सच की कीमत May 05, 2026 घर के आँगन में आज अजीब सी खामोशी थी। दीवारें वही थीं, लोग वही थे, लेकिन रिश्तों की गर्माहट जैसे कहीं खो गई थी। रवि कुर्सी पर बैठा चुपचाप स...Read More
जिस दिन मैंने अपना फैसला खुद लिखा May 05, 2026 शाम ढल रही थी। आसमान हल्का बैंगनी हो गया था, और हवा में ठंडक घुलने लगी थी। लेकिन पूजा के मन में जैसे आग जल रही थी। वो आँगन में खड़ी थी, हा...Read More
रिश्ते भी रहें, मैं भी रहूँ May 04, 2026 आँगन में हल्की हवा चल रही थी, और घर के अंदर कामकाज की धीमी आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं रसोई में खड़ी सब्ज़ी काट रही थी कि तभी दरवाज़े पर हल्...Read More
दूसरी सुबह May 04, 2026 संध्या का समय था। हल्की-हल्की धूप अब ढलने लगी थी और आँगन में एक शांत सा सन्नाटा पसरा हुआ था। घर के अंदर एक अजीब-सी वीरानी थी। रामप्रसाद जी...Read More
रिश्तों की असली कीमत May 03, 2026गांव के एक छोटे से कच्चे घर में जन्मी थी किरण। घर में गरीबी थी, लेकिन प्यार की कोई कमी नहीं थी। उसके पिता रामू खेतों में मजदूरी करते थे और म...Read More
घर का असली सम्मान May 03, 2026 दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयाँ अपनी रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन सविता देवी का मन जैसे किसी पुराने समय में अटका हुआ था। हाथों में पूजा की थाल...Read More
जब रिश्तों ने नई शुरुआत की May 02, 2026 रश्मि अपने कमरे में बैठी थी। आँखें सूजी हुई थीं, लेकिन इस बार वह रो नहीं रही थी। जैसे आँसू भी थक चुके हों। सामने उसकी तीन साल की बेटी काव्...Read More