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रसोई की खुशबू

April 18, 2026
सुबह के करीब साढ़े छह बजे होंगे। खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही थी और बाहर गली में दूध वाले की साइकिल की घंटी सुनाई दे रही थी। मीना जी धीरे-...Read More

जिसे बोझ समझा था

April 17, 2026
  बारिश थम चुकी थी, लेकिन छत से टपकती बूंदों की आवाज़ अभी भी घर में गूंज रही थी। अमित दरवाज़े के पास खड़ा जूते पहन रहा था और बार-बार घड़ी दे...Read More

रिश्तों की असली पूंजी

April 15, 2026
  दोपहर की हल्की धूप आँगन में फैली हुई थी। घर के बाहर नीम के पेड़ के नीचे चारपाई पर बैठी सीमा चुपचाप सब्ज़ी काट रही थी, लेकिन उसका मन कहीं औ...Read More

जब खालीपन बोलने लगा

April 14, 2026
  खिड़की के पास रखी कुर्सी पर बैठी कमला अपने हाथों की रेखाओं को बार-बार देख रही थी। जैसे उन रेखाओं में बीते सालों को पढ़ने की कोशिश कर रही ह...Read More

अपनी हद जानना जरूरी है

April 13, 2026
  आँगन में रखे पुराने सोफे पर बैठी मीना अपने हाथों में खर्चों की कॉपी पकड़े कुछ जोड़-घटाव कर रही थी। पेंसिल बार-बार रुक जाती, जैसे हर हिसाब ...Read More

छोटी सी इच्छा…

April 11, 2026
  राधा जी रसोई में खड़ी जल्दी-जल्दी काम निपटा रही थीं। उनके चेहरे पर हल्की थकान साफ झलक रही थी, लेकिन हाथ लगातार चलते जा रहे थे। तभी उनकी बह...Read More
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