नेकी का हाथ

 

Emotional Indian family moment showing a woman supporting a domestic worker and a young student’s education.


सीमा रसोई में चाय बना रही थी। गैस पर दूध चढ़ा हुआ था और पास ही नाश्ते की तैयारी चल रही थी। तभी बाहर से किसी के गिरने की आवाज़ आई।


सीमा तुरंत रसोई से बाहर आई।


आँगन में उसकी कामवाली कमला जमीन पर बैठी थी। उसके हाथ से सब्जियों की टोकरी गिर गई थी और सारी सब्जियाँ फर्श पर बिखरी पड़ी थीं।


सीमा ने घबराकर पूछा, “कमला, क्या हुआ? तुम ठीक तो हो?”


कमला ने जल्दी से सब्जियाँ उठानी शुरू कर दीं और बोली, “कुछ नहीं मालकिन, पैर थोड़ा फिसल गया था।”


सीमा ने उसे ध्यान से देखते हुए कहा, “पैर फिसला है या कोई परेशानी तुम्हें अंदर से गिरा रही है?”


कमला के हाथ रुक गए।


उसने सीमा की तरफ देखा, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।


सीमा ने प्यार से पूछा, “क्या बात है कमला? तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि सब ठीक नहीं है।”


कमला ने आँचल से आँखें पोंछीं और बोली, “मालकिन, मुझे आपसे थोड़े पैसे चाहिए।”


सीमा ने पूछा, “कितने?”


कमला ने धीमे स्वर में कहा, “पाँच हजार रुपये।”


सीमा कुछ पल चुप रही।


फिर उसने पूछा, “तुम्हारे घर में कोई परेशानी है?”


कमला ने कहा, “मेरे घर में तो परेशानी हमेशा रहती है मालकिन, लेकिन ये पैसे मेरे लिए नहीं हैं।”


सीमा ने हैरानी से पूछा, “फिर किसके लिए हैं?”


कमला ने सामने वाले छोटे से मकान की तरफ देखते हुए कहा, “शांति के लिए।”


सीमा ने भौंहें सिकोड़कर पूछा, “शांति?”


कमला ने सिर हिलाया।


वह बोली, “उसका बेटा रोहन स्कूल में पढ़ता है। बहुत होशियार बच्चा है। लेकिन उसकी फीस जमा नहीं हुई है। स्कूल वालों ने आखिरी चेतावनी दी है।”


सीमा ने कहा, “लेकिन कमला, तुम खुद अपने बच्चों की फीस बड़ी मुश्किल से भरती हो।”


कमला ने जवाब दिया, “जानती हूँ मालकिन।”


सीमा ने पूछा, “फिर तुम शांति की मदद क्यों करना चाहती हो?”


कमला कुछ क्षण चुप रही।


फिर उसने कहा, “क्योंकि उसने मेरे बुरे वक्त में मेरा साथ दिया था।”


सीमा ने पूछा, “कैसा साथ?”


कमला की आँखें भर आईं।


वह बोली, “जब मेरे पति नहीं रहे थे, तब मेरे पास घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे। मेरे दोनों बच्चे भूखे थे। उसी समय शांति ने अपने घर का राशन मेरे घर भेजा था।”


सीमा चुपचाप सुनती रही।


कमला ने कहा, “उसके घर में भी ज्यादा सामान नहीं था। फिर भी उसने अपने बच्चों की थाली छोटी करके मेरे बच्चों की थाली भर दी थी।”


सीमा की आँखें नम हो गईं।


कमला आगे बोली, “उसने कभी मुझे एहसान नहीं जताया। कभी ये नहीं कहा कि उसने मेरे लिए क्या किया। आज उसके घर में मुसीबत आई है, तो मैं कैसे मुँह फेर लूँ?”


सीमा ने पूछा, “लेकिन पाँच हजार रुपये तुम कहाँ से लौटाओगी?”


कमला हल्की मुस्कान के साथ बोली, “मालकिन, मैं लौटाने के लिए नहीं माँग रही।”


सीमा ने चौंककर पूछा, “फिर?”


कमला ने कहा, “मैं चाहती हूँ कि रोहन की पढ़ाई न रुके।”


सीमा ने कुछ देर उसे देखा।


फिर उसने कहा, “कमला, तुम्हें पता है कि तुम्हारे घर में भी राशन कम है?”


कमला ने सिर झुका लिया।


सीमा ने पूछा, “तुम्हारे बच्चों के लिए इस महीने क्या बचा है?”


कमला ने धीमे से कहा, “थोड़ा आटा और चावल हैं।”


सीमा ने कहा, “और फिर भी तुम दूसरे के बच्चे की फीस भरने के लिए पैसे माँग रही हो?”


कमला ने कहा, “मालकिन, भूख एक दिन सह ली जाएगी, लेकिन अगर रोहन की पढ़ाई छूट गई तो शायद उसका भविष्य कभी वापस नहीं आएगा।”


सीमा के पास कोई जवाब नहीं था।


कुछ देर बाद सीमा ने कहा, “कमला, मैं तुम्हें पैसे उधार नहीं दूँगी।”


कमला का चेहरा उतर गया।


वह बोली, “मालकिन, मुझसे कोई गलती हो गई क्या?”


सीमा ने कहा, “नहीं। लेकिन तुम अकेली क्यों मदद करोगी?”


कमला ने आश्चर्य से पूछा, “मतलब?”


सीमा ने कहा, “चलो शांति के घर।”


कमला घबरा गई।


वह बोली, “नहीं मालकिन, शांति को पता चला तो वह मदद लेने से मना कर देगी।”


सीमा ने कहा, “तो हम उसे बताएँगे ही नहीं कि तुमने उसके लिए पैसे माँगे थे।”


दोनों शांति के घर पहुँचीं।


दरवाजा खुला तो शांति सामने खड़ी थी।


उसके चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे रही थी।


शांति ने पूछा, “कमला, क्या हुआ?”


कमला ने कहा, “कुछ नहीं बहन, सीमा मालकिन तुमसे मिलने आई हैं।”


शांति ने घबराकर सीमा की ओर देखा।


वह बोली, “दीदी, मुझसे कोई गलती हो गई क्या?”


सीमा ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “नहीं शांति। मैं तुम्हारे बेटे रोहन के बारे में बात करने आई हूँ।”


शांति की आँखें तुरंत भर आईं।


वह बोली, “दीदी, मैं जानती हूँ उसकी फीस बाकी है। मैं भर दूँगी। मेरे पति ठीक हो जाएँ, फिर सब संभाल लूँगी।”


सीमा ने कहा, “तुम्हारे पति कब ठीक होंगे?”


शांति चुप हो गई।


उसने धीरे से कहा, “डॉक्टर ने अभी कम से कम दो महीने आराम करने को कहा है।”


सीमा ने पूछा, “और तब तक?”


शांति की आँखों से आँसू निकल पड़े।


वह बोली, “तब तक मैं कुछ भी कर लूँगी। लेकिन अपने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दूँगी।”


सीमा ने कहा, “तुम्हें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।”


शांति ने हैरानी से पूछा, “क्यों?”


सीमा ने कहा, “रोहन की फीस मैं भरूँगी।”


शांति पीछे हट गई।


वह बोली, “नहीं दीदी। मैं किसी से मदद नहीं ले सकती।”


कमला ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “शांति, मदद नहीं ले रही हो। अपने बच्चे की पढ़ाई बचा रही हो।”


शांति ने कमला की तरफ देखा।


कमला ने कहा, “अगर कभी मेरे बच्चों को भूख से बचाने के लिए तुमने अपना हिस्सा दिया था, तो आज मुझे तुम्हारे बेटे की पढ़ाई के लिए अपना हिस्सा देने दो।”


शांति फूट-फूटकर रोने लगी।


लेकिन तभी कमरे के अंदर से रोहन की आवाज़ आई।


“माँ, आप रो क्यों रही हो?”


रोहन बाहर आया।


उसने माँ की आँखों में आँसू देखे और पूछा, “माँ, क्या हुआ?”


शांति कुछ नहीं बोल पाई।


कमला ने रोहन को अपने पास बुलाया और कहा, “बेटा, तुम्हारी पढ़ाई नहीं रुकेगी।”


रोहन ने पूछा, “सच?”


कमला ने कहा, “हाँ।”


रोहन ने सीमा की ओर देखा।


“आंटी, आपने मेरी फीस भरने का फैसला किया है?”


सीमा ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ बेटा।”


रोहन ने धीरे से कहा, “लेकिन मैं आपसे एक बात कहूँ?”


सीमा ने पूछा, “क्या?”


रोहन बोला, “मुझे पैसे नहीं चाहिए।”


सीमा और कमला दोनों हैरान रह गईं।


रोहन ने कहा, “मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए।”


सीमा ने पूछा, “कैसा मौका?”


रोहन ने कहा, “मैं पढ़कर इतना बड़ा आदमी बनना चाहता हूँ कि एक दिन किसी और बच्चे की फीस भर सकूँ।”


कमला की आँखों से आँसू बहने लगे।


लेकिन तभी शांति ने एक ऐसी बात कही, जिसने सीमा को अंदर तक हिला दिया।


शांति बोली, “दीदी... रोहन की फीस की चिंता तो है ही, लेकिन असली परेशानी कुछ और है।”


सीमा ने पूछा, “क्या परेशानी है?”


शांति ने काँपते हुए कहा, “मेरे पति का एक्सीडेंट सिर्फ एक हादसा नहीं था।”


सीमा ने हैरानी से पूछा, “मतलब?”


शांति ने दरवाजे की तरफ देखा और धीमे स्वर में कहा—


“जिस आदमी ने मेरे पति को टक्कर मारी थी... वह अभी तक सामने नहीं आया है।”


कमला का चेहरा सफेद पड़ गया।


सीमा ने पूछा, “तुम क्या कह रही हो?”


शांति ने कहा, “और सबसे बड़ी बात... उस आदमी के बारे में मेरे पति कुछ जानते हैं।”


कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।


रोहन अपनी माँ को देखने लगा।


कमला ने घबराकर पूछा, “क्या जानते हैं?”


शांति ने काँपती आवाज़ में कहा—


“मुझे नहीं पता... लेकिन अस्पताल में होश आने के बाद मेरे पति ने सिर्फ एक नाम लिया था।”


सीमा ने पूछा, “किसका नाम?”


शांति ने जवाब देने से पहले रोहन की ओर देखा।


फिर बोली—


“उन्होंने कहा था... ‘रोहन को उससे दूर रखना।’”


सीमा के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।


क्योंकि अब यह सिर्फ एक गरीब परिवार की आर्थिक परेशानी नहीं थी।


इसके पीछे कोई ऐसा राज था, जो शायद रोहन की पूरी जिंदगी बदल सकता था।



शांति की बात सुनकर सीमा कुछ क्षण तक कुछ नहीं बोल पाई।


कमला ने घबराकर पूछा, “शांति, तुम्हारे पति ने रोहन को उस आदमी से दूर रखने के लिए क्यों कहा था?”


शांति ने कहा, “मुझे नहीं पता कमला।”


सीमा ने पूछा, “तुमने उनसे दोबारा पूछने की कोशिश नहीं की?”


शांति ने कहा, “की थी। लेकिन जैसे ही मैंने उस आदमी का नाम पूछना चाहा, उन्होंने कहा कि अगर मुझे अपने बेटे की चिंता है तो मैं इस मामले में ज्यादा पूछताछ न करूँ।”


कमला ने चिंतित होकर पूछा, “लेकिन अब क्या होगा?”


शांति ने कहा, “मैं भी यही सोच रही हूँ।”


सीमा ने गंभीर स्वर में कहा, “पहले रोहन की पढ़ाई का इंतजाम करते हैं। बाकी बात बाद में देखेंगे।”


लेकिन रोहन सब सुन रहा था।


वह अचानक बोला, “माँ, पिताजी ने मुझसे भी कुछ कहा था।”


शांति ने घबराकर पूछा, “क्या कहा था?”


रोहन बोला, “उन्होंने कहा था कि अगर कोई आदमी मेरे बारे में पूछे तो मैं उसे अपने स्कूल के बारे में कुछ नहीं बताऊँ।”


सीमा और कमला एक-दूसरे को देखने लगीं।


सीमा ने पूछा, “रोहन, तुम्हारे पिताजी ने ये कब कहा था?”


रोहन ने जवाब दिया, “अस्पताल में।”


शांति की आँखें भर आईं।


उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतने दिनों से उसके पति उससे क्या छिपा रहे थे।


अगले दिन सीमा ने रोहन की फीस जमा कर दी।


रोहन को फिर से स्कूल जाने का रास्ता मिल गया।


लेकिन शांति के घर की परेशानी कम नहीं हुई।


कुछ दिनों बाद शांति के पति सुरेश घर लौटे।


सीमा भी उस समय वहाँ मौजूद थी।


सुरेश ने सीमा को देखकर पूछा, “आप कौन हैं?”


शांति ने कहा, “ये सीमा दीदी हैं। इन्होंने रोहन की फीस भरने में हमारी मदद की है।”


सुरेश ने तुरंत कहा, “नहीं। हमें किसी की मदद नहीं चाहिए।”


सीमा ने शांत स्वर में कहा, “आप मुझे गलत समझ रहे हैं। मैंने सिर्फ एक बच्चे की पढ़ाई रुकने से बचाई है।”


सुरेश चुप हो गए।


कुछ देर बाद उन्होंने कहा, “धन्यवाद।”


सीमा ने पूछा, “सुरेश जी, अगर आपको बुरा न लगे तो एक बात पूछूँ?”


सुरेश ने कहा, “पूछिए।”


सीमा ने पूछा, “आपने अस्पताल में रोहन को किसी से दूर रखने की बात क्यों कही थी?”


सुरेश का चेहरा अचानक बदल गया।


शांति ने डरते हुए पूछा, “आपने मुझसे ये बात क्यों छिपाई?”


सुरेश ने कहा, “क्योंकि मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था।”


सीमा ने पूछा, “लेकिन हुआ क्या था?”


सुरेश कुछ देर चुप रहे।


फिर उन्होंने कहा, “मैं जिस कंपनी में काम करता था, वहाँ कुछ लोगों ने गलत तरीके से पैसे निकालने की कोशिश की थी।”


शांति ने पूछा, “इसका आपसे क्या संबंध था?”


सुरेश ने कहा, “मुझे उस बात का पता चल गया था।”


सीमा ने गंभीरता से पूछा, “और?”


सुरेश बोले, “मैंने अपने अधिकारी को इसकी जानकारी दे दी थी।”


शांति ने घबराकर पूछा, “क्या उसी वजह से आपका एक्सीडेंट हुआ?”


सुरेश ने सीधा जवाब नहीं दिया।


उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता।”


कमला ने पूछा, “लेकिन आपने रोहन को क्यों खतरे में बताया?”


सुरेश ने रोहन की तरफ देखा।


फिर बोले, “क्योंकि उन लोगों में से एक आदमी कई बार रोहन के स्कूल के आसपास दिखाई दिया था।”


शांति के हाथ काँपने लगे।


वह बोली, “आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”


सुरेश ने कहा, “मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था।”


सीमा ने कहा, “अब आपको डरकर चुप रहने की जरूरत नहीं है। जो भी सच है, उसे सही लोगों तक पहुँचाना जरूरी है।”


सुरेश ने सिर हिलाया।


लेकिन उसी रात एक और घटना हुई।


रोहन स्कूल से घर लौट रहा था।


गली के मोड़ पर एक अनजान आदमी उसके सामने आकर खड़ा हो गया।


उसने पूछा, “तुम रोहन हो?”


रोहन डर गया।


उसने कोई जवाब नहीं दिया।


आदमी ने कहा, “तुम्हारे पिताजी ने मेरे बारे में कुछ बताया है?”


रोहन पीछे हट गया।


तभी दूर से कमला की आवाज़ आई।


“रोहन!”


वह सब्जियों की टोकरी लेकर उसी रास्ते से आ रही थी।


आदमी तुरंत वहाँ से चला गया।


कमला ने रोहन के पास जाकर पूछा, “बेटा, कौन था वो?”


रोहन ने काँपते हुए कहा, “मुझे नहीं पता।”


कमला उसे लेकर सीधे शांति के घर पहुँची।


शांति ने जब पूरी बात सुनी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।


उसने तुरंत सीमा को फोन किया।


सीमा ने कहा, “शांति, घबराना मत। रोहन अभी सुरक्षित है।”


शांति बोली, “दीदी, मुझे डर लग रहा है।”


सीमा ने कहा, “डरने से बात नहीं बनेगी। अब हमें सच सामने लाना होगा।”


अगले दिन सुरेश ने अपनी कंपनी के पुराने दस्तावेज़ सीमा को दिखाए।


उनमें एक ऐसा नाम था, जिसे देखकर सीमा चौंक गई।


वही नाम उसने कई साल पहले अपने पति के कारोबार से जुड़े एक मामले में भी सुना था।


सीमा ने सुरेश से पूछा, “आप इस आदमी को पहले से जानते हैं?”


सुरेश ने कहा, “नहीं। लेकिन लगता है यह बहुत बड़े लोगों के संपर्क में है।”


सीमा ने कहा, “तो मामला सिर्फ आपके परिवार तक सीमित नहीं है।”


सुरेश ने कहा, “मुझे भी यही डर है।”


लेकिन उसी समय रोहन कमरे में आया।


उसके हाथ में एक पुराना लिफाफा था।


उसने कहा, “पिताजी, ये मुझे आपके पुराने बैग से मिला।”


सुरेश ने लिफाफा खोला।


अंदर एक तस्वीर थी।


तस्वीर में सुरेश के साथ एक और आदमी खड़ा था।


शांति ने तस्वीर देखते ही कहा, “ये तो...”


सुरेश ने पूछा, “तुम इसे जानती हो?”


शांति ने काँपते हुए कहा, “हाँ।”


सीमा ने पूछा, “कौन है?”


शांति ने कहा—


“ये वही आदमी है जिसने मेरे पति को हादसे से कुछ दिन पहले हमारे घर आकर धमकाया था।”


कमरे में सन्नाटा छा गया।


लेकिन तस्वीर के पीछे लिखे कुछ शब्दों ने सबको और भी ज्यादा चौंका दिया।


वहाँ लिखा था—


“अगर सच बाहर आया, तो अगला निशाना रोहन होगा।”


शांति ने अपने बेटे को तुरंत गले लगा लिया।


कमला की आँखों में आँसू आ गए।


सीमा ने दृढ़ आवाज़ में कहा, “अब हम चुप नहीं बैठेंगे।”


सुरेश ने कहा, “लेकिन मेरे पास कोई सबूत नहीं है।”


तभी कमला ने कहा, “सबूत शायद है।”


सबने उसकी ओर देखा।


सीमा ने पूछा, “तुम्हें क्या पता है?”


कमला ने काँपती आवाज़ में कहा—


“जिस आदमी की तस्वीर है... मैंने उसे पहले भी देखा है।”


सुरेश ने पूछा, “कहाँ?”


कमला ने जवाब दिया—


“वह कई बार सीमा मालकिन के घर के बाहर भी खड़ा रहता था।”


सीमा का चेहरा पीला पड़ गया।


उसे अचानक याद आया कि कुछ दिनों से एक अनजान आदमी उसकी गली के बाहर खड़ा दिखाई देता था।


अब उसे समझ आया कि शायद वह संयोग नहीं था।


लेकिन तभी कमला ने अपनी बात पूरी की।


उसने कहा—


“और मालकिन... मैंने उसे एक बार आपके घर के अंदर भी देखा था।”


सीमा ने हैरानी से पूछा, “मेरे घर के अंदर?”


कमला ने सिर हिलाया।


“हाँ।”


सीमा ने पूछा, “कब?”


कमला ने कहा—


“जिस दिन आपने मुझे पहली बार शांति की मदद के लिए पैसे देने की बात कही थी... उसी दिन।”


सीमा ने डरते हुए पूछा, “लेकिन उस दिन घर में मेरे अलावा कोई नहीं था।”


कमला ने धीरे से कहा—


“मालकिन, वह आदमी घर के अंदर नहीं आया था।”


“वह आपके घर की खिड़की के बाहर खड़ा था।”


सभी चुप हो गए।


अब मामला बहुत गंभीर हो चुका था।


और अगले दिन जो होने वाला था, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।



अगले दिन सीमा ने अपने पति से पूरी बात बताई।


उन्होंने तुरंत सुरेश से संपर्क किया और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाई।


जाँच शुरू हुई।


कुछ दिनों तक परिवार तनाव में रहा।


शांति हर छोटी आवाज़ पर डर जाती।


रोहन स्कूल से लौटता तो कमला उसे खुद घर तक छोड़कर आती।


सीमा भी रोज़ शांति का हाल पूछती।


लेकिन इस बीच एक बात कमला को अंदर से परेशान कर रही थी।


एक दिन सीमा ने उससे पूछा, “कमला, तुम इतनी चुप क्यों हो?”


कमला ने कहा, “मालकिन, मुझे आपसे एक बात कहनी है।”


सीमा ने पूछा, “क्या बात है?”


कमला ने काँपते हुए कहा, “जिस आदमी की तस्वीर हमने देखी थी... मैंने उसे सिर्फ आपके घर के बाहर नहीं देखा था।”


सीमा ने पूछा, “फिर कहाँ देखा था?”


कमला की आँखों से आँसू निकल आए।


वह बोली, “मैंने उसे उस रात भी देखा था, जब सुरेश जी का एक्सीडेंट हुआ था।”


सीमा ने हैरानी से पूछा, “तुम वहाँ थीं?”


कमला ने सिर झुका लिया।


“हाँ मालकिन।”


सीमा ने पूछा, “फिर तुमने किसी को बताया क्यों नहीं?”


कमला रोते हुए बोली, “क्योंकि मैं डर गई थी।”


सीमा ने पूछा, “तुमने क्या देखा था?”


कमला ने कहा, “मैं अस्पताल के पास से गुजर रही थी। मैंने वही आदमी सुरेश जी के पास खड़े देखा था।”


सीमा ने पूछा, “उसने क्या किया?”


कमला ने कहा, “वह सुरेश जी से कुछ कह रहा था। फिर उसने उनका बैग उठाया और वहाँ से चला गया।”


सीमा ने पूछा, “तुमने उसे रोका क्यों नहीं?”


कमला फूट पड़ी।


वह बोली, “मालकिन, मैं डर गई थी। मैं गरीब हूँ। मेरे दो बच्चे हैं। मुझे लगा अगर मैंने किसी को बताया तो मेरे बच्चों को नुकसान हो सकता है।”


सीमा ने उसका हाथ पकड़ लिया।


उसने कहा, “तुमने गलत नहीं किया। डर जाना इंसानी कमजोरी है।”


कमला बोली, “लेकिन अगर मैंने उसी दिन बता दिया होता तो शायद...”


सीमा ने उसे रोकते हुए कहा, “खुद को दोष मत दो।”


लेकिन तभी कमला ने अपनी मुट्ठी खोली।


उसमें एक छोटी-सी धातु की चाबी थी।


सीमा ने पूछा, “ये क्या है?”


कमला ने कहा, “उस रात जब वह आदमी सुरेश जी का बैग लेकर जा रहा था, उसके हाथ से ये चाबी गिर गई थी।”


सीमा ने चाबी को ध्यान से देखा।


उस पर एक नंबर लिखा था।


सुरेश को चाबी दिखाई गई।


उन्होंने तुरंत कहा, “ये हमारे ऑफिस के पुराने रिकॉर्ड रूम की चाबी है।”


सब कुछ जैसे अचानक जुड़ने लगा।


सुरेश ने अधिकारियों को यह जानकारी दी।


जाँच में पता चला कि उसी रिकॉर्ड रूम में कंपनी के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ रखे थे।


उन दस्तावेज़ों में ऐसे सबूत मौजूद थे, जो कई लोगों की गलत गतिविधियों को सामने ला सकते थे।


अब सुरेश की बात पर विश्वास होने लगा।


मामला आगे बढ़ा।


कुछ समय बाद संबंधित लोगों पर कार्रवाई शुरू हुई।


शांति का डर धीरे-धीरे कम होने लगा।


लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बात ने सीमा के दिल को सबसे ज्यादा छुआ।


एक दिन वह कमला के घर पहुँची।


कमला के घर में राशन बहुत कम था।


सीमा ने पूछा, “कमला, तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि घर में राशन खत्म हो गया है?”


कमला ने मुस्कुराकर कहा, “मालकिन, अभी तो शांति का घर संभल गया है। मेरे घर की चिंता मत करो।”


सीमा की आँखें भर आईं।


उसने पूछा, “तुम हर बार दूसरों की चिंता क्यों करती हो?”


कमला ने कहा, “शायद इसलिए कि जब मेरा घर टूट रहा था, तब किसी ने मेरा हाथ पकड़ा था।”


सीमा ने पूछा, “किसने?”


कमला ने कहा, “मेरी माँ ने।”


सीमा चुप रही।


कमला ने बताया, “मेरी माँ कहा करती थीं कि बेटा, जिंदगी में इतना जरूर कमाना कि जब किसी की जरूरत हो तो उसके सामने हाथ फैलाने की बजाय उसका हाथ पकड़ सको।”


सीमा ने कहा, “तुम्हारी माँ ने तुम्हें बहुत बड़ी दौलत दी थी।”


कमला मुस्कुराई।


“हाँ मालकिन। पैसा नहीं दिया था, लेकिन इंसानियत दे गई थीं।”


कुछ महीने बाद रोहन ने अपनी परीक्षा में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया।


शांति खुशी से रो रही थी।


सुरेश की आँखों में भी आँसू थे।


सीमा ने रोहन को गले लगाकर कहा, “मुझे तुम पर बहुत गर्व है।”


रोहन ने कहा, “आंटी, मैं आपको कुछ देना चाहता हूँ।”


सीमा ने हँसकर पूछा, “क्या?”


रोहन ने अपनी कॉपी से एक छोटा-सा कागज निकाला।


उस पर लिखा था—


“जब मैं बड़ा होऊँगा, मैं कमला आंटी जैसा इंसान बनूँगा।”


सीमा ने कागज पढ़ा और उसकी आँखें भर आईं।


उसने पूछा, “तुमने कमला का नाम क्यों लिखा?”


रोहन ने कहा, “क्योंकि जब सब लोग अपने घर बचाने में लगे थे, तब कमला आंटी ने मेरा भविष्य बचाने की कोशिश की थी।”


कमला वहीं खड़ी थी।


उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।


वह बोली, “बेटा, मैंने कुछ नहीं किया।”


रोहन ने कहा, “आपने बहुत कुछ किया है।”


फिर रोहन ने अपनी जेब से एक छोटा-सा लिफाफा निकाला।


उसने कमला को देते हुए कहा, “ये आपके लिए है।”


कमला ने पूछा, “इसमें क्या है?”


रोहन ने कहा, “मेरी पहली छात्रवृत्ति की रकम में से मैंने आपके लिए थोड़ा बचाया है।”


कमला ने तुरंत लिफाफा वापस कर दिया।


वह बोली, “नहीं बेटा। ये पैसे तुम्हारी पढ़ाई के हैं।”


रोहन ने कहा, “आंटी, आपने मुझे सिखाया था कि जरूरत के समय किसी का साथ छोड़ना नहीं चाहिए।”


कमला चुप हो गई।


रोहन ने कहा, “आज पहली बार मुझे मौका मिला है कि मैं आपकी मदद कर सकूँ।”


कमला ने उसे गले से लगा लिया।


वह रोते हुए बोली, “आज मुझे लगता है कि मेरी सारी मेहनत सफल हो गई।”


सीमा भी भावुक हो गई।


शांति ने कमला का हाथ पकड़कर कहा, “बहन, उस दिन तुमने मेरे बेटे की पढ़ाई बचाने की सोची थी। आज देखो, वही बेटा तुम्हारा सम्मान बचाने के लिए खड़ा है।”


कमला ने कहा, “मैंने तो बस एक बच्चे की मदद की थी।”


सीमा ने मुस्कुराकर कहा, “नहीं कमला। तुमने एक बच्चे की जिंदगी में उम्मीद बोई थी।”


फिर सीमा ने शांति की ओर देखा और कहा, “और शांति, तुमने कभी कमला की मदद की थी। उसी मदद ने आज इतने सारे रिश्ते बना दिए।”


शांति की आँखों में आँसू आ गए।


वह बोली, “शायद यही इंसानियत का रास्ता है। हम किसी की मदद करते हैं और हमें पता भी नहीं होता कि वह मदद आगे चलकर कितनी जिंदगियाँ बदल देगी।”


रोहन ने कहा, “मैं भी यही करूँगा।”


सीमा ने पूछा, “क्या?”


रोहन ने मुस्कुराकर कहा, “जब भी मुझे मौका मिलेगा, मैं किसी न किसी की मदद करूँगा।”


कमला ने उसके सिर पर हाथ रखा।


“बस बेटा, यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”


कुछ देर बाद सीमा ने कमला से कहा, “तुमने उस दिन पाँच हजार रुपये माँगे थे।”


कमला मुस्कुराई।


“हाँ मालकिन।”


सीमा ने कहा, “लेकिन बदले में तुमने हमें उससे कहीं ज्यादा दे दिया।”


कमला ने पूछा, “मैंने क्या दिया?”


सीमा ने कहा, “मुझे इंसानियत पर और ज्यादा भरोसा दिया।”


शांति ने कहा, “मुझे उम्मीद दी।”


सुरेश ने कहा, “मेरे परिवार को सहारा दिया।”


और रोहन ने मुस्कुराकर कहा—


“और मुझे एक ऐसा इंसान बनने की वजह दी, जिस पर किसी दिन किसी और को गर्व हो सके।”


कमला की आँखें फिर भर आईं।


उसने दोनों हाथ जोड़कर ऊपर देखा और धीरे से कहा—


“माँ, आपने कहा था ना कि किसी का हाथ पकड़ना सीखना... आज समझ आया कि आपका दिया संस्कार कभी खाली नहीं जाता।”


सीमा ने कमला को गले लगा लिया।


उस पल किसी के पास बड़ी गाड़ी नहीं थी।


किसी के पास बहुत पैसा नहीं था।


किसी के पास बड़ा मकान नहीं था।


लेकिन उन सबके पास एक-दूसरे के लिए दिल था।


और शायद यही सबसे बड़ी दौलत थी।


सीख:

किसी की मदद कभी छोटी नहीं होती। एक छोटी-सी नेकी किसी के जीवन में उम्मीद जगा सकती है, और वही उम्मीद आगे चलकर कई और लोगों की जिंदगी बदल सकती है। इसलिए अगर आपके पास किसी को देने के लिए बहुत कुछ नहीं है, तो भी अपना समय, अपना सहारा, अपने शब्द और अपना साथ जरूर दीजिए।


क्योंकि कभी-कभी किसी इंसान को पैसे से ज्यादा यह विश्वास चाहिए होता है कि मुश्किल समय में कोई उसका हाथ पकड़ने वाला भी है।



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