खाली समय का बोझ

April 09, 2026
रसोई से आती हल्की-हल्की मसालों की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी, लेकिन उस खुशबू में अब वह अपनापन नहीं था जो कभी इस घर की पहचान हुआ करता था। ड...Read More

मीठे शब्द, कड़वा सच

April 08, 2026
  “तुम्हें क्या लगता है, जो सबसे मीठा बोलता है वही सबसे अपना होता है?” सीमा ने आईने में खुद को देखते हुए यह सवाल खुद से ही पूछा, लेकिन जवाब ...Read More

खाली आँगन का फैसला

April 08, 2026
दरवाज़े के पास रखी छोटी सी झूले वाली कुर्सी कई महीनों से वैसे ही पड़ी थी। हर आने-जाने वाला उसे देखकर एक ही बात कहता— “अरे, अब तो इसमें नन्हा...Read More

सोच का आईना

April 08, 2026
  सुबह का समय था, लेकिन घर में शांति नहीं, बल्कि हल्की-हल्की भागदौड़ थी। अनु किचन में खड़ी थी। एक हाथ से पराठे सेंक रही थी, दूसरे हाथ से टिफ...Read More

मीठे शब्दों का सच

April 07, 2026
  घर के दरवाज़े पर खड़ी अनु के हाथ हल्के-हल्के कांप रहे थे। नई ज़िंदगी की शुरुआत थी और दिल में ढेर सारे सपने भी। जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, ...Read More

भरोसे की डोर

April 07, 2026
  सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। पूजा अपने दोनों बच्चों को तैयार कर रही थी। चेहरे पर थकान थी, लेकिन बच्चों के सामने उसने मुस्कान...Read More
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