शाम का समय था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी और खिड़की के शीशों पर गिरती बूंदें जैसे किसी अनकही कहानी की आवाज़ बन गई थीं। अंदर कमरे में दीपक लै...Read More
सर्दियों की हल्की धूप आँगन में बिखरी हुई थी। हवा में ठंडक तो थी, लेकिन धूप में बैठने का अपना ही मज़ा था। सीमा ने जल्दी-जल्दी घर का काम निपटा...Read More
घर में हलचल थी, क्योंकि अगले दिन एक बड़ा धार्मिक कार्यक्रम रखा गया था। रिश्तेदारों के आने की तैयारी चल रही थी। रसोई में खड़ी थी संध्या—घर की...Read More