आत्मसम्मान की कीमत

March 28, 2026
  शाम का समय था। हल्की हवा खिड़की के पर्दों को हिला रही थी और कमरे में एक सुकून भरा माहौल था। लेकिन इस सुकून के बीच नंदिता का दिल तेज़ी से ध...Read More

जब बहू बेटी बन गई…

March 28, 2026
  घर के अंदर सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन हवा में एक अनकहा सा तनाव हमेशा तैरता रहता था। रचना रसोई में खड़ी चाय बना रही थी। ऑफिस से लौटकर...Read More

अपनापन का दीप

March 27, 2026
  शाम ढल चुकी थी। हल्की ठंडक के साथ गली में पीली रोशनी फैल रही थी। ऑफिस से लौटते-लौटते रोहित को आज भी देर हो गई थी। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोल...Read More

माँ का सहारा

March 27, 2026
  बरसात के बाद की ठंडी सुबह थी। आँगन में भीगी मिट्टी की खुशबू फैली हुई थी। पूजा अपने कमरे में चुपचाप बैठी थी, हाथ में अपने पापा की पुरानी घड...Read More

अधूरी राहों का मिलन

March 27, 2026
  शाम का समय था। आसमान हल्का गुलाबी हो गया था और शहर की सड़कें धीरे-धीरे रोशनी से भरने लगी थीं। ऑफिस से लौटते हुए नंदिनी मेट्रो स्टेशन की सी...Read More

चुप्पी की कीमत

March 27, 2026
  बरसात की हल्की फुहारें खिड़की पर पड़ रही थीं। घर के अंदर चूल्हे की आँच और बर्तनों की खनक के बीच रीना सुबह से ही काम में लगी हुई थी। रीना इ...Read More
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