंदर कोलाज लगा था।
सभी रिश्तेदार मौजूद थे।
सविता जी भावुक हो गईं।
“यह सब किसने किया?”
आर्यन मुस्कुराया।
“माँ, यह पूरा प्लान अनन्या का है।”
तभी अनन्या एक सुंदर डिब्बा लेकर आई।
“हैप्पी बर्थडे मम्मी जी।”
सविता जी ने डिब्बा खोला।
अंदर एक बेहद सुंदर रेशमी साड़ी थी।
बिल्कुल वैसी जैसी वे कई महीनों से दुकान में देखकर पसंद करती थीं, लेकिन कभी खरीदी नहीं थी।
“तुम्हें कैसे पता चला कि मुझे यही पसंद है?” उन्होंने आश्चर्य से पूछा।
अनन्या मुस्कुराई।
“जब भी हम बाजार जाते थे, आपकी नजर इसी साड़ी पर रुक जाती थी। आप खरीदती नहीं थीं, लेकिन देखती जरूर थीं।”
सविता जी की आँखों से आँसू बह निकले।
उन्होंने अनन्या को गले से लगा लिया।
“तुम मेरी बहू नहीं, मेरी बेटी हो।”
अनन्या ने भी उन्हें कसकर पकड़ लिया।
फिर हँसते हुए बोली,
“मम्मी जी, एक बेटी अपनी माँ की छोटी-सी इच्छा भी पहचान लेती है।”
सविता जी ने उसके माथे को चूम लिया।
उस क्षण उन्हें एहसास हुआ कि रिश्ते खून से नहीं, प्रेम और अपनापन से बनते हैं।
और कभी-कभी भगवान बेटी जन्म से नहीं देता, लेकिन बहू के रूप में जरूर भेज देता है।

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