दोपहर की हल्की धूप आँगन में फैली हुई थी। आम के पेड़ के नीचे रंगोली बनी थी और घर में पकवानों की खुशबू तैर रही थी। आज घर में खास दिन था—पायल क...Read More
शाम ढल रही थी। आसमान में सूरज की आख़िरी किरणें जैसे धीरे-धीरे बुझ रही थीं—ठीक वैसे ही जैसे इस घर की खुशियाँ। घर के आँगन में रखी कुर्सी पर आर...Read More
सुबह के करीब साढ़े छह बजे होंगे। खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही थी और बाहर गली में दूध वाले की साइकिल की घंटी सुनाई दे रही थी। मीना जी धीरे-...Read More