अनदेखे हाथों का आशीर्वाद May 06, 2026 नेहा जल्दी-जल्दी रसोई का काम निपटा रही थी। गैस पर चाय चढ़ी थी, टोस्ट सिक रहे थे और मोबाइल पर बार-बार ऑफिस की मीटिंग के मैसेज आ रहे थे। “हे...Read More
जिस माँ को घर से निकाला, वही बनी शहर की पहचान May 06, 2026 सावित्री देवी चुपचाप चौकी पर बैठी थीं। उनके सामने खुला पड़ा लोहे का पुराना संदूक था, जिसमें सालों की मेहनत, यादें और कुछ पुराने कागज़ संभा...Read More
अधूरी आवाज़ का सहारा May 05, 2026बरसात के बाद की सुबह थी। आँगन में पानी की छोटी-छोटी बूंदें अब भी चमक रही थीं। घर के अंदर हल्की सी ठंडक थी, लेकिन माहौल में एक अजीब सा तनाव घ...Read More
सच की कीमत May 05, 2026 घर के आँगन में आज अजीब सी खामोशी थी। दीवारें वही थीं, लोग वही थे, लेकिन रिश्तों की गर्माहट जैसे कहीं खो गई थी। रवि कुर्सी पर बैठा चुपचाप स...Read More
जिस दिन मैंने अपना फैसला खुद लिखा May 05, 2026 शाम ढल रही थी। आसमान हल्का बैंगनी हो गया था, और हवा में ठंडक घुलने लगी थी। लेकिन पूजा के मन में जैसे आग जल रही थी। वो आँगन में खड़ी थी, हा...Read More
रिश्ते भी रहें, मैं भी रहूँ May 04, 2026 आँगन में हल्की हवा चल रही थी, और घर के अंदर कामकाज की धीमी आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं रसोई में खड़ी सब्ज़ी काट रही थी कि तभी दरवाज़े पर हल्...Read More
दूसरी सुबह May 04, 2026 संध्या का समय था। हल्की-हल्की धूप अब ढलने लगी थी और आँगन में एक शांत सा सन्नाटा पसरा हुआ था। घर के अंदर एक अजीब-सी वीरानी थी। रामप्रसाद जी...Read More