यादों की कीमत

March 31, 2026
  सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। घर बहुत बड़ा था—ऊँची छत, चमचमाती फर्श, महंगे फर्नीचर और हर चीज़ में अमीरी झलक रही थी। लेकिन उस ...Read More

कहने का तरीका

March 31, 2026
  बरामदे में रखी मनी प्लांट की बेल धीरे-धीरे हवा में हिल रही थी, जैसे घर की खामोशी को सहलाने की कोशिश कर रही हो। लेकिन अंदर माहौल कुछ और ही ...Read More

कीमत का सच

March 31, 2026
  बरामदे में रखी लोहे की कुर्सी पर बैठी राधा की आँखें दरवाज़े पर टिकी थीं। शाम ढल रही थी, लेकिन उसके मन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अचानक दर...Read More

समझ का असली आईना

March 30, 2026
  सविता जी रसोई में खड़ी थीं। चाय बनाते-बनाते उनका ध्यान बार-बार दरवाज़े की ओर जा रहा था। तभी फोन की घंटी बजी। “हैलो मम्मी…” “हाँ बेटा, बोल ...Read More

समय का आईना

March 30, 2026
रमा देवी रसोई में खड़ी थीं और तेज़-तेज़ बर्तन पटक रही थीं। उनके चेहरे पर झुंझलाहट साफ झलक रही थी। "हे भगवान! ये बुढ़ापा भी ना… न खुद चै...Read More

सच्ची बरकत का मतलब

March 30, 2026
  सुबह के करीब छह बज रहे थे। गली में दूधवाले की साइकिल की घंटी बज रही थी, लेकिन गुप्ता परिवार के घर से उठती तेज आवाजें उस शांति को तोड़ रही ...Read More
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