जिसने मुझे अपनाया
"जिस दिन सबने कहा कि मैं इस घर पर बोझ हूँ... उसी दिन मेरे पति ने ऐसा साथ दिया कि मेरी पूरी दुनिया बदल गई।"
सुबह का समय था।
आँगन में हल्की धूप उतर रही थी। घर के बाकी लोग अपने-अपने काम में लगे थे, लेकिन सीमा का मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
उसकी शादी को अभी छह महीने ही हुए थे। यह उसकी पहली हरियाली तीज थी।
वह चुपचाप रसोई में खड़ी चाय बना रही थी। बार-बार उसकी नज़र दरवाज़े की ओर चली जाती।
शायद मायके से कोई आए...
शायद भाई...
शायद पिताजी...
लेकिन दरवाज़ा हर बार किसी और के लिए खुलता और फिर बंद हो जाता।
सास ने धीरे से पूछा, "क्या हुआ बहू? सुबह से बड़ी उदास लग रही हो।"
सीमा मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली, "कुछ नहीं माँजी... बस ऐसे ही।"
लेकिन उसकी आँखें सच बता रही थीं।
रसोई में अकेली होते ही उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।
उसे अपना बचपन याद आने लगा।
माँ का साया बचपन में ही उठ गया था।
कुछ साल बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली।
नई माँ ने कभी उसे अपनाया नहीं।
पिता भी धीरे-धीरे उससे दूर होते चले गए।
घर में हर खुशी पहले सौतेले भाई-बहनों के हिस्से आती और सीमा हमेशा पीछे रह जाती।
कई बार त्योहार पर उसके लिए नए कपड़े तक नहीं आते थे।
वह मन मारकर सब देखती रहती।
जब शादी की बात आई तो पिता ने बिना ज़्यादा सोच-विचार के रिश्ता तय कर दिया।
लोग कहते थे...
"लड़का साधारण है।"
"कमाई भी ज़्यादा नहीं।"
"घर भी छोटा है।"
लेकिन सीमा ने कभी शिकायत नहीं की।
क्योंकि पहली बार उसे ऐसा इंसान मिला था जिसने उसे सम्मान दिया था।
उसके पति अमित एक छोटे स्कूल में शिक्षक थे।
ज़्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन दिल बहुत बड़ा था।
सीमा की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखते।
उसी समय कमरे से आवाज़ आई—
"सीमा... ज़रा इधर आना।"
सीमा जल्दी से आँसू पोंछकर कमरे में पहुँची।
"जी?"
अमित मुस्कुराए और बोले, "आज तुम्हारी पहली तीज है न?"
उन्होंने बिस्तर के नीचे रखा एक छोटा-सा डिब्बा निकाला।
सीमा ने हैरानी से देखा।
डिब्बे में हरे रंग की सुंदर साड़ी, काँच की चूड़ियाँ, बिंदी, पायल और छोटी-सी चाँदी की बिछिया रखी थी।
सीमा की आँखें फैल गईं।
"ये... ये सब?"
अमित हँसते हुए बोले, "ज़्यादा महँगा तो नहीं है... लेकिन अपनी पहली तीज पर मेरी पत्नी किसी से कम नहीं लगेगी।"
सीमा की आँखों से आँसू बह निकले।
"लेकिन आपने तो कहा था कि इस महीने पैसे कम हैं।"
अमित मुस्कुराए।
"हाँ... इसलिए पिछले तीन महीने से रोज़ थोड़ा-थोड़ा बचा रहा था।"
सीमा कुछ बोल ही नहीं पाई।
उसने साड़ी पहन ली।
जब वह तैयार होकर आई तो सचमुच बहुत सुंदर लग रही थी।
अमित उसे देखते ही कुछ पल के लिए चुप रह गए।
फिर मुस्कुराकर बोले,
"लगता है आज चाँद धरती पर उतर आया है।"
सीमा शर्मा गई।
इतने में दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी।
सीमा दौड़कर बाहर गई।
उसे लगा...
शायद मायके से कोई आया होगा।
लेकिन बाहर मोहल्ले की एक बुज़ुर्ग दादी खड़ी थीं।
उन्होंने मुस्कुराकर कहा,
"बेटी, सुना आज तुम्हारी पहली तीज है। सोचा आशीर्वाद देती चलूँ।"
सीमा ने उनके पैर छुए।
दादी ने जाते-जाते कहा,
"बेटी, याद रखना... जिसे अपना मानने वाला पति मिल जाए, उसका मायका कभी सूना नहीं होता।"
ये शब्द सीधे उसके दिल में उतर गए।
शाम को पूजा की तैयारी होने लगी।
सारी महिलाएँ सज-धजकर व्रत की कथा सुन रही थीं।
सीमा भी पूजा की थाली लेकर खड़ी थी।
तभी उसके फोन की घंटी बजी।
स्क्रीन पर लिखा था—
"पापा कॉलिंग..."
सीमा कुछ पल तक फोन को देखती रही।
कई महीनों बाद पिता का फोन आया था।
उसने कॉल उठाई।
उधर से धीमी आवाज़ आई—
"बेटा... कैसी हो?"
सीमा की आँखें भर आईं।
"ठीक हूँ पापा।"
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर पिता बोले,
"आज तेरी पहली तीज है... याद तो सुबह से ही आ रही थी... लेकिन हिम्मत नहीं हुई फोन करने की।"
सीमा कुछ नहीं बोली।
पिता की आवाज़ काँप रही थी।
"बेटा... मैंने ज़िंदगी में बहुत गलतियाँ कीं। तेरे साथ न्याय नहीं कर पाया। अगर हो सके तो... मुझे माफ़ कर देना।"
सीमा की आँखों से आँसू बह निकले।
उसने सिर्फ़ इतना कहा,
"पापा... देर से सही... आपने मुझे याद तो किया। मेरे लिए यही बहुत है।"
फोन कट गया।
अमित उसके पास आए।
"क्या हुआ?"
सीमा मुस्कुराई।
"आज मुझे समझ में आया... रिश्ते खून से नहीं, अपनापन निभाने से बनते हैं।"
अमित ने उसका हाथ थाम लिया।
दोनों साथ में वटवृक्ष के पास पहुँचे।
सीमा ने पूरे मन से पूजा की।
प्रार्थना करते समय उसने भगवान से सिर्फ़ एक ही बात माँगी—
"हर बेटी को ऐसा जीवनसाथी मिले, जो उसके टूटे हुए मन को फिर से जीना सिखा दे।"
उस दिन सीमा को एहसास हुआ कि जीवन की सबसे बड़ी दौलत महँगे गहने या बड़े घर नहीं होते।
सबसे बड़ी दौलत वह इंसान होता है जो बिना किसी स्वार्थ के हर परिस्थिति में आपका हाथ थामे रखे।
शिक्षा:
जिसे सम्मान देने वाला जीवनसाथी मिल जाए, वह जीवन की सबसे बड़ी सौगात है। मायके या ससुराल से बढ़कर वह रिश्ता होता है जहाँ प्रेम, विश्वास और अपनापन हर कमी को भर देते हैं।

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