आख़िरी सहारा

April 17, 2026
  शांति देवी चुपचाप चाय बना रही थीं। उनके हाथ हल्के-हल्के कांप रहे थे, लेकिन आदत ऐसी थी कि काम रुकता नहीं था। उधर कमरे में रामकिशन जी खांसते...Read More

जिसे बोझ समझा था

April 17, 2026
  बारिश थम चुकी थी, लेकिन छत से टपकती बूंदों की आवाज़ अभी भी घर में गूंज रही थी। अमित दरवाज़े के पास खड़ा जूते पहन रहा था और बार-बार घड़ी दे...Read More

अपनों का स्थान

April 16, 2026
  नेहा सोफे पर बैठी मोबाइल चला रही थी, पर उसकी नज़र बार-बार घड़ी पर जा रही थी। “ओह! अभी तक खाना तैयार नहीं हुआ…” उसने झुंझलाकर कहा। रसोई में...Read More

रिश्तों की असली गर्माहट

April 16, 2026
  सुबह के करीब साढ़े छह बजे होंगे। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन रसोई के अंदर चूल्हे की गर्मी से माहौल अलग ही था। नीलम चुपचाप रसोई मे...Read More

मां का सहारा

April 16, 2026
  उस दिन न जाने क्यों मन बहुत बेचैन था… रात के करीब साढ़े दस बजे होंगे। सारे काम निपटाकर जैसे ही मैं बिस्तर पर लेटी, शरीर तो थक कर चूर हो चु...Read More

स्वाद से बढ़कर अपनापन

April 16, 2026
  शाम का समय था। घर की बालकनी में हल्की हवा चल रही थी। राधिका रसोई में खड़ी सब्ज़ी काट रही थी, और पीछे धीमी आवाज़ में रेडियो बज रहा था। शादी...Read More

संस्कारों की असली पहचान

April 16, 2026
  “दीदी, सच बताऊँ… मुझे समझ नहीं आता कि आपने इस लड़की में ऐसा क्या देख लिया…” कांच की मेज पर रखे चाय के कप को हल्का सा सरकाते हुए निधि ने अप...Read More
Powered by Blogger.