अब और नहीं

 

Young man holding a red rakhi thread in a hospital corridor at night, looking emotional under bright white lights.


रात के लगभग साढ़े दस बजे थे।

अजय अपने कमरे में लैपटॉप बंद करने ही वाला था कि फोन बज उठा।


“हेलो?”


दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज़ आई —

“जल्दी से जिला अस्पताल आ जाइए। आपकी बहन कविता की तबीयत बहुत खराब है।”


अजय का दिल धक से रह गया।

“क्या हुआ उसे?”


“वो… जल गई है…”


फोन कट गया।


अजय और उसके माता-पिता भागते हुए अस्पताल पहुँचे।

इमरजेंसी वार्ड के बाहर भीड़ लगी थी।


अजय ने डॉक्टर से पूछा —

“मेरी बहन कविता…?”


डॉक्टर ने गंभीर आवाज़ में कहा —

“हमने पूरी कोशिश की… लेकिन बहुत देर से लाए थे। 80 प्रतिशत शरीर जल चुका था।”


माँ वहीं जमीन पर बैठ गईं।

“हे भगवान! मेरी बच्ची…”


पिता दीवार पकड़कर खड़े रह गए।

अजय को लगा जैसे उसके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई हो।


सच्चाई सामने आई...


थोड़ी देर बाद एक नर्स ने धीरे से कहा —

“यह दहेज का मामला लग रहा है। पड़ोसियों ने बताया, कई महीनों से घर में झगड़े होते थे।”


अजय को अचानक सब याद आने लगा।


कुछ महीने पहले कविता मायके आई थी।

उसने हाथ की जलन दिखाते हुए कहा था —

“भैया, गैस पर हाथ लग गया…”


लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं।


उसने माँ से भी कहा था —

“माँ, सासू माँ और रवि मुझसे हमेशा पैसे की बात करते हैं।”


माँ ने समझाया था —

“बेटी, शादी के बाद थोड़ा बहुत सहना पड़ता है। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।”


पिता ने भी कहा था —

“हमने जितना बन पड़ा दिया है। अब ज्यादा मांगें तो कैसे दें? तुम समझदारी से काम लो।”


कविता चुप हो गई थी।


राखी का धागा...


अजय को याद आया —

राखी पर कविता ने उसकी कलाई पकड़कर कहा था,

“भैया, हमेशा साथ देना।”


अजय ने हंसकर कहा था,

“अरे पगली, तू तो बहुत बहादुर है।”


आज वही राखी उसकी जेब में थी।


वह फूट-फूट कर रो पड़ा —

“दीदी, तुमने इशारे दिए थे… हमने समझा ही नहीं। हम क्यों चुप रहे?”


पड़ोसियों की गवाही...


अस्पताल में दो पड़ोसी भी आए थे।

उन्होंने बताया —

“कल रात भी घर में झगड़ा हुआ था। दहेज में कार की मांग कर रहे थे। जब लड़की के घरवालों ने मना किया, तो…”


आगे की बात सुनने की हिम्मत किसी में नहीं थी।


पिता का पछतावा...


पिता ने सिर पकड़ लिया।

“मैंने सोचा था शादी कर दी, जिम्मेदारी पूरी हो गई। बेटी की पढ़ाई भी अधूरी छोड़ दी… अगर उसे पढ़ने दिया होता, तो वह अपने पैरों पर खड़ी होती।”


माँ रोते हुए बोलीं —

“मेरी बच्ची कई बार फोन पर रोती थी। मैं ही समझाती रही — ‘सब ठीक हो जाएगा।’ मैंने उसकी बात क्यों नहीं मानी?”


फैसला...


अजय ने आँसू पोंछे।

उसकी आवाज़ अब मजबूत थी।


“अब और नहीं। दीदी के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए।”


वह सीधे पुलिस थाने गया।

पूरा बयान दिया।


कविता के ससुराल वालों पर दहेज हत्या का मामला दर्ज हुआ।


घर में एक और बेटी...


घर में अजय की छोटी बहन नेहा भी थी।


अजय ने उसकी तरफ देखा और कहा —

“नेहा, तुम्हारी पढ़ाई कभी नहीं रुकेगी। जब तक तुम अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो जाओगी, शादी की बात भी नहीं होगी।”


पिता ने सिर हिलाया —

“अब हमें समझ आ गया है। बेटी बोझ नहीं होती। उसकी आवाज़ सबसे जरूरी होती है।”


कविता तो चली गई।

लेकिन उसकी कहानी ने घर बदल दिया।


माँ अब हर लड़की से कहतीं —

“अगर कुछ गलत लगे, तो चुप मत रहना। माँ-बाप से छुपाना मत।”


अजय हर राखी पर अपनी कलाई देखता और मन में कहता —

“इस बार मैं सच में रक्षा करूँगा… हर उस बहन की, जिसकी आवाज़ दबा दी जाती है।”



संदेश:

दहेज एक अपराध है।

बेटियों की बात सुनिए।

उन्हें पढ़ाइए, मजबूत बनाइए, और कभी भी अन्याय सहने की सलाह मत दीजिए।





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