दूरी में भी अपनापन

May 02, 2026
  घर के अंदर हल्की-हल्की हलचल थी, जैसे कोई नया अध्याय शुरू होने वाला हो। अलमारी के दरवाज़े खुले थे, बक्से इधर-उधर पड़े थे और बीच में खड़ी थी...Read More

आख़िरी बार “बाबूजी”

May 01, 2026
  घर के अंदर एक अजीब-सी खामोशी थी। दीवारों पर टंगी घड़ी की टिक-टिक जैसे हर पल का हिसाब दे रही थी, और उस खामोशी के बीच बैठे थे रघुनाथ बाबू—एक...Read More

फैसले की कीमत

May 01, 2026
  घर के बड़े ड्रॉइंग रूम में रंग-बिरंगे गुब्बारे लगे थे, केक की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी और हँसी की आवाज़ें दीवारों से टकराकर लौट रही थी...Read More
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