जब ‘ना’ कहना जरूरी हो जाता है March 21, 2026 घर का दरवाज़ा धीरे से खुला और प्रिया अंदर आई। कंधे झुके हुए थे, चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी। हाथ में ऑफिस का बैग था और दिमाग में दिनभर की...Read More
पहचान का असली रंग March 21, 2026 शाम ढल रही थी। शहर की सड़कों पर हल्की-हल्की रोशनी जलने लगी थी। उसी भीड़-भाड़ के बीच मीरा अपने ऑफिस से घर लौट रही थी। हाथ में बैग, चेहरे पर...Read More
बराबरी की असली कीमत March 21, 2026 शाम का समय था। बाहर हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन घर के अंदर का माहौल गर्म और भारी था। कविता रसोई में खड़ी चुपचाप चाय बना रही थी। ...Read More
चलते रहना ही जीवन है March 20, 2026 गाँव के उस पुराने घर के बरामदे में एक लकड़ी की चौकी पड़ी रहती थी। उसी चौकी पर दादाजी शाम को बैठा करते थे। सफेद धोती, हल्का-सा कुर्ता, आँखो...Read More
दूरी जो रिश्तों को बचा गई March 20, 2026 “अनु, ये दाल इतनी अलग क्यों लग रही है आज?” अभिषेक ने पहली कौर लेते ही पूछा। अनुपमा ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, “मैंने थोड़ा घी ज्या...Read More
अब चुप नहीं रहूंगी March 20, 2026 सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। पूजा अपने कमरे में बैठी थी, हाथ पेट पर रखा हुआ था। सातवां महीना चल रहा था, लेकिन चेहरे पर खुशी ...Read More
खामोशी के पीछे छुपी आवाज़ March 20, 2026रीना की शादी एक संयुक्त परिवार में हुई थी, जहाँ हर रिश्ते का अपना एक अलग रंग था। घर बड़ा था, लोग ज्यादा थे, और हर व्यक्ति के स्वभाव में फर्क...Read More